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एप्पल को बाजार में टक्कर

Apple-Company-iPhone-6-dispनई दिल्ली [ TNN ] एप्पल बाजार में बिल्कुल नई चीज लाने के बजाय पहले से मौजूद उपकरण को सबसे बढि़या खूबियों के साथ पेश करता है. लेकिन इस बार एप्पल की आईवॉच के सामने चुनौतियां बड़ी हैं. बड़ी स्क्रीन का फोन लॉन्च करने की वजह भी मुकाबला ही है.

एप्पल ने कैलिफोर्निया में हुए सालाना समारोह में बहुप्रतीक्षित घड़ी आईवॉच को पेश किया. घड़ी में मौजूद ढेरों ऐप दिलचस्पी पैदा करने वाले हैं. खासकर मैप जिसके जरिए किसी भी पते पर पहुंचना मुश्किल नहीं होगा. घड़ी में वाइब्रेशन सिस्टम भी है, गलत दिशा में जाने पर वाइब्रेटर आप को आगाह भी करेगा. साथ ही घड़ी आपके दिल की धड़कनों का भी हिसाब रखेगी.

बर्लिन के कम्यूनिकेशंस डिजाइनर मार्टिन डोर्केन कहते हैं, ’’एप्पल किसी नई श्रेणी में उत्पाद तैयार नहीं करता. वह ग्राहकों की जरूरत की कोई तकनीक उठा कर उसका सबसे ऊच्च श्रेणी का रूप तैयार करता है. लेकिन इस समय जबकि फेसबुक, गूगल, अमेजॉन, सोनी और सैमसंग, सभी भारी निवेश की योजना के साथ कुछ नया बाजार में लाने की तैयारी में हैं, एप्पल का वर्चस्व खतरे में पड़ सकता है.’’

एशिया और लैटिन अमेरिका में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का बाजार तेजी से बढ़ रह है. लेकिन ये वे इलाके हैं जहां एप्पल के महंगे उपकरण खरीदने वाले कम ग्राहक हैं. लेकिन एप्पल की प्राथमिकता लाखों सस्ते उपकरण बेचने की बजाय उच्च स्तरीय फीचर वाले उपरण बेचना है, फिर भले वे महंगे हों. बिजनेस इनसाइडर वेबसाइट के लिए तकनीकी विषयों पर लिखने वाले जिम एड्वर्ड्स ने बताया, ’’स्मार्टफोन के बाजार में ज्यादातर कंपनियां नुकसान उठा रही हैं. सिर्फ एप्पल और सैंमसंग मुनाफे में हैं.’’

मुकाबला कड़ा है

इस बार एप्पल के सामने चुनौती कड़ी है क्योंकि अन्य स्मार्टफोन कंपनियां भी उच्च तकनीक को प्राथमिकता दे रही हैं, साथ ही उनके उत्पाद एप्पल के मुकाबले सस्ते होते हैं. सैमसंग और एचटीसी पहले से ही स्मार्टफोन के मैदान में गैलेक्सी और एचटीसी वन जैसे फोन से एप्पल को टक्कर दे रहे हैं. हाल में उन्होंने बेहतर स्क्रीन और इस्तेमाल करने के आसान तरीकों के साथ ग्राहकों के दिल में जगह बनाई है. यह एक अन्य कारण है जिसके चलते एप्पल ने आईफोन सिक्स में बड़ी स्क्रीन लाने का एलान किया है. हालांकि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि असल मुकाबला तो सॉफ्टवेयर के मामले में ही है.

खास ट्रिक

एप्पल के उत्पादों की एक और खास बात यह कि वे ग्राहक को अपने ऑपरेटिंग सिस्टम से बांधकर रखते हैं. एप्पल का कोई भी उपकरण दूसरे एप्पल उपकरण के साथ ही चलता है. ऐसे में एप्पल के एक उपकरण को इस्तेमाल कर रहे लोग आम तौर पर अगला भी एप्पल का ही खरीदते हैं. लेकिन यह ग्राहकों के लिए दिक्कत की बात भी है कि वे एप्पल पर ही निर्भर होने को मजबूर हो जाते हैं.

स्मार्टफोन के 85 फीसदी ग्राहक एंड्रॉयड के आदी हो रहे हैं. एंड्रॉयड के आदी हो जाने वाले ग्राहक पैसे आने पर जब कोई महंगा फोन खरीदना चाहते हैं तो उनके पास कई विकल्प होते हैं. साथ ही हुआवेई और याओमी जैसे चीनी फोन भी बाजार में पैर जमाने में अग्रसर हैं, इनके दाम एप्पल के मुकाबले तिहाई हैं. एड्वर्ड्स के मुताबिक अगर किसी ग्राहक को वही खूबियां एंड्रॉयड फोन में 100 डॉलर में मिलेंगी तो कोई एप्पल पर 700 डॉलर क्यों खर्चना चाहेगा.

आईवॉच को टक्कर

इस हफ्ते एप्पल ने आईवॉच लॉन्च की है जो स्मार्टवॉच के क्षेत्र में नए आयाम तय कर सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इस क्षेत्र में एप्पल का वर्चस्व रहेगा. सवाल यह भी है कि जिनके पास सभी ऐप आईफोन में पहले से मौजूद हैं वे आईवॉच क्यों खरीदना चाहेंगे. फिर आने वाले सालों में दूसरे निर्माता भी इस दिशा में बड़े कदम बढ़ाएंगे. सैमसंग पहले ही अपनी स्मार्टवॉच ’स्मार्ट गियर’ बाजार में उतार चुका है. हालांकि उसे ज्यादा पसंद नहीं किया गया.

एड्वर्ड्स के मुताबिक इस तरह की घड़ी खरीदने की बड़ी वजह सेहत पर नजर रखने वाले ऐप हो सकते हैं. स्मार्टवॉच में कुछ ऐसे फीचर होंगे जो कि स्मार्टफोन में नहीं हैं. जैसे कि घड़ी के शरीर के संपर्क में होने के कारण वह दिल की धड़कन का भी पता रख सकती है. दिल के मरीजों के लिए यह काम का फीचर होगा. लेकिन यह तो शुरुआत ही है, बहुत जल्द उपभोक्ता के खून की जांच जैसे फीचर भी जुड़ सकते हैं और यह चिकित्सा क्षेत्र में भी बड़ी क्रांति होगी.

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