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राम मंदिर से ध्यान हटाने के लिए कराया गया बालाकोट हमला – फारूक अब्दुल्ला

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए कहा कि बालाकोट हमला इसलिए कराया गया ताकि राम मंदिर से लोगों का ध्यान हटाया जा सके और ऐसा हुआ भी।

उन्होंने एंटी सेटेलाइट मिसाइल की उपलब्धि की घोषणा को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के शासनकाल की उपलब्धि बताया। उन्होंने पुलवामा आत्मघाती हमले पर भी शक जताया।

श्रीनगर में शनिवार की सुबह पार्टी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए फारूक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा।

उन्होने कहा कि कितने सिपाही छत्तीसगढ़ में शहीद हुए, क्या कभी मोदी जी वहां फूल चढ़ाने के लिए गए? कभी उनके परिवार से सहानुभूति जताई? या फिर यहां जितने सिपाही मारे गए, क्या उनके लिए कुछ कहा? मगर जो सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए उस पर मुझे शक है। मैं सच कहता हूं कि बालाकोट पर हमला इसलिए कराया गया ताकि खुद को ताकतवर दिखाया जा सके, जबकि वहां हुआ कुछ भी नहीं। किसी ने कहा कि 500 मारे गए किसी ने 700, लेकिन केवल वहां पेड़ों को नुकसान पहुंचा।

उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री ने इन्हीं झूठों से देश के किसानों की हालात, गरीबी, महंगाई और बेरोजगारी जैसी बातों से लोगों को बेखबर रखने की कोशिश की।

फारूक ने कहा कि हाल ही में सेटेलाइट को निशाना बनाने के लिए जो मिसाइल उन्होंने (प्रधानमंत्री) फेंका उसे पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने बनवाया था, लेकिन उस समय उसकी घोषणा नहीं की गई।

प्रधानमंत्री अपनी तुलना हनुमान जी से करना चाहते हैं, इसलिए आज जब चुनाव सिर पर हैं तो उन्होंने यह दिखाने के लिए कि हनुमान जी आएं हैं, मिसाइल का बटन दबा दिया।

उन्होंने बडगाम हेलीकॉप्टर क्रैश को लेकर कहा कि एक बटन वहां भी गलत दब गया और हेलीकॉप्टर गिर गया। उसमें हमारे छह जवान शहीद हो गए और नीचे जो हमारा एक आदमी गाना सुन रहा था वह भी मारा गया।

उन्होंने कहा कि पहले सबने रट लगाई हुई थी कि मंदिर (राम मंदिर) बनवाना है, लेकिन बालाकोट एयर स्ट्राइक ने सबका ध्यान वहां से हटा दिया। सब मंदिर का मामला ही भूल गए।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि उन्हें अगर इस देश को बचाना है तो इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि जो ताकतें धर्म के आधार पर इस देश को बांटने पर तुली हैं उनके खिलाफ एकजुट होकर लड़ना होगा। यह चुनाव ही एक विकल्प है उन ताकतों को दूर करने का तभी सेक्युलर ताकतें एक साथ इस मुल्क में रह सकेंगी।

प्रधानमंत्री के कितने चेहरे समझ में नहीं आता

प्रधानमंत्री पर एक बार और निशाना साधते हुए फारूक ने कहा कि इनके कितने चेहरे हैं, समझ नहीं आता। एक ओर वह कहते हैं कि पाकिस्तान हाई कमीशन कोई नहीं जाएगा और दूसरी ओर इमरान खान को बधाई भरे संदेश भेजते हैं।

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