trainsनई दिल्ली – लाल फीताशाही और संवेदनहीन कानून व्यवस्‍था अमानवीय चेहरा सामने आया है। यूपी के बरेली में रेल पटरियों में कटकर जान देने वाले शख्स के ऊपर से 16 से ज्यादा ट्रेनें गुजर गईं और रेलवे पुलिस सीमा विवाद में उलझी रही।

पुलिस की असंवेदन हीनता के चलते आत्महत्या करने वाले शख्स का शव छह घंटे तक रेल की पटरियों पर पड़ा रहा। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, शख्स की मौत बरेली के श्मशान भूमि क्रॉसिंग के पास हावड़ा से अमृतसर जाने वाली अकालतख्त एक्सप्रेस से सुबह करीब सवा छह बजे हुई। यह इलाका किला थाने के अंतर्गत आता है।

बताया जाता है कि घटना के प्रत्यक्षदर्शियों ने किला थाने में इस बात की सूचना दी और दूसरी ओर ट्रेन के ड्राइवर ने बरेली कंट्रोल रूम को इस घटना के बारे में सूचना दी। जिसके बाद बरेली स्टेशन मास्टर ने फौरन जीआरपी सुरक्षा अधिकारियों को जानकारी अधिकारियों को दी। इसके बाद जीआरपी अधिकारियों ने किला थाना पुलिस को फोन कर शव को कब्जे में लेने और उसका पोस्टमार्टम कराने के लिए कहा।

इसके बाद रेलवे पुलिस और यूपी पुलिस एक दूसरे के क्षेत्र का मामला होने की बात कहते रहे और मृतक का शव छह घंटे से ज्यादा ट्रैक में ही पड़ा रहा। पुलिस के इस सीमा विवाद के झगड़े के दौरान मृतक के ऊपर से 16 से ज्यादा ट्रेनें गुजर गईं।

इलाके से तेज गति में गुजरने वाली ट्रेनें शव को रौंदते हुए निकलती रहीं और पुलिस विवाद में लगी रही। शव के ऊपर से गुजरने वाली ट्रेनों में सूर्य यमुना एक्सप्रेस, पूरबिया एक्सप्रेस, पीबीआर एक्सप्रेस, गरीब नवाज एक्सप्रेस, अवध एक्सप्रेस और गरीब रथ समेत कई ट्रेनें निकल गईं।

इसके बाद रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मामले दखल दिया तब जाकर किला थाने की पुलिस ने दोपहर 12 बजे के बाद शव को उठाया और उसे पोस्ट मार्टम के लिए भेजा। ‌किला थाने के दरोगा कामरूल हसन ने कहा है कि अभी तक मृतक का कोई परिजन नहीं पहुंचा और न ही उसकी पहचान की जा सकी है।

 

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