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टैंकर घोटाला: .तो सीएम के खि‍लाफ भी कार्रवाई होगी- एसीबी चीफ

Shiela Dixit Arvind Kejriwalनई दिल्ली- दिल्ली में पानी टैंकर में 400 करोड़ के कथित घोटाले में केजरीवाल सरकार पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पर शिकंजा कसने में लगी थी लेकिन एक शिकायत ने खुद केजरीवाल सरकार की भूमिका को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। जहां एलजी ने शीला दीक्षित के खिलाफ एसीबी से जांच की हरी झंडी दी वहीं बीजेपी विधायक की शिकायत पर केजरीवाल सरकार की भूमिका की भी जांच एसीबी में होगी।

दिल्ली एसीबी ने वाटर टैंकर घोटाला मामले में बीजेपी विधायक विजेंद्र गुप्ता की शि‍कायत पर जांच शुरू कर दी है ! गुप्ता ने अरविंद केजरीवाल की सरकार पर 11 महीने तक फाइल को दबाकर रखने और इस दौरान कोई कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है ! एंटी-करप्शन ब्यूरो के चीफ एमके मीणा ने कहा कि अगर सबूत मिलते हैं तो सीएम के खि‍लाफ भी कार्रवाई की जाएगी !

शुक्रवार को एसीबी चीफ ने कहा, ‘विजेंद्र गुप्ता ने शि‍कायत दी है, जिस पर जांच शुरू कर दी गई है ! अगर सबूत सामने आते हैं तो मुख्यमंत्री के खि‍लाफ भी कार्रवाई की जाएगी ! जरूरत पड़ी तो पूछताछ भी की जाएगी !’

मीणा ने कहा, ‘हमें दो अलग-अलग शि‍कायतें मिली हैं ! इनमें पहली श‍िकायत दिल्ली सरकार की वाटर टैंकर घोटले पर रिपोर्ट को लेकर है ! इसमें अनियमितता और 400 करोड़ रुपये के घाटे का जिक्र है ! हम इसकी जांच कर रहे हैं. जबकि दूसरी शि‍कायत विजेंद्र गुप्ता ने की है ! इसमें दिल्ली सरकार पर आरोप है कि रिपोर्ट के बावजूद घोटाले के मामले में कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

बता दें कि विजेंद्र गुप्ता ने उपराज्यपाल नजीब जंग को भी चिट्ठी लिखकर अरविंद केजरीवाल पर 11 महीने तक फाइल दबाकर रखने के आरोप लगाए हैं !

सूबे पर पंद्रह साल राज करने वाली पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने शुक्रवार को चुप्पी तोड़ी और सफाई दी कि पानी के टैंकर को लेकर फैसला सामूहिक होता है जिसमें जल बोर्ड के सदस्य, अधिकारी होते हैं। सदस्य बीजेपी के भी थे। शीला का कहना है सब कुछ पारदर्शिता बरती गयी थी केजरीवाल सरकार का ये फैसला राजनीति से प्ररित है।

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विजेंद्र गुप्ता ने 15 जून को एलजी से शिकायत की थी कि जब केजरीवाल सरकार ने टैंकर घोटाले की जांच एक साल पहले ही पूरी कर ली थी तो सालभर से इस फाइल को दबाकर क्यों रखा गया। लेकिन गुप्ता की इस शिकायत के पीछे दिल्ली सरकार को असल मुद्दे से ध्यान भटकाने की साजिश नजर आ रही है।

साल 2010-11 के दौरान टैंकर घोटाला सामने आया था। टैंकरों को पानी की सप्लाई के लिए किराए पर लेना था और उनकी सप्लई वहां होनी थी जहां इलाकों में पाइप लाइन नहीं थी। स्टेनलेस स्टील के 450 टैंकर किराए पर लिए जाने थे। इस काम के लिए शीला सरकार ने 2010 में टेंडर निकाला जिसकी लागत लगभग 50.98 करोड़ रुपए रखी गई थी। 2010 का टेंडर रद्द कर अगले डेढ़ साल में चार बार टेंडर निकाले गए और इसकी लागत 50.98 से बढ़ाकर 637 करोड़ रुपए कर दी गई।

एसीबी ने इस बात पुष्टि भी कर दी है कि उसके पास टैंकर घोटाले की दो शिकायतें आयीं हैं जिसकी वो जांच करेगा। जलमंत्री कपिल मिश्रा की एक चिट्ठी एलजी के साथ पीएम को भी गई है जिसमें पीएम से उन्होने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की है।

पानी के टैंकर का मामला ऐसा है जिसमें दो मुख्यमंत्रियों के खिलाफ अलग-अलग शिकायतें एसीबी के पास गई है। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की भूमिका पर सवाल खड़े हुए हैं। दोनों शिकायतों में फर्क सिर्फ इतना है कि एक पर घोटाले का आरोप है दूसरे पर घोटाला दबाने का आरोप।

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