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6 साल से कलश में सजा रखी अस्थियां, न्याय की गुहार

visual  3.... 018अनूपपुर – माँ जो सबसे पहले तो अपने बेटे को 9 माह तक कोख में पालती है,और उसके बाद जब बच्चे का जन्म हो जाये तो उसके जीवन को सवांरने में जुट जाती है। और बुढापे में आस लगाये बैठी रहती है की अब बेटा बडा हो गया अब बुढापे का सहार हो पर एक बेबस मॉं की पुकार ना तो यहां के सियासी हलको में बैठे नेताओं के कानों तक पहुचीं या पहुंची तो पैसों की चका -चौंध ने सब कुछ सुन कर अनुसुना करने पर मजबुर कर दिया,बची रही सही कसर कानून के नुमांईदों ने यह कह कर पुरी कर दी की ये तो हमारे थाने का मामला ही नही या इस हत्या को घटना बता कर इतिश्री कर दी,और इसकी बानगी दखने को मिली अनूपपुर जिले में अंधे कानून की शिकार माँ कोख से लेकर मौत के बाद भी अपने बच्चे को सीने से लगाये इस अन्धे कानूनू से न्याय की गुहार लगाते पिछले पॉच साल से भटक रही है।

दरअसल मामला मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में ग्राम पंचायत बकही का है,जहां की रतनी बैगा अपने बेटे मोहन बैगा की अस्थयां 6 वर्षो से कलश में सजो कर रखा है। अब तो आलम ये हो चला है की खुद रतनी 74 साल की हो चुकी है और हाथ पैर में जान खत्म होने को आई पर हौसला है की टूटने का नाम नही लेता पर आज के कानून और राजनैतिक पैसो की चमक ने इसके न्याय पाने की आसा को पूरी तरह धूमिल कर दिया पर ये है की अपनी आखरी सास तक न्याय के लिये भटकने की बात करती है।रतनी बैगा ने जो अपने बेटे के साथ करने चली है उसने बेटा तो गवांया ही न्याय के चक्कर में बची कुची जमीन जाजत भी बेंच डाला और अब आलम तो ये हो चला है की दो वक्त की रोटी भी दुभर हो चली ये रतनी बैगा की किस्मत कहिये या उस अमलाई जुट मील के प्रबंधन की पैसों की ताकत की रतनी बैगा की मजबुरी तो सबने देखी पर आंगे आकर न्याय दिलाने का साहस किसी ने नही जुटाया।

अनूपपुर जिले के बकही गांव का है,जहां 6 वर्ष पूर्व शारदा खुली खदान कोल फील्ड का खोदा हुआ डैम था। जहां थोडा सा ही पानी भीषण गर्मी में होता था। मामला 4 अप्रैल 2008 का है एच0जे0आई0जूट मील सोडा फैक्ट्री वा ओरियंट पेपर मील अमलाई में गर्मीयों के समय पानी की किल्लत बनी रहती है। क्यों की सोन में पानी की कमी आ जाती है जिसके चलते पेपर मील को मील चलाने के लिये पानी की जरूरत रहती है और बिना ग्रामपंचायत बकही के अनुमती के पेपर मील प्रबंधन द्वारा गांव के पास बने डैम से मनमाने तरीके से पानी लिया जा रहा था। इसी बात को लेकर ग्रामीणों ने पानी ले जाने का विरोध करते रहे। वहीं ग्रामीणों में युवक मोहन उम्र 34 वर्ष ने कंपनी का खुलकर विरोध किया और अपने गांव से पानी नहीं ले जाने का विरोध करता रहा और डैम में लगे पेपर मील के पंप्पों को बंद कर दिया जिसके चलते बौखलाये जूट मील के असिस्टैंड मैनेजर गुलाब चंद जैन और उसके गार्डो द्वारा मोहन बैगा के साथ मारपीट की गई,और इसी दौरान मोहन बैगा डैम में जा गिरा और जब वह दुसरी बार डैम में लगे पम्प के पाईपों को पकड कर बाहर आने की कोशिस कर रहा था तो असिस्टैड मैनेजर गुलाब चंद जैन द्वारा मृतक मोहन बैगा के मुह पर जोरदार लात मार कर वापस डैम में गिरा दिया गया जिससे उसके मुह में चोट लगने से उसकी मौत हो गई, ऐसा आरोप ग्रामीणो और उसकी मॉ का है ।

