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कारगिल विजय: इतिहास में दर्ज स्वर्णिम शौर्य गाथा


हाल ही में कारगिल युद्ध में भारतीय सेना की शानदार विजय की 20वीं वर्षगांठ पर सारे देश में जो तीन दिवसीय भावभीनी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए, उसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की जानी चाहिए। तीन दिनों के कार्यक्रम की इस श्रृंखला का आयोजन प्रधानमंत्री की पहल पर ही किया गया था, जिन्होंने कुछ समय पूर्व एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था’ सौगंध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नहीं झुकने दूंगा” इसी भावना के साथ भारतीय सेना के 527 जवानों ने 20 वर्ष पूर्व हिमालय के दुर्गम पहाड़ियों पर पाकिस्तानी सेना के छक्के छुड़ाते हुए अपने प्राणों पर कर दिए थे। मां भारती के उन जांबाज सपूतों की शहादत को नमन करते हुए देशवासियों ने यह प्रण किया है कि मातृभूमि के सम्मान और गौरव की रक्षा हेतु कोई भी कुर्बानी देने से पीछे नहीं हटेंगे।

इस विजय दिवस पर जो अनूठे कार्यक्रम सारे देश में आयोजित हुए है, उनका असली मकसद भी यही था कि शहीदों के शौर्य साहस और पराक्रम की कहानियों को एक बार पुनः देशवासियों के सामने इस तरह प्रस्तुत किया जाए कि उनके दिलों में देश भक्ति और देश प्रेम का वह जज्बा पैदा हो सके जो किसी भी देश की अखंडता और संप्रभुता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए देशवासियों के दिलों में हमेशा बने रहना चाहिए

इसमें कोई संदेह नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कारगिल विजय दिवस को अविस्मरणीय बनाने के अपने पुनीत उद्देश्य में सफल हुए है। दुश्मन की कायर सेना पर शानदार विजय की गौरव गाथा एवं जांबाज शहीदों के शौर्य ,साहस और पराक्रम की प्रेरक कहानियां सुनकर हर भारतवासी गर्व से कह रहा है कि सौगंध मुझे इस मिट्टी की यह देश नहीं झुकने दूंगा गौरवपूर्ण कारगिल विजय की 20वीं वर्षगांठ पर नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें इस युद्ध में शहीद हुए भारतीय सेना के जांबाज जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।

इसी अनूठे कार्यक्रम में एक पल ऐसा भी आया जब कार्यक्रम में मौजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं थल सेना अध्यक्ष बिपिन रावत की आंखें भी नम हो गई। युवाओं के एक दल ने शारीरिक भाव भंगिमाओ के माध्यम से कारगिल युद्ध में प्राण निछावर करने वाले लांस नायक बच्चन की शहादत गाथा का मार्मिक प्रस्तुतीकरण किया तो कार्यक्रम में मौजूद हर व्यक्ति की आंखों से आंसू झलक पड़े। इसी अनूठे और यादगार समारोह में शहीद लांस नायक की पत्नी कमलेश वाला को प्रधानमंत्री ने सम्मानित भी किया

प्रधानमंत्री मोदी ने इस कार्यक्रम में पाकिस्तान का सीधे-सीधे नाम लिए बिना उसे यह संदेश दे दिया है कि उसने जब भी भारत के साथ छल किया है, उसे मुंह की खानी पड़ी है। हमने हमेशा उसके छल को छलनी किया है। पीएम ने साफ कहा कि युद्ध में पराजय से ये लोग अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए अब आतंक को बढ़ावा दे रहे हैं, परंतु उनको अपने नापाक इरादों में कभी सफलता नहीं मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने सिंह गर्जना करते हुए कहां की भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए समुद्र से अंतरिक्ष तक अपने सामर्थ्य का प्रयोग करेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि सेनाओं के आधुनिकीकरण और उन्हें सुसज्जित करने के लिए धन की कोई कमी आने नहीं दी जाएगी। कारगिल युद्ध में भारतीय सेना के शौर्य, साहस औऱ पराक्रम को सराहनीय बताते हुए थल सेना अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने इस आयोजन को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि 20 साल पहले हमारी सेना ने पड़ोसी देश को ऐसा सबक सिखा दिया है कि वह दोबारा कारगिल जैसी हरकत नहीं करेगा।

दरअसल कारगिल युद्ध पाकिस्तान के छल का ही नतीजा था ,लेकिन उसने यह नहीं सोचा था कि उसे अपनी इस हरकत की बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। कारगिल युद्ध में शर्मनाक हार झेलने वाला हमारे पड़ोसी देश को सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट में एयर स्ट्राइक के द्वारा भी भारत ने यह कठोर संदेश दे दिया है कि वह आतंक को बढ़ावा देकर भारत के विरुद्ध जो छद्म युद्ध वर्षों से कर रहा है उसे उसकी भी महंगी कीमत चुकानी पड़ेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर देशभर में शहीदों की याद में कार्यक्रमों का आयोजन करने के अलावा भी सरकार ने विगत युद्ध में शहीद हुए भारतीय सेना के जांबाज जवानों की पुण्य स्मृति को संजोने के लिए अनेक कदम उठाए हैं, जिनमे नई दिल्ली में निर्मित राष्ट्रीय शौर्य स्मारक विशेष उल्लेखनीय है।

नई दिल्ली में इंडिया गेट के समीप जो नेशनल वार मेमोरियल निर्मित किया गया है, उसकी 16 दीवारों पर उन पैतीस हजार नौ सौ बयालीस शहीद सैनिकों के नाम उत्कीर्ण किए गए हैं ,जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए है। इस अनूठे स्मारक के माध्यम से उन सभी वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई है, जिन्होंने स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद पिछले 72 वर्षों में मातृभूमि के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी वर्ष फरवरी माह में इस नेशनल वार मेमोरियल का औपचारिक उद्घाटन किया था। देश में शहीद जवानों की पुण्य स्मृति को संजोने के लिए ऐसे भव्य स्मारक की स्थापना के लिए पिछले कई वर्षों से प्रयास तो किए गए थे, परंतु वे परिणीति की बिंदु तक तभी पहुंच पाए थे।

जब केंद्र में प्रधानमंत्री की बागडोर नरेंद्र मोदी के हाथों में आई ,तब प्रधानमंत्री मोदी ने इस अनूठे स्मारक की पूर्णता हेतु सक्रिय पहल की। मोदी ने लंबित पड़े इस कार्य को शुरू करवाकर यह साबित कर दिया है कि मातृभूमि की रक्षा के लिए हंसते-हंसते हम अपने प्राण देने वाले मां भारती के जांबाज सपूतों की शहादत को उनकी सरकार और सारा देश कभी विस्मृत नहीं करेगा।

कृष्णमोहन झा/
(लेखक IFWJ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और डिज़ियाना मीडिया समूह के राजनैतिक संपादक है)

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