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100 कौरव जन्में थे टेस्ट ट्यूब पद्धति से, कैसे?

यह बहुत दिलचस्प है कि जो हम आज उपयोग कर रहे हैं। उनकी शुरूआत तो सदियों पहले यानी त्रेतायुग और द्वापरयुग में हुई थी। यानी उस समय इन यंत्रों, तकनीक को उपयोग में लाया जाता था।

कहने का आशय है कि जिस टेलीविजन को देखकर हम मनोरंजन और दुनियाभर की खबरों से रू-ब-रू होते हैं। उसका पहला प्रयोग द्वापरयुग में महाभारत युद्ध में हुआ था। जहां संजय ने धृतराष्ट्र को महाभारत युद्ध का आंखों देखा हाल सुनाया था।

महाभारत के अनुसार गांधारी जब एक गोल पिंड को जन्म देती हैं और बाद में एक ऋषि ने इसी पिंड को अलग-अलग घड़ों में रखा, और बाद में 100 कौरवों का जन्म होता है। कह सकते हैं यह पूरी प्रक्रिया आधुनिक युग के टेस्ट ट्यूब पद्धति की ही तरह है।

महाभारत युद्ध में कर्ण के पास अमोध शक्ति थी। यह एक बाण था। इस बाण को धनुष की प्रत्यंचा पर चढ़ाकर वह जिसका नाम लेता था। उसी के पास यह अमोध शक्ति बाण नष्ट कर देता था। ठीक इसी तरह वर्तमान में मौजूद मिसाइल हैं जो लक्ष्य केंद्रित विस्फोटक होती हैं।

वहीं यदि द्वापर युग के पहले की बात की जाए तो रामायण में ऐसे कई दिव्य वस्तुओं को उल्लेख मिलता है। जो आज भी मौजूद हैं। जैसे पुष्पक विमान, वर्तमान में मौजूद हेलीकॉप्टर और हवाई जहाज पुष्पक विमान का ही आधुनिक स्वरूप हैं।

रामायण ग्रंथ में वर्णित लंका युद्ध हो या महाभारत का युद्ध इस दौरान बड़े पैमाने में परमाणु हथियार का उपयोग हुआ था। इनका प्रयोग आज भी हो रहा है।

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