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चीन को सबक सिखाने के लिए तैयार है भारतीय उपभोक्ता

indian mony चीन अपने आर्थिक हित साधने के लिए पाकिस्तान की तरफदारी करता रहा है और पाकिस्तान को भी चीन का समर्थन पाने के लिए उसे अपने भू भाग पर परोक्ष कब्जा करने की अनुमति देने से कोई परहेज नहीं है। लेकिन दोनों की इस स्वार्थ पूर्ण मैत्री से भारत के हितों को जरूर चोट पहुंच रही है।

केन्द्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने अभी तक के कार्यकाल में सभी पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संंबंध स्थापित करने के प्रयास किए है और इसी सदाश्यता के साथ उन्होंने पड़ोसी देशों का दौरा किया है। इन पड़ोसी देशों में चीन और पाकिस्तान भी शामिल थे जिनकी जुगलबंदी से भारत हमेशा ही परेशानी का अनुभव करता आया है परन्तु प्रधानमंत्री मोदी ने इन दोनों पड़ोसी देशों की यात्राएं भी बिना किसी पूर्वाग्रह के की। मोदी की मंशा साफ थी कि पड़ोसी देशों से सबसे पहले मैत्री संबंध स्थापित किए जाने चाहिए ताकि इस क्षेत्र में शांति, सदभाव, सहयोग और सौहाद्र्र का महौल बना रहे। चीन और पाकिस्तान को छोडक़र बाकी पड़ोसी देशों के साथ हमारे संबंधों को मजबूत करने में मोदी की यात्राओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही परन्तु चीन और पाकिस्तान से हमारी उम्मीदें व्यर्थ ही साबित हुई हैं।

चीन अपने आर्थिक हित साधने के लिए पाकिस्तान की तरफदारी करता रहा है और पाकिस्तान को भी चीन का समर्थन पाने के लिए उसे अपने भू भाग पर परोक्ष कब्जा करने की अनुमति देने से कोई परहेज नहीं है। लेकिन दोनों की इस स्वार्थ पूर्ण मैत्री से भारत के हितों को जरूर चोट पहुंच रही है। यहां यह भी विशेष उल्लेखनीय है कि चीन अब अपनी विस्तारवादी नीति के तहत श्रीलंका और नेपाल में भी पांव पसारने की कोशिश में जुटा हुआ है। भारत के साथ तो वह सीमा के मुद्दे पर जब तब विवाद खड़े करने में जुटा रहता है।

भारत के प्रति अगर कभी वह सदाशयता दिखाता भी है तो उसके पीछे उसकी यही मंशा छिपी रहती है कि वह किस तरह भारत के बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाए। चीन के प्रति व्यापारिक संबंधों को विकसित करने में हमारी सरकारों ने इतनी दिलचस्पी ली कि चीन के बाजार में हमारी हिस्सेदारी भारतीय बाजार में चीन की हिस्सेदारी की लगभग आधी ही है।

अभी हाल में ही जब पाकिस्तान से सीमा पार करके भारत पहुंचे घुसपैठियों द्वारा उड़ी स्थित आर्मी हेडक्वार्टर पर किए गए आतंकी हमले में हमारे 19 जवान शहीद हुए थे तब हमारे कई पड़ोसी देशों ने उस आतंकी हमले की निंदा की थी परंतु चीन ने पाकिस्तान की निंदा करने से परहेज किया जबकि चीन को यह बात अच्छी तरह मालूम है कि पाकिस्तान जब तब भारत के जम्मू कश्मीर क्षेत्र में अपने घुसपैठियों के जरिए अशांति फैलने की कोशिश करता रहता है। चीन ने पाकिस्तान की सारी शरारतों को नजर अंदाज करते हुए हमेशा ही यह नसीहत देने में रूचि प्रदर्शित की है कि उसके दोनों पड़ोसी देशों को आपसी बातचीन के जरिए सारे विवादों को सुलझाने की पहल करना चाहिए।

यहां यह भी गौरतलब है कि चीन को पाकिस्तान ने अपने गाढ़े वक्त का दोस्त बताया है। यद्यपि दोनों देशों की बढ़ती हुई मैत्री भारत के लिए चिन्ता का विषय नहीं होना चाहिए था परन्तु उस मैत्री का उपयोग भारतीय हितों को चोट पहुंचाने के लिए किया जाए तो यह निसंदेह भारत के लिए चिन्ता का विषय है। इस बात को सिद्ध करने के लिए मसूद अजहर का उदाहरण ही पर्याप्त होगा।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कुख्यात आतंकी सरगना मसूद अजहर का नाम घोषित आतंकियों की सूची में जोडऩे का जो प्रस्ताव रखा था उस पर चीन ने ही वीटो करके पाकिस्तान के साथ अपनी एकजुटता प्रदर्शित की थी। क्या चीन इस हकीकत से अनभिज्ञ था कि मसूर अजहर एक आतंकी संगठन का सरगना है। चीन ने बम्हापुत्र की सहायक नदी के जल प्रवाह को अवरूद्ध करके उस पर तीन हाइड्रो पावर संयंत्र लगाने की योजना पर दु्रत गति से काम प्रारंभ कर दिया है।

