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राम मंदिर निर्माण की आड़ में घोटाला छुपा रहे हैं शिया बोर्ड के वसीम रिजवी

अयोध्या में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद के समझौते के लिए शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में मसौदा पेश किया है। शिया वक्फ बोर्ड के मसौदे के मुताबिक विवादित जगह पर राम मंदिर बनाई जाए और मस्जिद को लखनऊ में बने, जिसका का नाम ‘मस्जिद-ए-अमन’ रखा जाए। शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के इस मसौदा से मुस्लिम पक्षकार सहमत नहीं हैं।

मुस्लिम पक्षकार ने कहा कि शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी भ्रष्टाचार के आरोपों से बरी होने और निजी फायदे के लिए राममंदिर का राग अलाप रहे हैं।

शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के इस मसौदा पर मुस्लिम पक्षकारों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही आदर्श फैसला होगा। इसके अलावा कोई और बात करना निराधार है।

इस मसौदे को कानूनी मान्यता नहीं-खालिक

अयोध्या मामले में अपीलकर्ता मौलाना महफुजुर्ह रहमान के नामित खालिक अहमद खान ने कहा- ये मसौदे वसीम रिजवी की अपनी राय है, जिसकी कोई कानूनी मान्यता नहीं है। मुस्लिम पक्षकारों की एक राय शुरू से सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही इस मसले का हल है।

खालिक ने कहा कि राम मंदिर बनाई जाए हमें कोई हर्ज नहीं है, लेकिन वो अपनी जगह बनाई जाए न की बाबरी मस्जिद की जगह पर, जैसा कि वसीम रिजवी कह रहे हैं कि मस्जिद कहीं और बनेगी तो वह बाबरी मस्जिद का रिप्लेसमेंट नहीं हो सकता है।

जेल जाने से बचने के लिए राममंदिर का राग अलाप रहे रिजवी -इकबाल अंसारी

अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्षकार हासिम अंसारी के बेटे इकबाल अंसारी ने कहा- वसीम रिजवी के राय से शिया वक्फ बोर्ड और शिया समुदाय ही सहमत नहीं है। वसीम रिजवी भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हुए हैं, उससे बचने के लिए राममंदिर की बात कर रहे हैं। इकबाल कहते हैं कि अयोध्या मामले में वसीम रिजवी का कोई सीधा जुड़ाव नहीं है। ऐसे में वसीम रिजवी की बातें कोई अहमियत नहीं रखती है।

इकबाल ने कहा कि वसीम रिजवी बीजेपी का दिल जीतने के लिए सारे जतन कर रहे हैं। उनका कहना है- मामला सुप्रीम कोर्ट में है और कोर्ट के जरिए ही फैसला होगा। मेरा मानना है कि कोर्ट आस्था के आधार पर नहीं बल्कि तथ्यों और सबूतों के आधार पर फैसला करेगा।

निजी मुफीद के लिए है ये मसौदा- फिरंगी महली

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि शिया वक्फ बोर्ड के मसौदे की कोई अहमियत नहीं है। हाईकोर्ट ने 1947 में फैसला करके साफ कर दिया है कि बाबरी मस्जिद शिया वक्फ बोर्ड का नहीं बल्कि सुन्नी वक्फ बोर्ड का है।

फिरंगी महली का कहना है कि मामला सुप्रीम कोर्ट में फाइनल दौर में है। वसीम रिजवी अपने निजी फायदे कि लिए मामले में कन्फ्यूजन पैदा कर रहे हैं। वो सुप्रीम कोर्ट में अपील कर्ता भी नहीं है और न ही उससे जुड़ सकते हैं, वो सिर्फ मीडिया में बने रहने के लिए ये सब कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने साफ कर दिया है कि सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा वो मान्य होगा। इससे दोनों समुदाय के पक्षकारों को माननी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के फैसला के बाद हमेशा के लिए इस मसले का हल हो जाएगा और इस मुद्दे पर हमेंशा के लिए सियासत भी खत्म हो जाएगी।

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