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भारत के बुजुर्ग अपने मानवाधिकारों को लेकर सतर्क नहीं

Agewell Foundation, India

नई दिल्‍ली [ TNN ]भारत में बुजुर्गों के साथ बुरा बर्ताव बेहद आम है। यह बात एक अध्ययन में कही गई है। अपमान के शिकार बुजुर्गों में से एक तिहाई ने इस बात को स्वीकार किया है। एजवेल फाउंडेशन का कहना है कि कुल 28,295 प्रभावित बुजुर्गों में से 10,452 (36.94 फीसदी) ने माना कि उन्हें परेशान करने के तरीकों में बुरा बर्ताव सबसे आम है। वहीं, 6,204 (21.78 फीसदी) ने कहा कि परिवार की तरफ से उनकी सामाजिक जिंदगी पर रोक लगाकर उन्हें परेशान किया जाता है। अध्ययन में 300 जिलों के 50,000 बुजुर्गों को शामिल किया गया था।

इनमें से 29,693 बुजुर्गों ने कहा कि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं। तकरीबन 26.51 फीसदी (13,256 प्रतिभागी) ने कहा कि वे आर्थिक रूप से अपने परिवार पर निर्भर हैं जबकि 14.1 फीसदी (7,051 प्रतिभागी) ने कहा कि वे परिवार से इतर किसी पर निर्भर हैं। अध्ययन में पाया गया कि वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर लोगों में से केवल 29.26 फीसदी का ही अपनी वित्तीय स्थिति पर पूर्ण नियंत्रण था।

14,364 लोगों ने कहा कि वे अपने वित्तीय मामलों का खुद निपटारा नहीं कर सकते क्योंकि उनके पारिवारिक सदस्य या रिश्तेदार उन्हें ऐसा नहीं करने देते हैं।

अध्ययन में 28,295 लोगों ने माना कि संपत्ति का मालिक होते हुए भी उन्हें घर या जमीन के लिए विवाद का सामना करना पड़ा। 47.5 फीसदी का कहना था कि बुढ़ापे में परिवार और समाज का रवैया सम्मानजनक है, जबकि 52.5 फीसदी ने सम्मानजनक नहीं कहा।

अध्ययन के अनुसार 34.3 फीसदी ने माना कि यहां बुजुर्गों के लिए सुरक्षित और किफायती वाहन सुविधा नहीं हैं जबकि 81.03 फीसदी ने कहा कि सड़क परिवहन बुजुर्गों के लिए दोस्ताना नहीं है। 25.8 फीसदी लोगों ने माना कि उन्हें पर्याप्त और उचित भोजन नहीं मिलता है।

अध्ययन में कहा गया कि भारत के बुजुर्ग अपने मानवाधिकारों को लेकर सतर्क नहीं हैं। बहुत कम मामलों में बुजुर्ग अपने अधिकारों के लिए सामने आते हैं।

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