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17 माह से नवजात शिशुओं को निगल रहा हरदा अस्पताल

हरदा : मध्यप्रदेश के हरदा जिले का यह मामला बडा ही हैरान कर देने वाला मामला है कहने का स्वास्थ विभाग का बडा दावा हर संम्भव मिलेगी सरकारी अस्पताल में निशुल्क उपचार पर जच्चा और बच्चा दोनों का प्रसव के बाद सुरक्षित रहे इसके लिए केन्द्र व राज्य सरकारेें जिलें में लाखों व करोडों रूपए खर्च कर रहे हैं प्रसव के शुरूआती महीनों महीनों से लेकर प्रसव होने तक महिला बाल विकास और जिला अस्पताल में विभिन्न योजनाओं में करोडों रूपए का सालाना बजट सिर्फ इसलिए आंवटित दिया जाता है । कि माता और शिशु की जान बचाई जा सके महिला बाल विकास विभाग द्वारा गर्भवती महिला और उसके गर्भ में पल रहे शिशु को पोषण आहार मिल सके इसके लिए अनेक प्रोग्राम संचालित भी किए जाते हैं।

जिसके तहत माताओं को समय समय पर टीके और आंगनवाड़ी में पोषण आहार दिया जाता है इन योजनओं में करोडो रूपए खर्च होने के बाबजूद भी नतीजे सिफर ही है जमीनी हकीकत देखें तो प्रदेश के हरदा जिले में ही प्रसव के दौरान जिला चिकित्सालय सहित सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ केन्द्रों व गाॅव गाॅव के आसपास की तहसीलों से भी रिफर हरदा जिला अस्पताल किए जाते है 09 -08-2013 मे एस एनसी यु शिशु वार्ड की शुरुआत हुई थी जिसमे विगत वर्षो में 01.04.2015 से 30.09.2016 तक नवजात शिशुओ की मृत्यु 67 हुई जिससे तो साफ जाहिर होता है की सरकार शिशु मृत्यु दर को लेकर कितनी लापरवाह है सीएम का हरदा जिले से ज्यादा लगाव होने के बाद भी शिवराज सिंह चैहान अपने भाषणों के शुरूआत में ही कहते हैं की हरदा जिला ह्ृदय नगरीय है और हरदा जिले को हर योजना का लाभ मिलेगा कोई नही छुटेगा सीएम का हरदा आवागमन लगातार होता आ रहा है इसी तरह अन्य जिलों में भी स्वास्थ सेवाओं की स्थिती का अंदाजा लगाया जा सकता है ।

फैक्ट फाईल:-

एडमीशन .1454

रिफर 233

लांबा18

डिस्चार्ज 1128

मृत्यु 67

जब हमने जिला अस्पताल से इस संदर्भ में एस एन सी यु शिशु वार्ड द्वारा आॅकडे की जानकारी मांगी तो घबराहट में संबंधित द्वारा हमें कम वर्षो के आॅकडों की जानकारी दी गई जब कम समय के आॅकडों में 67 शिशुओ की मौत हुई है तो यह भी आप अंदाजा लगा सकते है की अभी तक कितने नवजात शिशु बच्चों की मौत हुई होगी इस तरह की लापरवाही का खुलासा करने के लिए जब हमने पडताल की तो यह मामला खुलकर सामने आया कई कई बार तो मशीने उपलब्ध होने के बाद भी कई बार मशीनों की कमीयों का भी हवाला दिया जाता है ।

!!सरकार का पैसा कंहा गया !!
हमारे समझ में यह नही आता की सरकार द्वारा रूपयों की कभी कोई कमी नही होती है सरकार द्वारा इतना पैसा खर्च करने के बाद भी कई बार बच्चों की जान नही बच पाती है कई लोगो को हताश व निराश होकर बिलख बिलख कर रोकर अपने घर लौटना पडता है ।

!!आखिर कोन जिम्मेदार !!
ऐसी लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार कुर्सी पर बैठे अधिकारी या सरकार इसके बाबजुद भी शिशुओं की मौत हो जाना चिंतनीय है । इससे डाॅक्टरो की लापरवाही और असंवेदना का आलम साफ देखा जा सकता है ।जिले में प्रसव के दौरान शिशुओ के मौत का आंकडा कम होने का नाम ही नही ले रहा है । जबकि महिला बाल विकास जिले में बच्चों के जच्चा और बच्चा को पोषण आहार के लिए महिला बाल विकास को सरकार द्वारा कई सालाना बजट राशि आंवटित की जाती है इसके बाबजुद भी देखने में यह आ रहा है। की कमजोरी के कारण कई बच्चों की मौत हो रही है अनेक शिशुओं की मौत तो जन्म प्रसव के दौरान ही हो जाती है वही दुसरी और प्रसव के बाद भी कमजारी अन्य कारणों से अस्पतालों में शिशुओं की मौत हुई जिससे महिला बाल विकास और स्वास्थ महकमें की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते है ।

