डिंडौरी: इस दंगल गर्ल को मिल जाए ट्रेनर तो कई गोल्ड मिडिल हो सकते है चित

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डिंडौरी : आपने ने आमिर खान की हिट फिल्म दंगल देखी होगी जिसमें आमिर अपनी दोनो बेटियों की झगड़े की प्रवत्ति को देखते हुए कुस्ती के गुर सिखाते है हर दाव पेच से पारंगत करते हुए वर्ल्ड चेम्पियन बनाते है। कुछ इसी तरह से आदिवासी जिला डिंडौरी की दंगल गर्ल के नाम से मशहूर हो रही चांदनी कुंजाम जो खेल युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित मुख्यमंत्री कप में जिला स्तरीय और संभाग स्तरीय खेल कुस्ती में विजयी हासिल करते हुए राज्य स्तरीय खेल में अपना स्थान बनाने में सफल हुई है । चांदनी को कुस्ती का दांव पेंच सिखाने वाले गुरु कोई और नही बल्कि उसके पिता गोविंद कुंजाम है जो ग्रामीण परिवेश में खेलते हुए अपने गाव के कुस्ती पहलवान हुआ करते थे।

डिंडौरी जिले की दंगल गर्ल के नाम से मशहूर हो रही खिलाड़ी का नाम है चांदनी कुंजाम । जो शहपुरा जनपद क्षेत्र के सारसवाही पंचायत के पोषक ग्राम पहरुआ गाँव की रहने वाली है। चांदनी महज 13 वर्ष की है जो शहपुरा के सीनियर बेसिक हाई स्कूल में कक्षा 8 वी क्लास में अध्ययन रत है। चांदनी ने हाल के दिनों में ही डिंडौरी जिले का प्रतिनिधित्व करते हुए शहडोल संभाग मे खेल युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित संभाग स्तरीय कुस्ती खेल प्रतियोगिता में जीत से हासिल की है । चांदनी की जीत पर न सिर्फ स्कूल बल्कि पूरा गांव चांदनी पर गर्व महसूस कर रहा है । कुस्ती महंगा खेल है जिसमे दांव पेंच के सिखाने के लिए अच्छे गुरु सहित खिलाड़ी को नियमित अभ्यास और सेहत के लिए अच्छी खुराक की आवश्यकता होती है। अगर चांदनी को यह सब मिल जाता है तो चांदनी राज्य स्तरीय कुस्ती खेल में जीत हासिल कर आगे बढ़ कर जिला सहित प्रदेश का नाम रौशन करने में कामयाब हो सकती है।

चांदनी के बारे में स्कूल के प्राचार्य बी एल साहू का कहना है कि चांदनी गरीब परिवार की है जिसे कुस्ती खेलना बेहद पसंद है पढ़ाई में भी चांदनी 7 वी क्लास में 67 प्रतिशत अंक हासिल कर 8 वी अध्ययन कर रही है। चांदनी को कुस्ती के गुर उसके पिता के द्वारा सिखाया गया है।जो जल्द राज्य स्तर में खेलने जाएगी।चांदनी पढ़ाई में भी तेज है जो नियमित पढ़ाई के लिए सारसवाही ग्राम से निकल कर शहपुरा में रहकर पढ़ रही है। कुछ दिनों पूर्व मिल बाचे कार्यक्रम में स्कूल में प्रदेश के खाद्य मंत्री ओमप्रकाश धुर्वे पहुँचे थे जिनसे बच्चियों ने आईएएस ओर आईपीएस बनने के लिए पढ़ाई का प्रश्न किया था लेकिन चांदनी ने उनसे कुस्ती में आगे बढ़ने के लिए लिए सवाल किया था।

चांदनी कुंजाम कुस्ती का गुर अपने पिता गोविंद से पिछले कुछ सालों से सीख रही है ऐसा नही है कि गोविंद के बेटा नही है बेटा होने के बावजूद गोविंद अपनी छोटी बेटी चांदनी को बचपन से ही लड़ाई झगड़े को देखते हुए उसे कुस्ती के बारे बतलाते थे और जब कभी मौका मिलता तो कही घर पर तो कही खेतो में जाकर उसे कुस्ती के दाव पेच सिखाते थे। जैसे जैसे चांदनी बड़ी होती गई वैसे वैसे उसके पिता ने उसे कुस्ती लड़ना भी सिखाया। कभी खुद लड़ते तो कभी गाव के ग्रामीणों का सहयोग लेते।
रिपोर्ट @दीपक नामदेव