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राजीव गांधी चैरिटेबल मामले में राहुल गाँधी को अल्टिमेटम !

अमेठी. उत्तर प्रदेश के अमेठी में चल रहे राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टीज़ को ज़मीन के गलत इस्तेमाल के लिए प्रशासन ने अंतिम और निर्णायक नोटिस भेजा है। नोटिस में वन वीक के अल्टिमेटम के साथ कहा गया है कि यदि इस टाइम पीरियड में ट्रस्टीज़ पेपर्स नहीं दिखा सके तो ज़मीन सरकार के कस्टडी में होगी।
*35 साल बाद दी गई नोटिस*
बता दें कि अमेठी के जायस में राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा 10 हजार स्क्वॉयर मीटर जमीन का इस्तेमाल करते हुए यहां महिलाओं को वोकेशनल ट्रेनिंग दिया जा रहा
है। वहीं 35 साल बाद राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट को प्रशासन से मिले नोटिस को कांग्रेस राजनीतिक बदले के रूप में देख रही है।

*साल भर पहले बीजेपी ने की थी शिकायत*
आरजीसीटी 1982 से यहां ट्रेनिंग सेंटर चला रही है। इस संदर्भ में कांग्रेस एमएलसी दीपक सिंह ने
कहा कि भाजपा राजनीतिक बदला ले रही है। उन्होंने ये भी बताया कि लीगल एडवाइजर्स इस मामले को देख रहे हैं। वहीं, भाजपा जिलाध्यक्ष उमाशंकर पाण्डेय का कहना है की पार्टी की ओर से इस जमीन को लेकर साल भर पहले शिकायत की गई थी। लेकिन पूर्व की समाजवादी सरकार ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। कांग्रेस के मुताबिक 1984 की शुरुआत में ये जमीन ठाकुरदास ट्रस्ट को दी गई थी। जमीन खाली पड़ी थी। राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट बनने के बाद महिलाओं को रोजगार के लिए इसे सौंपा गया था।

*राहुल गांधी भी इसमें हैं ट्रस्टी*
बता दें कि सोनिया गांधी आरजीसीटी की चेयरपर्सन हैं और राहुल इसमें ट्रस्टी हैं। भाजपा ने प्रशासन से इस पर जवाब मांगने के लिए कहा था। एसडीएम अशोक शुक्ला ने बताया कुछ जमीन कॉमन पब्लिक फैसिलिटीज के लिए अलग रखी जाती है। इस मामले में जमीन गर्ल्स कॉलेज के लिए रखी गई थी। सनद रहे कि 1982 में रायबरेली के डीएम ने एसडीएम को लेटर लिखा था। डीएम ने कहा था कि जमीन को वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के लिए रखा गया है, ताकि जॉब ओरिएंटेड ट्रेनिंग दी जा सके।
इससे पहले भी भाजपा की अमेठी जिले की यूनिट ने संजय गांधी हास्पिटल मुंशीगंज में बने गेस्ट हाउस को कांग्रेस द्वारा उसे निजी हित में उपयोग करने का आरोप लगाया था।
*प्रशासन करेगा विधिक कार्यवाई*
इस बाबत एसडीएम तिलोई डा. अशोक कुमार शुक्ला ने बताया नियम के मुताबिक,जमीन को किसी गवर्नमेंट डिपार्टमेंट यागवर्नमेंट इंस्टीट्यूशन के अधिकार में होना चाहिए। लेकिन ऐसा कोई पेपर मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में पिछले 27 मार्च से प्रशासनिक स्तर से ट्रस्ट को नोटिस दी जा रही है, जहां पेपर्स सम्मिट न कर ट्रस्टीज़ केवल टाइम ही मांग रहे हैं। अब तक ट्रस्टीज़ की ओर से जो जवाब आया है वो संतोष जनक नहीं है। ऐसे में अब एक सप्ताह के अंदर अगर साक्ष्य प्रस्तुत नहीं हुए तो ये मानकर के प्रापर्टी राज्य सरकार की स्वामित्व है और ट्रस्ट कब्ज़ा किए बैठे है। फिर विधिक कार्यवाई करते हुए जमीन वापस लेकर सरकार के हैंडओवर कर दी जाएगी।
रिपोर्ट @ राम मिश्रा

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