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मुंबई- ‘गांधी’ फिल्म में सरदार पटेल का किरदार निभाने वाले ‘शतरंज के खिलाड़ी’ सईद जाफरी नहीं रहे। 86 साल की उम्र में रविवार उनका निधन हो गया। थियेटर, टीवी और ब्रिटिश फिल्मों में अपनी छाप छोड़ने वाले जाफरी ने करियर की शुरुआत आकाशवाणी से की थी। सईद पहले भारतीय थे जिन्हें ‘आर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर’ से नवाज़ा गया था।

उन्होंने करीब सौ हिंदी फिल्मों में काम किया। पर 1977 में आई सत्यजीत रे की ‘शतरंज के खिलाड़ी’ ने उन्हें पहचान दी। उन्होंने मेहरुनिमा (मधुर) से शादी की, पर 10 साल बाद अलग हो गए। यह बात उन्हें जिंदगीभर परेशान करती रही। सईद ने अपनी डायरी में इसे लिखा भी है। सईद की बातें उन्हीं के शब्दों में मैं 19 साल का था जब मेहरुनिमा से शादी हुई। वो 17 की थी। मैं ब्रिटिश कल्चर पर फिदा था।

बिना अटके अंग्रेजी बोलना, महंगे सूट पहनना शौक था। अदब तो जैसे ताक पर रख दिया था। मेहरुनिमा ठीक उलट थी। आज्ञाकारी पत्नी, अच्छी मां और अच्छी होममेकर। पर वो नहीं, जो मैं चाहता था। मेरी सलाह भी उसे बदल न सकी। इस कोशिश में हम दूर होते गए और आखिर में अलग हो गए।

इस बीच मैं जेनिफर को चाहने लगा। बाद में हमने शादी भी कर ली। पर 6-7 महीने में ही मुझे महसूस होने लगा कि जेनिफर को मेरी फिक्र ही नहीं है। उसे तो अपने सपनों को पूरा करने की चिंता थी। अब मुझे मेहरुनिमा का अपनापन याद आने लगा। मैंने कभी मेहरुनिमा और बच्चों की ओर पलटकर नहीं देखा था। सात साल बाद मैंने शेफ मधुर जाफरी के बारे में आर्टिकल पढ़ा।

मैं उस महिला की तस्वीर देख दंग रह गया। वह मेहरुनिमा ही थी। उसने दूसरी शादी कर ली थी और नाम बदल लिया था। अब अमेरिका में थी। मैं उससे मिलने पहुंचा तो उसने मना कर दिया। बच्चे सिर्फ एक बार बात करने को तैयार हुए। बच्चों ने मुझसे कहा-‘नए पिता जानते हैं कि सच्चा प्यार क्या होता है। उन्होंने मां को बदला नहीं, जैसी हैं, वैसी ही कबूल कर लिया। इसी ताकत ने मां को सेल्फ डिपेंड बना दिया।

तब मुझे समझ आया कि खुलेपन की वजह से उनकी शादी टिक पाई। जबकि मेरे स्वार्थ ने उसकी पर्सनैलिटी को कुचल दिया था। इसलिए रिश्ते टूट गए। सच तो यह है कि मैंने सिर्फ खुद से प्यार किया। और जो खुद से प्यार करते हैं, वो दूसरों को प्यार कर ही नहीं सकते।

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