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महिला सरपंच ने किया मोदी का सपना पूरा

janki bai

छत्‍तीसगढ़- सालभर पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बड़े जोर शोर से अपने जिस सपने को पूरा करने के लिए अभियान छेड़ा था उसे बेशक पूरे देश में सफलता न मिल पाई हो लेकिन मोदी के इस सपने को एक छोटे से गांव की सरपंच ने जरूर पूरा कर दिखाया।

छत्‍तीसगढ़ के जसपुर जिले के चिकनीपानी गांव की सरपंच ने अपने गांव में सौ फीसदी पक्‍के शौचालय के निर्माण का लक्ष्य पूरा कर लिया है। खास बात ये है कि सरपंच ने यह लक्ष्य मोदी के मिशन स्वच्छ भारत अभियान के तहत ही पूरा किया है।

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार चिकनी पानी गांव की प्रधान जानकी बाई कुजुर की इस असाधारण उपलब्धि को छूने की यह कहानी खासी मुश्किलों भरी है। दसवीं तक की पढ़ाई करने वाली जानकी बाई को कम उम्र में ही पति को खोने का दर्द झेलना पड़ा था।

इसके बाद उन्होंने संघर्ष को ही अपना जीवन मान लिया। छत्तीसगढ़ के खासे पिछड़े इलाके से आने वाली जानकी बाई चौ‌थी बार सरपंच के पद पर चुनीं गई। उन्होंने अपनी मेहनत और संघर्ष के दम पर अपने छोटे से गांव को देख का एक आदर्श गांव बना दिया।

साल 2011 में जानकी बाई को अपने गांव के हर घर में शौचालय निर्माण शुरू करवाने और गांव में साफ सफाई की आदर्श व्यवस्‍था करने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से सम्मानित किया गया।

अपने सरपंची के 16वें साल में जानकी बाई की सफलता को उस समय बड़ी पहचान मिली जब प्रधानमंत्री मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत की। इसके बाद उन्होंने गांव में कंक्रीट की शानदार सड़कें, बिजली और शुद्ध पेयजल की व्यवस्‍था की।

जानकी बाई अभी तक 520 घरों में शौचालयों का निर्माण करवा कर यह व्यवस्‍था कर चुकी हैं कि गांव के किसी भी व्यक्ति को शौच के लिए खेतों पर न जाना पड़े। अपने स्वच्छता अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए जानकी बाई पब्लिक हेल्‍थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की ओर से दी जाने वाले ट्रेनिंग भी करती रहती हैं।

जानकी बाई ने बताया कि वह सावर्जनिक जगहों पर भी 200 से ज्यादा शौचालयों का निर्माण करा चुकी हैं। उसी गांव के एक ग्रामीण बताते हैं कि जानकी देवी ने गांव के सभी घरों में विद्युत की व्यवस्‍था करने के साथ साथ गांव के आखिरी घर तक सड़क का निर्माण करवाया।

उन्हीं के गांव की आरती टिर्की कहती हैं कि पहले महिलाओं को पानी लेने के लिए काफी दूर जाना पड़ता था लेकिन अब गांव के हर वार्ड में एक हैंडपंप है, जबकि कुछ वार्ड तो ऐसे भी हैं जहां दो-दो हैंडपंप लगवाए गए हैं।

अपने संघर्षों का जिक्र करते हुए जानकी बताती हैं कि उन्हें यह सब करने के लिए लाल फीताशाही और विरोधी राजनीति के खिलाफ लंबी जंग लड़नी पड़ी, लेकिन 2600 की आबादी वाले इस गांव का एक बड़ा वर्ग उस दौरान मेरे पीछे चट्टान की तरह खड़ा रहा। उन्होंने मुझे सरपंच बनाया।

जानकी बताती हैं कि मेरे पति सिंचाई विभाग में अधिकारी थे, जिन्हें मेरे सामाजिक जागरूकता के कार्यक्रम काफी पसंद थे। मेरे पति की मौत के एक साल बाद हमारे विरोधियों और क्षेत्र में विकास के विरोधी लोगों ने हाथ मिला लिया, और वो मेरे खिलाफ हो गए।

उन लोगों ने क्षेत्र का विकास रोकने के लिए ‘जल जंगल और जमीन’ के बैनर तले हमारे खिलाफ रैलियां निकालीं। मैं उस समय दुविधा में थी जब सरकार ने यहां जमीन अधिग्रहण कर एक पावर ग्रिड़ का निर्माण करने का निश्चय लिया।

इसके बाद युवाओं ने इसके विरोध में मेरे खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस ने इन पर काबू पाने का प्रयास किया तो बवाल हो गया, जिसमें दो पुलिसकर्मियों की मौत भी हो गई थी। इसके चलते पुलिस ने कई ग्रामीणों को गिरफ्तार भी कर लिया था।

जानकी बताती हैं गांव के विकास के लिए उन्हें काफी आलोचनाओं से गुजरना पड़ा लेकिन वे लोगों को यह समझाने में सफल रही कि वो विकास चाहती हैं। काफी संख्या में ग्रामीणों की गिरफ्तारी के बहुत से लोग मेरे खिलाफ हो गए और उन्होंने पिछले चुनावों में मेरे खिलाफ एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी को खड़ा कर दिया। हालांकि कांटे के मुकाबले में मात्र चार वोटों से मैं यह चुनाव जीतने में सफल रही। एजेंसी

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