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विधानसभा चुनाव में मिली जीत को क्या बरकरार रख सकेगी भाजपा!

फतेहपुर: लोकसभा चुनाव के पांचवे चरण के तहत जिले में आगामी छह मई को मतदान होना है। मतदान की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही है सभी दलों के प्रत्याशी जी-जान से जुटकर मतदाताओं को अपनी-अपनी ओर लुभाने का प्रयास कर रहे हैं। सभी प्रत्याशी मतदाताओं को कितना लुभा पायेंगे इसका जवाब 26 मई को होने वाली मतगणना में मिलेगा। लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव व वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनावों पर गौर किया जाये तो सभी विधानसभाओं में भारतीय जनता पार्टी का डंका बजा था। पिछले चुनाव में जीत हासिल करने वाली साध्वी निरंजन ज्योति को केन्द्र सरकार में केन्द्रीय राज्यमंत्री के पद से भी नवाजा गया था। इस बार के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने साध्वी पर दांव लगाया है।

पिछले लोकसभा चुनाव व विधानसभाओं में मिली जीत को क्या भाजपा बरकरार रख सकेगी यह एक बड़ा प्रश्न है। यदि आंकड़ों पर गौर किया जाये तो वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनावों में जहानाबाद विधानसभा में भाजपा-अपना दल गठबंधन प्रत्याशी जय कुमार सिंह जैकी ने अपने निकटतम प्रतिद्वन्दी समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी मदन गोपाल वर्मा को हराते हुए 81438 मत हासिल किये थे। जबकि मदन गोपाल वर्मा को सिर्फ 33832 मतों पर संतोष करना पड़ा था। इसी तरह बिन्दकी विधानसभा में भी भाजपा प्रत्याशी करण सिंह पटेल ने 97966 मत हासिल किये थे। जबकि सपा प्रत्याशी रामेश्वर दयाल दयालू गुप्ता को 41618 मत ही मिले थे। इस सीट पर भी भाजपा प्रत्याशी ने रिकार्ड जीत हासिल की थी। इसी तरह सदर विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी विक्रम सिंह को 89481 मत हासिल हुए थे। वहीं सपा के चन्द्र प्रकाश लोधी को 57983 मत मिले थे। यह सीट भी भाजपा के खाते में गयी थी। अयाह-शाह विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी विकास गुप्ता उर्फ बब्लू ने जीत दर्ज करते हुए 81203 मत हासिल किये थे। जबकि सपा के टिकट पर लड़े पूर्व मंत्री अयोध्या प्रसाद पाल मात्र 29238 वोट पाकर सिमट गये थे।

हुसैनगंज विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी रणवेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ धुन्नी सिंह को 73595 मत हासिल हुए थे। सपा-कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशी रहीं ऊषा मौर्या को 55002 मत मिले थे। खागा सुरक्षित विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी कृष्णा पासवान 94954 मत पाकर अपने प्रतिद्वन्दी ओम प्रकाश गिहार को 38520 पर ही सिमटा दिया था। यदि इन आंकड़ों को पूरा मिला लिया जाये तो विधानसभा चुनाव में सभी प्रत्याशियों को कुल 518638 वोट मिले थे। जो कि जादुई आंकड़े हैं। इसी तरह पिछले लोकसभा चुनाव में मिले मतों को देखा जाये तो भाजपा प्रत्याशी रही साध्वी निरंजन ज्योति को 485994 मत मिले थे। यदि मोदी लहर की बात करें तो लोकसभा चुनाव में शुरू हुयी मोदी लहर 2017 के विधानसभा चुनाव में स्पष्ट दिखाई देती है। मोदी मैजिक के कारण जहां भाजपा पूर्वी उत्तर प्रदेश की बड़ी संख्या में सीटें जीतने में सफल हुयी थी। वहीं 2017 के विधानसभा चुनाव में जनपद की छह विधानसभा सीटों को क्लीन स्विप किया था। लेकिन 2019 का लोकसभा चुनाव आते-आते परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं।

जनता द्वारा मोदी सरकार के पांच साल के कार्यकाल को देखने के बाद जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समर्थक बढ़े हैं। वहीं आलोचकों की संख्या भी पहले से अधिक दिखाई दे रही है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल से जहां असंतुष्टों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। वहीं सरकार द्वारा विकास के लिए वादों से भी जनता में नाराजगी दिखाई दे रही है। जनता जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कार्यशैली से असंतुष्ट दिख रही है वहीं जिले के सांसद के प्रति विकास कार्य न कराये जाने के प्रति जमकर नाराजगी जाहिर कर रही है। लम्बे समय बाद जनपद में केन्द्रीय राज्यमंत्री का पद किसी सांसद को मिला था। जिससे जनता में जनपद के चहुमुखी विकास की उम्मीद जागी थी। लेकिन निवर्तमान सांसद एवं केन्द्रीय राज्यमंत्री द्वारा लाख प्रयास के बाद भी जिले के विकास को पंख नही लग सके। सांसद द्वारा गोद लिये गांव की न तो तस्वीर बदल सकी और न ही बीहड़ों में बसे गांव की तकदीर।

जनपद में अभी भी ऐसे कई गांव हैं जहां सरकार की लाख योजनाएं होने के बाद भी मूलभूत सुविधा बिजली, पानी व सड़क मयस्सर नही है। कई गांव ऐसे भी हैं जहां के बाशिन्दों को अभी तक बिजली की रोशनी भी नसीब नहीं हुयी है। लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए जहां सभी प्रत्याशी ऐड़ी-चोटी का जोर लगाये हुए हैं। वहीं भाजपा सांसद द्वारा जनता से संवाद स्थापित करने के साथ ही खेतों में गेहूं काटकर, कुओं से पानी भरकर व ठेलों पर चाट बनाकर उनसे समर्थन की अपील की जा रही है। केन्द्रीय राज्यमंत्री के ये चुनावी टोटके कितने सफल होंगे, वोटरों को कितना लुभा पायेंगे यह तो आने वाला समय ही तय करेगा। लेकिन विकास से अछूते 49 लोकसभा क्षेत्र में विकास के नाम पर अभी तक केवल केन्द्रीय विद्यालय एवं मेडिकल कालेज का शिलान्यास मात्र ही हो पाया है। जिले की जनता जहां केन्द्रीय राज्यमंत्री से रोजगारपरक कारखानों के अलावा अपने विभाग से फूड पार्क समेत अन्य इंडस्ट्रियलिस्ट इकाईयों की स्थापना की उम्मीद कर रही थी।

लेकिन केन्द्रीय राज्यमंत्री द्वारा ध्यान न दिये जाने से जनपद में रोजगारपरक किसी तरह की इकाईयों की स्थापना नहीं हो सकी और जिले में प्रस्तावित रेल पार्क योजना भी ठण्डे बस्ते में ही दिखाई दे रही है। लम्बे समय से जनपद में सीवर लाइन की मांग करने वाली जनता को भी इस मुद्दे पर निराशा ही हाथ लगी है। विकास से अछूते प्रयागराज एवं कानपुर जैसे महानगरों के बीच में बसे दोआबा के इस जनपद को विकास के नाम पर जनप्रतिनिधियों द्वारा जनता से किया गया वादा छलावा ही साबित हुआ है। ऐसे में पिछले लोकसभा चुनाव में उठी मोदी लहर इस लोकसभा में क्या बरकरार रह पायेगी?

@ शीबू खान

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