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मुंबई के बाद अब दिल्ली में होगा एमआईएम का जोर !

asaduddin-owaisi-leader-of-muslims-in-Indiaनई दिल्ली [ TNN ] महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में धमाकेदार मौजूदगी दर्ज करने के बाद अब असदुद्दीन ओवैसी दिल्ली में अपना पैर मजबूती से जमाने की सोच रहे है । सूत्रों के हवाले खबर मिल रही है की ओवैसी अब दिल्ली में अपना दम दिखने वाले है । अब तक हैदराबाद तक ही सीमित मजलिए-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (एमआईएम) मुंबई में अपनी इंट्री कर देश की राजधानी में अपना सिक्का ज़माने के लिए अब दिल्ली विधानसभा चुनावों में भी उतर सकती है।

इस बात की चर्चा जोरों पर है कि एमआईएम की मटिया महल से जेडीयू के पूर्व विधायक शोएब इकबाल से बातचीत चल रही है। एमआईएम के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने एक अखबार से कहा कि दिल्ली में एमआईएम को स्थापित करना उनकी प्रमुख प्राथमिकता थी।

शोएब इकबाल ने कहा कि वह एमआईएम और तृणमूल कांग्रेस के संपर्क में थे लेकिन अभी तक कुछ तय नहीं हुआ है। हालांकि एमआईएम के सूत्रों ने इस बात से इंकार किया कि वे शोएब इकबाल को अपनी पार्टी में लाने जा रहे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि वे पार्टी खुद को दिल्ली में स्थापित करने के लिए भरोसेमंद उम्मीदवारों को उतारना चाहती है। मटिया महल के ताकतवार नेता शोएब इकबाल जोकि हर चुनाव में अलग-अलग पार्टी से चुनाव लड़ने के लिए जाने जाते हैं, ने कहा है कि वह अब जेडीयू उम्मीदवार के तौर पर और चुनाव नहीं लड़ेंगे।

दिल्ली की स्थिति को देखते हुए इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि एमआईएम मुस्लिम वोटर्स पर अपना प्रभाव स्थापित करने के लिए चुनाव लड़ेगी। सूत्रों के मुताबिक पार्टी देश भर में अपना आधार बढ़ाने की कोशिशों में जुटी है और वह दिल्ली, पश्चिम बंगाल, बिहार और यूपी जैसे राज्य शामिल हैं। हालांकि ओवैशी ने कहा कि दिल्ली के बारे में अभी कोई निर्णय लिया गया है लेकिन उन्होंने यहां चुनाव लड़ने की संभावनाओं को भई पूरी तरह खारिज नहीं किया।

ओवैसी ने कहा, ‘हम निश्चित तौर पर दिल्ली में अपनी पार्टी का गठन करेंगे। यहां पार्टी स्थापित करना हमारी प्रमुख प्राथमिकता है। दिल्ली में चुनाव लड़ना है या नहीं इस बारे में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।’

दिल्ली में कांग्रेस की हार के बाद आम आदमी पार्टी मुस्लिम वोटर्स को लुभाने की कोशिश में है। इकबाल ने कहा कि लोकसभा चुनावों के दौरान आम आदमी पार्टी कांग्रेस के मुस्लिम वोटों में सेंध लगाने में कामयाब हो गई, जिससे इस समुदाय के वोट बंट गए।

इकबाल ने कहा कि वह उन 6-7 सीटों पर अपने करीबी सहयोगियों को उतारना चाहते थे जहां मुस्लिम वोटर्स की संख्या ज्यादा है। उन्होंने कहा, ‘मुस्लिम वोटों में आए इस बिखराव से बीजेपी को दिल्ली में क्लीन स्वीप करने में मदद मिली। ऐसा फिर से हो सकता है क्योंकि आप फिर से मुस्लिमों का समर्थन पाने की कोशिश कर रही है। लेकिन अगर हम वोटों का बिखराव रो कसकें तो हम बीजेपी को स्पष्ट बहुमत पाने से रोक सकते हैं।’

इकबाल ने कहा कि त्रिलोकपुरी के हालिया दंगे ने आप पर सवालिया निशान लगाया है। उन्होंने कहा, ‘मुस्लिम समुदाय के लोग इस बात से नाराज हैं कि आप के विधायक ने तनाव को कम करने के लिए कुछ नहीं किया। साथ ही ‘मोदी को पीएम और अरविंद केजरीवाल को सीएम’ के लिए उपर्युक्त बताने वाले आप के पोस्टर से भी इस समुदाय के लोगों के बीच अच्छा संदेश नहीं गया।

अलग-अलग पार्टियों से चुनाव लड़ने के बावजूद 1993 से कोई चुनाव न हारने वाले शोएब ने कहा, ‘वे खुद को कांग्रेस के विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य है कि वोट बंटने नहीं चाहिए।’

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