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धुले पहुंचा मराठा आंदोलन, क्या हैं मांगें ?

maharashtraमुंबई- महाराष्ट्र का मराठा आंदोलन आज धुले जिले में पहुंच गया है। लाखों की तादाद में आंदोलनकारियों ने मौन मार्च निकाला। इसके जरिए मराठाओं ने अपनी शक्ति का जबरदस्त प्रदर्शन किया। धुले में ऐतिहासिक भीड़ जमा हुई।

छोटे शहरों-कस्बों के बाद मराठा क्रांति मूक मोर्चा अब बड़े शहरों की ओर रुख कर रहा है। महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में विरोध प्रदर्शन करने के बाद मराठा समुदाय के लोगों ने अपनी मांगों के साथ ‘मराठा क्रांति मूक मोर्चा’ के बैनर तले मराठा समुदाय से महिलाओं, पुरुषों, विद्यार्थियों, पेशेवरों, वकीलों और डॉक्टरों सहित लाखों की संख्या में लोगों ने भाग लिया।

यह समुदाय कोपर्डी बलात्कार और हत्या मामले में दोषियों को सजा, शिक्षा और सरकारी नौकरियों में कोटा, एससी, एसटी (अत्याचार निरोधक कानून) में बदलाव, किसानों की कर्ज माफी और कृषि उत्पादों के लिए दर की गारंटी सहित अपनी मांगों को लेकर विभिन्न जिलों में जुलूस निकालता रहा है।

महाराष्ट्र का मराठा आंदोलन आज धुले जिले में पहुंच गया है। लाखों की तादाद में आंदोलनकारियों ने मौन मार्च निकाला। इसके जरिए मराठाओं ने अपनी शक्ति का जबरदस्त प्रदर्शन किया। धुले में ऐतिहासिक भीड़ जमा हुई।

 

मराठा आंदोलन की तीन बड़ी मांगे हैं।

मराठा आंदोलन की पहली मांग
मराठा आंदोलन की पहली मांग शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण है। ये मामला फिलहाल हाईकोर्ट में है, इसलिए राज्य सरकार इसमें सीधे तौर पर कोई कदम नहीं उठा सकती।

मराठा आंदोलन की दूसरी मांग
दूसरी मांग दलित अत्यचार निरोधी एक्ट में बदलाव करने की है। पहले आंदोलनकारी इस एक्ट को रद्द कराना चाहते थे। लेकिन अब वो इसमें कुछ बदलाव चाहते हैं, जिससे कानून का दुरुपयोग न हो। सरकार के लिए इस मांग को मानना आसान नहीं होगा, क्योंकि अगर उसने ऐसा किया तो दलित विरोधी करार दिए जाने का खतरा रहेगा।

मराठा आंदोलन की तीसरी मांग
इसी साल जुलाई में महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में एक मराठा लड़की की बलात्कार के हत्या के दोषियों को फांसी की सजा दी जाए। इस आंदोलन की शुरुआत भी इस वारदात के बाद ही हुई थी।

इस सिलसिले में गिरफ्तार 3 आरोपियों को कोर्ट दोषी मानता है या नहीं और दोषी पाये जाने पर उन्हें क्या सजा मिलती है, ये तो अदालती प्रक्रिया से तय होगा। लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस चलाने और विशेष सरकारी वकील नियुक्त करने का ऐलान करके लोगों के गुस्से को शांत करने की कोशिश जरूर की है।  इसके बावजूद आंदोलनकारियों की बाकी दोनों मांगों पर कोई कदम उठाना सरकार के लिए आसान नहीं होगा।

इस रैली की एक खास बात ये भी है कि रैली के मंच पर कोई भी बड़ा नेता नहीं दिख रहा है।  लेकिन इसके बावजूद नेता खुद को इस आंदोलन से अलग नहीं रख पा रहे हैं। एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने कल मराठाओं के आरक्षण का समर्थन किया थाष लेकिन इसके साथ ये भी कहा था कि जिन्हें आरक्षण मिल रहा है उनका भी ध्यान रखना चाहिए।

मराठवाड़ा मे दलित और मराठा संघर्ष का इतिहास रहा है, मराठवाड़ा युनिवर्सिटी के नामांतर के वक्त ये संघर्ष पूरे महाराष्ट्र ने देखा था। अब मराठा आंदोलन की एक मांग एट्रॉसीटी रद्द करने की हैं, जिसकी वजह से अब कुछ दलित नेता इसका विरोध कर रहे हैं।

कुछ दलित संगठनो ने इस मांग के खिलाफ मोर्चा निकालने की तैयारी शुरु कर दी तो, दलित नेता प्रकाश आंबेडकर ने कहा मराठाओं के आंदोलन के खिलाफ दलित आंदोलन ना करें, क्योंकि मराठाओं का आंदोलन दलितों के खिलाफ नहीं है।

लेकिन एक बात तो साफ है की लाखों मराठाओं के सड़क पर उतरने से महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया भूचाल आ गया है और इस पर अब सबकी नजरें टीकी हैं। जाहिर सी बात है कि एक समाज का असंतोष जब इतने बड़े पैमाने पर सड़क पर आएगा तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।




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