पुलवामा हमले के बाद जम्मू कश्मीर से धारा 370 और 35 ए पर शुरू हुई बहस और इसे हटाए जाने की मांग के सवाल पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि वह इस मुद्दे पर सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं बोल सकते और ना ही इस मुद्दे पर सरकार के रुख के बारे में उन्हें कोई जानकारी है।

एक समाचार चैनल के कार्यक्रम में जम्मू कश्मीर से 370 या 35 ए हटाए जाने पर केंद्र सरकार के संभावित कदम के बारे में उनसे सवाल किया गया था।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि यह तो सरकार का काम है। मैं संगठन का आदमी हूं, संगठन का काम करता हूं।

वहीं, बाबा रामदेव ने भी इस मुद्दे पर अमित शाह का बचाव करते हुए कहा कि जो संविधान के मूल के ही खिलाफ है, उसके प्रति देश में एक माहौल तो बने। लोग चर्चा तो शुरू करें, इसे मुद्दा तो बनाएं, बाकी रहा सहा काम सुप्रीम कोर्ट और मोदी जी कर देंगे।

अमित शाह ने कहा कि हमने धारा 370 का मुद्दा नहीं छोड़ा है, इस मुद्दे पर आम राय नहीं बन पाई है। 370 और 35A अब भी हमारे एजेंडा में है। हां यह सच है कि जो माहौल बनाना चाहिए था, वो नहीं बन पाया है।

राम मंदिर

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने राम मंदिर के मुद्दे पर कहा, ”’हमने राम मंदिर का मुद्दा कभी नहीं टाला। कांग्रेस ने इसको टाला है। कांग्रेस के लोग सुप्रीम कोर्ट से राम मंदिर का मुद्दा टालने की अपील करते हैं। राम मंदिर उसी जगह पर भव्य बने। यह बीजेपी का संकल्प है। हम राहुल गांधी से अपील करना चाहते हैं कि वह और उनका सहयोगी गठबंधन राम मंदिर चाहते हैं या नहीं?”

राफेल में फूटी कौड़ी का घोटाला नहीं

राफेल मुद्दे पर बार-बार राहुल गांधी के आरोपों के सवाल पर अमित शाह ने कहा कि देश की जनता को स्पष्ट करना चाहता हूं कि राफेल सौदे में फूटी कौड़ी का घोटाला नहीं हुआ है।

उन्होंने राहुल का नाम लिए बगैर कहा कि उनसे पूछना चाहिए कि अनिल अंबानी को कितना ऑर्डर मिला, इसका कोई दस्तावेज है तो दिखाएं। आपके पास सारी सूचनाएं थी तो जब सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा था, तब कोर्ट के सामने ये तथ्य आपने क्यों नहीं रखे?

सत्ता की चाहत नहीं देश का विकास हो चुनाव का मुद्दा

लोकसभा चुनाव के मुद्दों पर उन्होंने कहा कि देश की जनता को तय करना होगा कि चुनाव के मुद्दे क्या होंगे। उन्होंने कांग्रेस का सीधा नाम लिए बगैर कहा कि क्या किसी पार्टी को सत्ता की महत्वाकांक्षा है, यह चुनाव का मुद्दा होना चाहिए?

उन्होंने सवाल उठाया कि नेता, नीति और सिद्धांत के बगैर केवल स्वार्थ के लिए सत्ता की महत्वाकांक्षा चुनाव का मुद्दा होना चाहिए? मेरा मानना है ये चुनाव के मुद्दे नहीं हो सकते। चुनाव का मुद्दा देश का विकास होना चाहिए।

जिन्हे 70 साल में कुछ नहीं मिला, देश के उन गरीबों के जीवन कर्म में सुधार का मुद्दा, देश के किसान की भलाई, देश की सुरक्षा और आतंकवाद को जवाब देना चुनाव का मुद्दा होना चाहिए। बीते 5 साल में भाजपा ने इन मुद्दों को देश में सेट किया है।