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दलित लड़की से रेप के आरोपी को 5 जूते मारने की सजा

rape caseकुरुक्षेत्र – यमुनानगर जिले के कस्बा रंजीतपुर स्थित गांव भगवानपुर में पंचायत ने दलित लड़की से रेप के आरोपी को अनोखा फैसला सुना दिया। पंचायत ने रेप की सजा महज 5 जूते मारने की सुनाई वह भी पंचायत के बीच। हैरत इस बात की है कि यह फैसला गांववालों ने भी स्वीकार कर लिया। हालांकि पीड़ित लड़की और उसका परिवार इंसाफ के लिए पुलिस के पास पहुंचा, लेकिन पुलिस इस मामले को महज एक झगड़ा बताकर पल्ला झाड़ रही है।

अब गांव के सभी लोगों ने चुप्पी साधी रखी है। गांव की गलियों में पुलिस की गाड़ी चक्कर काट रही है। आरोप है कि गांव के एक दलित परिवार की एक लड़की के साथ गांव के ही एक युवक ने 25 मार्च को रेप किया। लड़की ने जब घर पर बात बताई तो पहले परिजन चुप रहे लेकिन बाद में लड़की के गूंगे पिता से बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने पत्नी के साथ जाकर पुलिस में शिकायत की। अब पुलिस पर भी आरोप है कि मामले को गांव में ही निपटाने की बात कही क्योंकि गांव की पंचायत ने यही इशारा किया था।

कुछ दिन पहले गांव में एक पंचायत हुई जिसमें आरोपी युवक काला को भी बुलाया गया और पंचायत ने गांव का मामला बताते हुए आरोपी को रेप की सजा 5 जूते मारने की सुना दी। ग्रामीण मायाराम का कहना है कि इस पर गांव के लोगों ने भी ऐतराज नहीं जताया और वहीं भरी पंचायत में आरोपी को 5 जूते मारकर उसका गुनाह माफ कर दिया। लेकिन इस मामले की भनक जब मीडिया को लगी तो केस रफादफा कराने के लिए पुलिस से लेकर गांव के लोग भी एकजुट हो गए।

आरोप है कि पुलिस भी नहीं चाहती थी कि यह मामला बाहर आए, लेकिन मंगलवार को जब मीडिया के कुछ लोग रंजीतपुर पुलिस चौकी में पहुंचे तो वहां पहले से ही बिलासपुर एसएचओ और डीएसपी यमुनानगर आए हुए थे। जिन्होंने इस पूरे मामले को महज पानी के लिए हुआ झगड़ा बता दिया। हालांकि गांव के लोग दबी जुबान में यह मान रहे हैं कि आरोपी को जूते मारने की सजा पंचायत में सुनाई गई थी और सरपंच और पुलिस भी वहीं मौजूद थे। गांव के लोगों का यह भी मानना है कि ऐसी बातें छुपाई नहीं जातीं। गांव के लोगों के बीच में ही पंचायत हुई थी और वहीं सारा मामला निपट गया था। अब मामला खुलकर सामने आने से गांव के लोग डरे हुए हैं और कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।

चर्चा है दबंगई के चलते पुलिस भी इस मामले को एक तरफ तो झगड़ा बता रही है, वहीं गांव जाकर लगातार जांच में जुटी हुई है। गांव सरपंच महिपाल, एसएचओ रणधीर सिंह और डीएसपी से लेकर चौकी प्रभारी भी इस मामले की जांच में जुट गए हैं। डीएसपी मदनलाल ने केवल यही कहा है कि मामला मारपीट का था और इनका आपस में समझौता हो गया है। इस बीच, खेल और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा है पंचायत को ऐसा फैसला लेने का अधिकार नहीं है, सरकार इस पर संज्ञान लेगी और इस मामले में पुलिस अपना काम करेगी। उधर, महिला आयोग ने भी इस केस में संज्ञान लिया है।

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