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बाबरी ढांचे का ताला खुलवाना गलत साबित हुआ

pranab-mukherjee-book-launchनई दिल्ली – राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी जीवनी के दूसरे खंड ‘द टब्र्यूलंट इयर्स: 1980-96 ‘ में बाबरी विध्वंस की भी बात की है। मुखर्जी ने अनुसार प्रधानमंत्री के रुप में बाबरी विध्वंस को नहीं रोकना नरसिम्हा राव की सबसे बड़ी नाकामी थी। इससे मुस्लिमों की भावनाएं आहत हुईं।

अयोध्या ढांचा गिराए जाने को एक बेहद शर्मनाक घटना बताते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब में लिखा है कि ये एक ऐसी घटना थी जिससे दुनिया में एक सहिष्णु और धार्मिक सद्भाव वाले देश के रूप में भारत की छवि को धक्का लगा। उन्होंने लिखा है कि अयोध्या में बाबरी का ताला खुलवाना राजीव गांधी का गलत निर्णय था।

प्रणब दा अपनी किताब में लिखते हैं कि मैं बाथरूम से बाहर आया और राजीव के फैसले से हर किसी को वाकिफ करा दिया। पहले राजीव कैबिनेट और फिर कांग्रेस से रुखसत के लिए जिम्मेदार हालात के बारे में लिखते हुए प्रणब ने स्वीकार किया है कि वह ‘राजीव की बढ़ती नाखुशी और उनके इर्द-गिर्द रहने वालों के बैर-भाव को भांप गए थे और समय रहते कदम उठाया।’

‘इस सवाल पर कि उन्होंने मुझे कैबिनेट से क्यों हटाया और पार्टी से क्यों निकाला, मैं सिर्फ इतना ही कह सकता हूं कि उन्होंने गलतियां की और मैंने भी की। राजीव दूसरों की बातों में आ जाते थे और मेरे खिलाफ उनकी चुगलियां सुनते थे। मैंने अपने धैर्य पर अपनी हताशा हावी हो जाने दिया।

इस खण्ड में मुखर्जी ने 80 व 90 के दशक की शुरुआती सालों की महत्वपूर्ण घटनाओं का ब्योरा दिया है। पुस्तक में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बारे में लिखा है कि राजीव गांधी ने अपने जीवन में दो बड़ी गलतियां की थी, जिनमें पहली थी विवादित बाबरी ढांचे का ताला खुलवाना तथा दूसरा शाहबानो केस में विवादित फैसला लेना। उनकी पुस्तक का विमोचन राष्ट्रपति भवन में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने किया।

किताब में इस घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा है… ‘बाबरी मस्जिद को टूटने से नहीं रोक पाना पीवी नरसिम्हा राव की सबसे बड़ी नाकामी थी। उन्हें इस टफ टास्क को लेकर दूसरी राजनीति पार्टियों के साथ बातचीत करनी चाहिए थी। तब उत्तर प्रदेश में बेहद अनुभवी नेता एनडी तिवारी थे। उनसे हालात समझने चाहिए थे। तत्कालीन गृह मंत्री एस. बी. चव्हाण मध्यस्थ की भूमिका में थे लेकिन उभरते हुए इस संकट के भावनात्मक पहलू से वह अनभिज्ञ रहे… जब नरसिम्हा राव के साथ मेरी मीटिंग हुई। मैं उन पर फूट पड़ा।

किताब में वह आगे लिखते हैं… क्या आपको किसी ने इसके खतरों से आगाह नहीं कराया। क्या आप बाबरी विध्वंस के बाद ग्लोबल प्रभाव का अंदाजा लगा सकते हैं। कम से कम अब आपको सांप्रदायिक तनाव को खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाना चाहिए। मुस्लिमों के मन में बने डर को शांत करने की जरूरत है…पीवी को जब मैं इतना कुछ सुना रहा था तो वह मेरी तरफ देख रहे थे। उनके चेहरे पर कोई इमोशन नहीं था…।

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