आगरा- हवा में घुलते धुएं के कारण अपनी मर्मरी रंगत खो रहे ‘मुहब्बत की निशानी’ ताजमहल को बेनूर होने से बचाने के लिए आगरा प्रशासन ने खाना बनाने के वास्ते गोबर के कंडों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है और वह चूडिय़ां तथा पेठा बनाने के लिए कोयले के भी प्रयोग पर पाबंदी लगाने की योजना बना रहा है।

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आगरा के मंडलायुक्त और ताज चतुर्भुज जोन के अध्यक्ष प्रदीप भटनागर ने टेलीफोन पर ‘भाषा’ को बताया कि एक अमेरिकी पत्रिका में हाल में छपी एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि भूरे और काले कार्बन कणों के कारण ताजमहल का सफेद संगमरमर पीला पड़ रहा है। इसे गंभीरता से लेते हुए हमने शहर में खाना बनाने के लिए गोबर से बने कंडों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है।

हालांकि भटनागर ने माना कि कंडों के प्रयोग पर पूरी तरह पाबंदी लगा पाना काफी चुनौतीभरा है। उन्होंने कहा कि यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित किए गए ताजमहल की रंगत को बचाने के लिए जारी आदेशों का उल्लंघन करने वालों पर नगर निगम अधिनियम के तहत जुर्माना लगाया जाएगा।

मंडलायुक्त ने गोबर के कंडे जलाने पर पाबंदी लगने से गरीबों को होने वाली दिक्कतों के बारे में पूछे जाने पर कहा कि उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे उन्हें रसोई गैस कनेक्शन दिलाने के लिए विशेष शिविर लगाएं।

उन्होंने कहा कि शहर में चूड़ी तथा पेठा बनाने की इकाइयों में कोयले के इस्तेमाल पर भी जल्द ही पाबंदी लगाई जाएगी, क्योंकि इन भट्ठियों से काले कार्बन के कण निकलते हैं। भटनागर ने बताया कि ताजमहल की रंगत को बचाने के लिए शहर में चलने वाले चार हजार ट्रकों तथा ऑटो रिक्शा को जुलाई तक डीजल के बजाय सीएनजी से चलाने के योग्य बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि हमने आगरा के पेठा उद्योग तथा फिरोजाबाद की चूड़ी उत्पादन इकाइयों से कहा है कि वे ईंधन के दूसरे स्वरूपों का इस्तेमाल करें, क्योंकि कोयले के प्रयोग से निकलने वाला काला कार्बन ताजमहल के रंग को नुकसान पहुंचा रहा है।

भटनागर ने बताया कि बारिश में भी भूरे तथा काले कार्बन की सफाई नहीं हो पाती है। इसके अलावा बल्लियां गाडक़र उन पर पाड़ वगैरह बांधकर उसकी सफाई करना संभव नहीं है, क्योंकि इससे ताजमहल के फर्श को नुकसान पहुंचेगा। ऐसे में कोयले और कंडे के इस्तेमाल तथा वाहनों के धुएं को रोकने की पहल के सिवा और कोई चारा नहीं बचता।

उन्होंने बताया कि संसद की पर्यावरण संबंधी समिति ने भी बढ़ते प्रदूषण के ताजमहल पर पडऩे वाले असर का संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन से इसे रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में रिपोर्ट मांगी है।

प्रदूषण रोकने के अन्य उपायों के बारे में पूछे जाने पर मंडलायुक्त ने कहा कि राष्ट्रीय हरित अभिकरण की सिफारिशों में 15 साल या उससे ज्यादा पुराने वाहनों का इस्तेमाल बंद करने का सुझाव दिया गया है। इस सिफारिश को आगरा शहर में लागू किया जा सकता है।

गौरतलब है कि अमेरिका के जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी और विस्कांसिन यूनीवर्सिटी के विशेषज्ञों द्वारा कराए गए अध्ययन तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्टों में भी ताजमहल का रंग पीला होने की बात सामने आई है।

अमेरिकी संस्थानों द्वारा कराए गए अध्ययन की रिपोर्ट के मुताबिक धूल, ऑर्गेनिक कार्बन भूरा कार्बन तथा मौलिक कार्बन काले कार्बन की वजह से ताजमहल अपनी रंगत खो रहा है। -एजेंसी ब्यूरो

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