!!डाॅक्टरो की लापरवाही भी शामिल !!
कई बार तो एस एन सी यु में भर्ती बच्चों को समय पर उपचार नही मिलने व कोई अचानक सिरियल कन्डीशन होने के कारण अचानक भोपाल इन्दौर रिफर किया जाता है और डाक्टर उस बीच अपनी डयुटी के तय समय पर न रहकर अपने घर पर होते है हमने यह मामला भी अपनी ही आॅखों से देखा जब परिजनों की आॅखों से अपने बच्चें की जान बचाने को लेकर नाराज हुए थे मामला है 26 जनवरी पर हुए बालक का जिसको 2 से 4 दिन तक वार्ड में रखा गया और यह कहकर रिफर कर दिया की उसके फैफडों में दुध चला गया है वंही उस उस समय डुयटी पर तैनात डाक्टर को फोन बार बार करने के बाद भी दो घंण्टे के बाद अस्पताल पहूॅचे इसी लापरहवाही का हर्जाना किसी अधिकारी या कर्मचारी को नही भुगतना पडता है लेकिन जिसका सीने का टुकडा होता वो बच्चा उसे बडा ही दुख होता है ।

!!  दुसरा मामला !!
जिला चिकित्सालय में बच्चंे को लेकर विगत समय में अस्पताल की लापरवाही के चलते मासूम से बच्चे को खाली आॅक्सीजन सिलेंण्डर लगा दिया गया था जिसको लेकर परिजनों के द्वारा जमकर हंगामा भी किया गया माॅ का रो रो कर बुरा हाल हो गया वही अभी तक सिर्फ उस संबंध में जाॅच चल रही है । परिजन जनसुनवाई के चक्कर लगा लगाकर परेशान हो रहे है वही परिजनों का कहना है कि हमे दोषियों के खिलाफ कार्यवाही होना चाहिए ।

!! तीसरा मामला !!
ताज़ा मामला दोबारा वही हुआ जैसा सोंचा भी नही होगा एक बार फिर जिला चिकित्सालय में लापरवाही सामने आई जंहा सोनोग्राफी किए बिना ही एक घायल बालक को टांके लगा दिए और फिर उसे 24 घन्टे तक कोई सर्जन देखने तक नही पंहुचा इस कारण बालक की मौत हो गई । मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रवंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल मे तोड़फोड़ कर दी वंही बच्चे की मौत के बाद नाराज परिजनों ने बालक के शव को अस्पताल के मुख्य गेट पर रखकर जमकर हंगामा किया पिळ्याखाल निवासी जगदीश केथवास ने यह बताया कि बुधवार को दोपहर में उनका बेटा राजा उर्फ़ राजू साइकल चलाने के दौरान गिर गया ,जिसके बाद साइकल का हेंडल उसके पेट में जा घूंसा दोपहर मे राजा को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया । जंहा ड्यूटी पर डॉक्टर धनवारे ने उपचार कर टांके लगा दिए । इसके बाद गुरुवार को दोपहर में कोई डॉक्टर उस बालक को देखने तक नहीं आया और बालक की मौत हो गई परिजनों का कहना था कि दर्द से चिल्ला रहे बालक को देखने तक कोई भी डॉक्टर नहीं आया सिर्फ नर्स व् कंपाउंडर ही नजर आएं । मृतक बालक की माँ का रो रो कर बुरा हाल हो गया ।

इनका कहना है ……………

कई बच्चों के वजन कम होते है कोई 1000 ग्राम का होता है तो कोई और कम ग्राम का किसी बच्चें को सांस लेने में भी दिक्कत होती है इस कारण ऐसा होता है अगर डाॅक्टरों की लापरवाही है तो मै बिल्कुल दिखवाता हुॅ और जाॅच की जाएगी

तत्कालीन जिला चिकित्सालय सी एम एच ओ हरदा
आरसी उदेनीया

एस एन सी यु मै कई बच्चे कम वजन के होने इन्फेक्शन और समय से पहले कई बच्चे जन्म ले लेते हैंहमारे द्वारा पूर्ण रुप से बच्चो को बचाने की पूरी कोशिश की जाती है।

हरदा सी एम एच ओ प्रभारी

डॉ रविंद् कुमार जैन

रिपोर्ट @जितेन्द्र वर्मा

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