वर्तमान अमलाई थाने के ए0एस0आई0राजेन्द्र त्रिपाठी ने बूढी माँ की समस्या को उस वक्त बढा दिया जहां एक तरफ उसके बेंटे की मौत हो चुकी थी तो दुसरी तदफ पुलिस उद्योगपतीयों से मामला सलटाने के जुगाड में लगी थी,जबकी घटना के कुछ ही मिनटों बाद पुलिस को जानकारी मिल गई थी पर पुलिस घटना स्थल पर दुसरे दिन पहुची और, शव को बाहर निकाल कर पोष्टमार्डम करा कर आक्समिक दुर्घटना बता कर मामले का खत्मा कर दिया।इस खाकी के खिलाडियो ने यहां के सैकडो लोगों से कोई सरोकार नही रखा और ना गवाहों की जरूरत समझी,सब खेल उद्योग पतियों के इसारे पे चलता रहा,बूढी मॉं की समस्या यहीं कम नही हुई,थाना अमलाई “हाडोल जिले में और चचाई थाना अनूपपुर जिले में और कंपनी के हत्यारों ने दोनो जिलों की सीमा का फायदा उठाया,बूढी मां का आरोप है की उसको पोस्टमार्टम रिर्पोट तक नही दी गई।

हम आप को बता दे की इस बुढी मॉं ने जब स्थानिय प्रशासान के रवैये से परेशाना हो कर यहां से लेकर भोपाल तक पहले तो कागजों मे शिकायत करती रही पर सुनने वाला कोई नही ऐसे में बूढी मॉं ने आपने कलेजे के टूकडे को न्याय दिलाने के लिये दिल्ली से भोपाल तक प्रधान मंत्री से लेकर प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह के घर तक तीन बार जा कर शिकायत और न्याय की गुहार लगाई पर यहां भी किसी ने इसकी शिकायत पर गौर नही किया,विधायक,मंत्री,सबसे शिकायात कर थक हारी बूढी मॉं अब पूरी तरह थक चुकी है।

वहीं प्रदेश के वन एवं राजस्व राज्य मंत्री जय सिह मरावी ने लिखित में कलेक्टर अनूपपुर को निर्देशित किया था की उचित कार्यवही इस मामले मे की जाये पर आज तक ना तो कोई कार्यवाही हुई और ना ही आरोपी पकडे गये।

अब आलम तो यह हो चुका है की बूढी मॉे को भी शायद इस बात का अंदाजा हो गया है की इन उद्योग पतियों के खिलाफ उसे न्याय मिलना दुर की बात हो गई है क्यु की प्रशासान इन उद्योग पतियों के सामने बौना सबित हो गया है।
और अब आलम यह है की मोहन की बूढी मां ने अब अपने बच्चे की असिथयो को तब तक नही बहायेगी जब तक उसको न्याय नही मिल जाता,वहीं मृतक मोहन के परिवार में उसकी बुढी मां के अलावा उसके दो बच्चीयां जिनको टी0बी0 जैसी बिमारी ने घेर रखा है,वहीं एक बेटा है जो कहीं मजदूरी कर अपने परिवार को बचाने में जुटा है तो बूढी मां लोगों के यहां बर्तन धो धो कर घर चलाने की कोशिस कर रही है क्यों की घर पर जो था न्याय पाने के लिये सब बेंच कर दौडती रही,न्याय तो मिला नही पर बेटे के साथ पूरा परिवार बिखरने की कगार पर आ गया।

अब सबसे बडा सवाल है की बैगाओं के नाम पर इन राजनेताओं ने खूब वाहवाही लूटी बैगाओं के लिये ये होगा वो होगा पर हम आम को बता दें ये भी एक बैगा परिवार ही है बहर हाल बैगा बाद में पहले तो इन्सान है और प्रसासन और नेताओं को जरा भी “र्मा नही आई इसकी बर्बादी का नजारा देखते हुये कहने को तो देश में समाज सेवियों की कमी नही पर सब नदारद रहे कहां मर गई आप की समाज सेवा या फिर रतनी के पास लुटाने कों अब कुछ नही देख कर सब घबरा गये और इस मॉं को अकेला छोड दिया,कही हमसे ना न्याय दिलाने की मांग करने लगे,

माना की प्रशासन के नुमाईदों की मजबुरी होगी राजनेताओं को आने वाले चुनाव में चंदे की फिक्र होगी पर आप तो अपने आप को समाज सेवी बताते हो ना कहा गई आप की समाजसेवा,बहर हाल जो भी हो अब तो रतनी बैगा खुद ही जिंदगी के आखरी पडाव पर है हाथ पैरों में दम नही पर हौसला है की मरने के पहले टुटने को तैयार नही,न्याय मिला तो अच्छी बात नही तो बेटे की अ-िस्थयां मां के साथ ही जायेगी,अब तो रतनी को भी इस बात का अहसास हो चला है की इस दुनियां में अंधा कानून चलता है जो बिन देखे ही दौडता रहाता है इस में कितने बेबस लाचार,बेगुनाहों की बली चढती है ये हम आप सब को पता है।

स्पेसल रिपोर्ट :- विजय उरमलिया

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