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मध्य प्रदेश बजट “दिखावटी” व जन विरोधी- आप

alok-agarwal-with-shivraj-singh-chauhan#भोपाल - आज मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री #जयंत मलैया ने 2016-17 का #बजट पेश किया। आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक  आलोक अग्रवाल ने कहा कि यह पूरा बजट साफ़ तौर पर दिखावटी है और जनता की आवश्यकता और अपेक्षाओं से बहुत दूर है। प्रदेश सरकार महंगाई,बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानी, बिजली, पानी जैसे गंभीर मुद्दों पर कोई राहत देने में पूरी तरह असफल रही है। वहीँ प्रदेश सचिव अक्षय हुंका ने कहा कि इस बजट में युवाओं और महिलाओं के लिए कुछ नहीं है। बजट की बिन्दुवार प्रतिक्रिया निम्नानुसार है ।

किसान: मध्य प्रदेश में किसान लगातार आत्महत्या कर रहा है लेकिन फिर भी प्रदेश सरकार ने किसानों के लिए कोई विशेष राहत या प्रावधान इस बजट में नहीं किया है। बटाईदारों को और पट्टे पर खेती करने वालों को बीमा योजना का फायदा देने की बात कही गयी है, पर यह सर्वविदित है कि बीमा राशि तो भू स्वामी किसानों तक भी कभी ठीक से नहीं पहुंची है।जिनको मिलती है वह भी बहुत कम मिलती है। किसानों को फसलों के उचित दाम सुनिश्चित करने की कोई व्यवस्था नहीं की गयी है।

स्वास्थ्य: म.प्र. में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गयी है।प्रदेश के 75% बच्चों में खून की कमी है, 60% बच्चे कुपोषित हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधा का अभाव है परंतु इस बजट में कोई स्वास्थ्य के बारे में कोई विशेष प्रावधान नहीं है।

युवा: युवाओं को लेकर सरकार ने कोई ठोस योजना नहीं दी है। मेक इन इंडिया की तर्ज पर मेक इन मध्य प्रदेश का जो नारा शिवराज सरकार ने दिया था वो इस बजट से नदारत रहा। मध्य प्रदेश के युवा देश विदेश में बड़ी बड़ी कंपनियों में काम कर रहे हैं पर मध्य प्रदेश में नौकरियों के अवसर नहीं है। युवा लगातार पलायन कर रहा है, और मध्य प्रदेश सरकार पिछले कई सालों से आईटी पार्क विकसित करने की बात कर रही है परंतु जमीन पर हकीकत कुछ और ही है। साथ ही "entrepreneurship development (उद्यमिता विकास) पर कोई रणनीति नहीं बनायी गयी है।

महिला: महिलाओं के विकास और सुरक्षा के लिए कोई भी विशेष प्रावधान इस बजट में नहीं किये गए हैं।

रजिस्ट्री: रजिस्ट्री शुल्क बढ़ाकर आम जनता जो अपने एक मकान का सपना देख रही है उसके सपने को तोड़ दिया है। रजिस्ट्री शुल्क को बढ़ाना आम जनता के साथ धोखा है।

पानी: पूरे प्रदेश में पीने के पानी की गंभीर समस्या है, हजारों गांवों में पानी के लिए 10 किलोमीटर तक चलना पड़ता है, आश्चर्य है कि इसके समाधान के लिए सरकार ने कोई ठोस प्रावधान नहीं किया है।

शिक्षा: तमाम अध्ययनों के अनुसार प्रदेश में शिक्षा की उपलब्धता व् गुणवत्ता की बहुत कमी है, परंतु इस बारे में भी कोई कारगर कदम उठाने की घोषणा नहीं की गयी है।

कानून व्यवस्था : मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था बुरी तरह चरमराई हुई है और प्रदेश महिला अपराधों में तो पूरे देश में पहले नंबर पर है, पर इस पर किसी प्रकार की बात नहीं की गयी। उल्टा मंत्री जी का यह कहना की "प्रदेश में सब सोहाद्रपूर्ण है" बहुत ही आश्चर्यजनक है।

डिजिटल मंडिया: 50 मंडियों को डिजिटल करने की बात की गयी है। "डिजिटल इंडिया" की दृष्टि से यह बहुत अच्छा प्रतीत होता है पर जिस प्रदेश की राजधानी में इ-रजिस्ट्री तक चलाने में तमाम समस्याएं आ रही हों वहां मंडियों को डिजिटल करना दूर की कौड़ी है।

इंटरनेट कौशल: 3 लाख ग्रामीण महिलाओं को "इंटरनेट कौशल" ट्रेनिंग देने का लक्ष्य है। पूरे प्रदेश में गावों में सड़क और बिजली नहीं है वहां पर इंटरनेट चलेगा कैसे ?

रचनात्मकता की कमी: प्रदेश के सरकार में इनोवेशन की बहुत कमी है। सरकार या तो जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ा कर पैसे एकत्र कर रही है या फिर लोन ले रही है, परन्तु revenue बढ़ाने के कोई भी उपाय करने भी अक्षम रही है। हर साल लगातार लोन लेना प्रदेश की आर्थिक सेहत के लिए बहुत घातक है।

भ्रष्टाचार: बजट कैसा भी बनाया जाए लेकिन जब तक उसके क्रियान्वन में भ्रष्टाचार को नहीं रोका जाएगा तब तक उस बजट का कोई औचित्य नहीं है। सरकार द्वारा भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कोई भी प्रभावी कदम नहीं उठाये गए हैं। कुल मिलकर यह बजट आम जनता की अपेक्षाओं को तोड़ने वाला है।

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