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किशनगंज- एआईएमआईएम प्रमुख और हैदाराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने दादरी में गोमांस की अफवाह पर एक व्यक्ति को पीट पीट कर हत्या करने के मामले पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुखपत्र में विवादित लेख प्रकाशित किए जाने को लेकर उसपर प्रतिबंध लगाए तथा उसके प्रकाशक और मालिक के खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर किशनगंज पहुंचे ओवैसी ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान उक्त मांग करते हुए कहा कि देश का संविधान धर्म पर आधारित नहीं है। और संविधान को धर्म के अनुकूल नहीं चलाया जा सकता। इस प्रकार की साजिश देश के लिए सबसे बडा खतरा साबित हो सकती है।

उन्होंने आरएसएस पर देश को हिंदू राष्ट्र बनाने की साजिश में लगे होने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा का रिमोट आरएसएस के हाथ में है। यदि केंद्र की नरेंद मोदी सरकार आरएसएस के इशारे पर चलेगी तो बडे ही अफसोस की बात होगी।

पूर्व में कांग्रेस के साथ रह चुके ओवैसी ने पार्टी द्वारा उनकी धर्मनिरपेक्षता पर सवाल खडे किए जाने को गलत ठहराते हुए कहा, कांग्रेस दोहरी नीति अपना रही है।

वह सत्ता में बने रहने के लिए हमेशा मुसलमानों को भाजपा का डर दिखाती रही है तथा उसकी इसी दोहरी नीति का फायदा उठाकर जदयू, राजद और समाजवादी पार्टी मुसलमानों को अबतक ठगते रहे हैं।

गत पांच दशकों में मजलिस और उसे चलने वाले ओवैसी परिवार की शक्ति रफ्ता रफ्ता इतनी बढ़ी है कि हैदराबाद पर पूरी तरह उसी का नियंत्रण है. विधान सभा में उस के सदस्यों की संख्या बढ़ कर 7 हो गई है, विधान परिषद में उस के दो सदस्य हैं. हैदराबाद लोक सभा की सीट पर 1984 से उसी का कब्ज़ा है और इस समय हैदराबाद के मेयर भी इसी पार्टी के है.

मजलिस को आम तौर पर मुस्लिम राजनैतिक संगठन या मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि के रूप में देखा जाता है और हैदराबाद के मुसलमान बड़ी हद तक इसी पार्टी का समर्थन करते रहे हैं हालांकि खुद समुदाय के अन्दर से समय समय पर उस के विरुद्ध आवाजें भी उठती रही है. जहाँ तक ओवैसी परिवार का सवाल है उस के हाथ में पार्टी की बाग़ डोर उस समय आई जब 1957 में इस संगठन पर से प्रतिबंध हटाया गया.





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