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मुंबई 26 /11 हमला : आतंकी हमले का पूरा सच

Mumbai Attacks 2008

मुंबई [ TNN ] 26 नवंबर 2008 को मुंबई पर हुए आतंकी हमले के बारे में एक बड़ा खुलासा हुआ है। लश्कर-ए-तैयबा के कंप्यूटर विशेषज्ञ 30 वर्षीय जरार शाह ने गूगल अर्थ से मुंबई हमले को अंजाम पहुंचाने में हमलावरों की मदद की थी। उसने गूगल अर्थ की मदद से आतंकियों को मुंबई में हमले की जगहों तक पहुंचने का रास्ता बताया था।

द न्यूयार्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में अमेरिकी और भारतीय अधिकारियों के बयानों तथा पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी के कॉन्ट्रैक्टर एडवर्ड जे स्नोडेन के जारी किए गए दस्तावेजों के आधार पर यह खुलासा किया गया है।

उस रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर अमेरिका, भारत और ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियों ने हाइटेक सर्विलांस और अन्य उपकरणों से जुटाए गए सूचनाओं को आपस में साझा किया होता तो इस बडे आतंकी हमले को टाला जा सकता था।

अगर यह कहें कि तीनों देशों की खुफिया एजेंसियां इस हमले को रोकने में नाकाम रहीं तो इसमें कोई दो राय नहीं होगी।

द न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जरार शाह ने अपनी लोकेशन की पहचान छिपाने और एजेंसियों को भ्रमित करने के लिए एक इ ंटरनेट फोन सर्विस बनाई थी, जिसमें उसका लोकेशन न्यू जर्सी दिखाता था।

उस आतंकी हमले से पहले ही जरार शाह ने यहूदी हॉस्टल और दो होटलों समेत उन जगहों का ऑनलाइन सर्च किया था जहां पर हमलोे को अंजाम दिया गया। उस हमले में 166 लोग मारे गए थे।

उस रिपोर्ट में बताया गया है कि ब्रिटिश एजेंसियां शाह की ऑनलाइन गतिविधियों, इंटरनेट सर्च और संदेशों पर नजर रख रही थीं। एक पूर्व अधिकारी ने बताया कि एक भारतीय खुफिया एजेंसी ने भी शाह की ऎसे ही जांच पड़ताल की थी।

उस रिपोर्ट में अधिकारी के कथन के अनुसार, इन दोनों एजेंसियों के प्रयासों से अनभिज्ञ अमेरिका को मानवीय और अन्य इलेक्ट्रॉनिक स्रोतों से इस हमले के बारे में संकेत मिले थे। उसने भारतीय सुरक्षा अधिकारियों को मुंबई हमले से पहले कई बार आगाह किया था।

पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन ने उस रिपोर्ट में कहा है कि न ही अमेरिकियों, न ही ब्रिटिश और न ही भारतीयों ने उन सभी संकेतों को एक बड़े परिपेक्ष्य में देखने की कोशिश की। – एजेंसी -द न्यूयार्क टाइम्स

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