भारत सरकार की ओर से चीन को अपनी इन चिन्ताओं से अवगत कराया जा चुका हे कि उक्त बांधों के निर्माण से ब्रम्हपुत्र के बहाव को रोकने से भारत के हितों को भी आंच पहुंचेगी। परंतु चीन अपने इस तर्क से भारत की चिन्ताओं को बेबुनियाद बता रहा है कि उसे भारत के हितों का पूरा ध्यान है और भारत को ब्रम्हपुत्र पर बनने वाले उसके जल विद्युत संयंत्रों से चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। चीन तो हमारी ङ्क्षचताओं को निर्मूल सिद्ध करने की कोशिश करेगा ही परंतु वह अपनी मनमानी करने से बाज नहीं आएगा।

अगर हम चीन से यह अपेक्षा रखते है कि वह हमारे हितों को प्रभावित करने वाली कार्रवाई से बचे तो उसका एक ही उपाय है कि भारतीय बाजार में उसकी बढ़ती हुई घुसपैठ पर लगाम लगाई जावे। चीन में निर्मित वस्तुओं की बिक्री को हतोत्साहित करके इसे कुछ हद तक संभव बनाया जा सकता है। उड़ी में आर्मी हेडक्वार्टर पर आतंकी हमले में देश के 19 जवानों की शहादत के बाद भारतीय जनमानस में जो आक्रोश उमड़ा पड़ा था उसकी पाकिस्तान के खिलाफ कठोर कदम उठाने के लिए केन्द्र सरकार को पे्ररित करने में विशेष भूमिका थी। अब वही भारतीय जन मानस चीन के प्रति भी अपने गुस्से का इजहार करने की तैयारी में है क्योंकि चीन ने उड़ी पर आतंकी हमले की निंदा करने के लिए सधी हुई शब्दावली का प्रयोग किया जिसमें पाकिस्तान की निंदा का भाव नहीं था। इसलिए भारतीय जन मानस अब चीन को भी सबक सिखाने की तैयारी कर चुका है।

चीन को सबक सिखाने के लिए भारत की जनता आगामी त्यौहारों के सीजन में आकर्षक चीनी उत्पादों का सामूहिक बहिष्कार करने का फैसला ले ले तो कोई अचरज की बात नहीं होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल में ही देशवासियों को संबोधित करके यह अपील की है कि वे आने वाली दीपावली पर्व के अवसर पर अपने अपने घरों में रोशनी सजावट एवं मिष्ठान वितरण के लिए देश में निर्मित सामग्री का उपयोग करे। प्रधानमंत्री मोदी ने यद्यपि किसी देश विशेष का नाम तो नहीं लिया है परंतु यह समझना कठिन नहीं है कि उनका इशारा किस पड़ोसी देश की ओर है। प्रधानमंत्री मोदी की इस अपील का असर केवल त्यौहार के अवसर पर नहीं बिल्क आगे भी होता रहेगा।

गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों से त्यौहारों के मौके पर चीन से आयातित वस्तुओं की भारतीय बाजार में भरमार हो जाती है। चीन के उत्पादों की गुणवत्ता भले ही उच्च कोटी की न हो परन्तु कम दामों में सुलभ ये चीनी उत्पाद इतने आकर्षक होते है कि भारतीय उन्हें खरीदने का लोभ संवरण नहीं कर पाता। चीन में बने खिलौने, मिट्टी के दिए, लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाओं, सजावटी विद्युत उपकरण, पटाखे और क्राकरी की भारतीय बाजार में इतनी खपत होती है कि हमारे अपने देश में बनी ये वस्तुएं भारतीय उपभोक्तओं को आकृष्ट ही नहीं कर पाती। परंतु भारत में आतंकी वारदातों को अंजाम देने के इरादे से सीमा पार से घुसपैठ कराने वाले पाकिस्तान के प्रति चीन की सहानुभूति ने अब देश की जनता को अपना कोपभाजना बना लिया है।

इन दिनों चीनी उत्पादों की खरीद को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर जो अभियान चलाया जा रहा है उससे चीन के निर्माताओं एवं उन भारतीय व्यापारियों को चिन्ता में डाल दिया है जो त्यौहारों के मौसम में मोटी कमाई के लालच में चीनी उत्पादों से भारतीय बाजारों को पाट देते हैं।

पाकिस्तान की चीन द्वारा पीठ थपथपाए जाने से नाराज भारतीय जनता को अगर सोशल मीडिया पर चल रहे अभियान ने जागरूक करने में सफलता अर्जित कर ली तो इस साल चीन को यह सबक जरूर सीखना पड़ेगा कि वह अपने ‘दोस्त’ पाकिस्तान को इस बात के लिए विवश करे कि वह भारत में आतंकी गतिविधियों को उकसाने की नीति पर चलना बन्द कर दे वरना भारतीय बाजार में चीन के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती हैं जो पाकिस्तान अपने दोस्त चीन को आर्थिक गलियारा बनाने के लिए भूमि उपलब्ध कराकर खुशी का अनुभव कराता है उसे भारतीय बाजार में अपने दोस्त के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए इतना त्याग तो करना ही चाहिए लेकिन हम इस हकीकत से अच्छी तरफ वाकिफ है कि पाकिस्तान आतंकवाद को प्रश्रय देने की नीति पर चलना बन्द नहीं कर सकता इसलिए चीन को सबक सिखाने के लिए हमें उसके सस्ते व लुभावने उत्पादों के बहिष्कार का फैसला करने का विकल्प ही चुनना पड़ेगा।

लेखक – कृष्णमोहन झा
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक और आईएफडब्ल्यूजे के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं)




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