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‘अर्थमंत्री’ नहीं ‘अनर्थमंत्री’ थे यशवंत सिन्हा, तभी हटाए गए थे वित्तमंत्री पद से?

बीजेपी किसान मोर्चा अध्यक्ष एवं सांसद विरेंद्र सिंह मस्त ने कहा कि जब यशवंत सिन्हा वाजपेयी सरकार में वित्तमंत्री थे, तब उन्हें स्वदेशी के सबसे बड़े चिंतक और विचारक दंडोपथ ठेगड़ी ने कहा था कि वो अर्थमंत्री नहीं अनर्थमंत्री हैं। यशवंत सिन्हा बताएं कि उन्हें कारपूरी ठाकुर ने प्रमुख सचिव पद से क्यों हटाया था? जब वो चंद्रशेखर के साथ वित्तमंत्री थे, तब उन्होंने देश का सोना क्यों गिरवी रखा था। उसके बाद वो बीजेपी में आये हैं। वो बताएं कि उन्हें अटल सरकार में वितमंत्री पद से क्यों हटाया गया।

बीजेपी सांसद मस्त ने कहा कि यशवंत सिन्हा ने नितिन गड़करी पर जो आरोप लगाये थे, वो गलत साबित हुए। अब वो उस पर क्या कहेंगे? यशवंत सिन्हा, राम जेठमलानी और अरुण शौरी सब व्यक्तिवादी सोच के आदमी हैं। बीजेपी विचारों की पार्टी हैं। ये सब सरकारी लोग हैं। इन्हें सरकार में जगह चाहिए। अब सरकार में इन्हें जगह नहीं मिली है, तो सरकार की आलोचना कर रहे हैं।

इन लोगों को जमीनी हकीकत कुछ भी पता नहीं है। ये लोग बीजेपी की विचारधारा वाले लोग नहीं हैं। मैं इन लोगों से देश की अर्थव्यवस्था को लेकर डिबेट करने को तैयार हूं। अगर स्वदेशी जागरण मंच और भारतीय मजदूर संघ अन्य किसी और संगठन को लगता है कि सरकार की आर्थिक नीतियां ठीक नहीं हैं, तो हमसे चर्चा कर सकते हैं। मैं उनके साथ जल्द चर्चा भी करूंगा।

यशवंत सिन्हा जयंत सिन्हा के जवाबों से संतुष्ट नहीं हैं, तो उनको घर में ही जिरह कर लेनी चाहिये थी। सरकार ने यशवंत सिन्हा के सवालों का जवाब देने के लिए जयंत सिन्हा को लगाया है। अगर जयंत सिन्हा इतने ही काबिल अर्थशास्त्री थे, तो उन्हें वितमंत्री से क्यों हटाया गया? मतलब यह है कि उनका पेट का दर्द बाहर निकलकर आया है कि उनके बेटे को क्यों वितमंत्री पद से हटाया गया।

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