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Indian Coast Guard : भविष्य की तलाश लहरों के प्रहरी

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तीन ओर समुद्र से घिरे भारत के लिए अपनी जल सीमाओं की सतत सुरक्षा सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। भारतीय जल सीमा की सुरक्षा और निगरानी का यह भार इंडियन कोस्ट गार्ड के ऊपर है। देश की 7516.5 किलोमीटर लंबी जल सीमा की निगरानी के लिए कोस्ट गार्ड एक्ट द्वारा 18 अगस्त 1978 को इंडियन कोस्ट गार्ड की स्थापना की गई। इतनी वृहत जल सीमा की निगरानी करने वाले इस बल में कुशल आफिसर, इंजीनियर व सेलर की भर्ती नियमित रूप से होती रहती है। आप भी इस क्षेत्र में एक बेहतर भविष्य की तलाश कर सकते हैं।

पद व कार्य: इंडियन कोस्ट गार्ड में चार श्रेणी के अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं-1. जनरल डयूटी 2. पायलट व नेविगेटर 3. इंजीनियर 4. लॉ आफिसर। इन्हें नियुक्ति के समय असिस्टेंट कमांडेेंट का पद दिया जाता है। असिस्टेंट कमांडेंट (जनरल डयूटी) समुद्र में जहाज के संचालन और चालक दल के नेतृत्व का कार्य करता है।
समुद्र तटों की निगरानी के लिए कोस्ट गार्ड के पास लड़ाकू विमान तथा हेलिकाप्टर होते हैं। ये विमान तटों पर स्थित कोस्ट गार्ड बेस और निगरानी पोतों से उड़ान भरते हैं।
इनका संचालन पायलट व नेविगेशन विभाग के अधिकारियों द्वारा किया जाता है। कोस्ट गार्ड के काम में युद्ध पोत व हवाई जहाज दोनों का उपयोग होता है। ये दोनों ही जटिल तकनीकी उपकरण हैं जिनके रख-रखाव के लिए इंजीनियरों के एक बड़े दल की आवश्यकता होती है। इसके लिए कोस्ट गार्ड में इंजीनियर असिस्टेंट कमांडेंट के रूप में नियुक्त किया जाता है।

इसके अलावा कोस्ट गार्ड में लॉ आफीसर भी होते हैं लेकिन उनकी नियुक्ति सीधी नहीं होती है। रक्षा मंत्रालय के अन्य विभागों से इन्हें लिया जाता है। गैर अधिकारी वर्ग में नाविक (जनरल डयूटी), नाविक (डोमेस्टिक ब्रांच) व यांत्रिक नियुक्त किए जाते हैं। नाविक (जनरल डयूटी) युद्ध पोत के संचालन व जल सीमा की निगरानी का काम करते हैं। डोमेस्टिक ब्रांच के नाविकों पर जहाज के रख-रखाव, केटरिंग तथा कार्यालय से संबंधित कार्य होते हैं। यांत्रिक(तकनीकी नाविक) तकनीकी विभाग में कार्य करते हैं। युद्ध पोत तथा विमानों के रख-रखाव के कार्य इनके जिम्मे होता है।

चयन प्रक्रिया: विभिन्न विभागों में अधिकारियों के चयन के लिए कोस्ट गार्ड द्वारा वर्ष में दो बार जनवरी और दिसंबर में परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं। इनमें शामिल होने के लिए आवेदन छह माह पूर्व भरे जाते हैं। इनसे संबंधित विज्ञापन रोजगार समाचार तथा प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित होते हैं। सभी आवेदनों की शार्ट लिस्टिंग के बाद अभ्यर्थियों को परीक्षा के लिए आमंत्रित किया जाता है।

परीक्षा दो चरणों में होती हैं। प्रथम चरण की परीक्षा दिल्ली, मुंबई, चेन्नई तथा पोर्ट ब्लेयर में आयोजित की जाती है। इसमें सामान्य ज्ञान एवं आईक्यू परीक्षण किया जाता है। इसमें सफल छात्रों को दूसरे चरण की परीक्षा के लिए आमंत्रित किया जाता है। यह परीक्षा दिल्ली में होती है, जिसमें लिखित परीक्षा के माध्यम से अभ्यर्थी की आईक्यू, सामान्य ज्ञान तथा विज्ञान की परीक्षा ली जाती है। साथ ही अभ्यर्थियों का साक्षात्कार भी होता है तथा स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। इसके आधार पर मेरिट लिस्ट बनती है जिसके अनुसार रिक्तियां भरी जाती हैं। गैर अधिकारी वर्ग में नाविकों व यांत्रिकों की नियुक्ति के लिए हर छह माह पर परीक्षाएं आयोजित होती हैं। इसके विज्ञापन प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित होते हैं। इसमें लिखित परीक्षा, फिजिकल टेस्ट व स्वास्थ्य परीक्षण के आधार पर अंतिम नियुक्ति की जाती है।

योग्यताएं: इंडियन कोस्ट गार्ड के विभिन्न विभागों में अधिकारियों व नाविकों के चयन के लिए अलग-अलग शैक्षिक, शारीरिक तथा आयु सीमा संबंधी मानदंड निर्धारित किए गए हैं। इन योग्यताओं को पूरा करने वाले छात्र उपर्युक्त वर्ग में नियुक्ति के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करते समय कोई भी जानकारी गलत नहीं देनी चाहिए। अन्यथा पात्रता तो रद्द हो ही जाती है, साथ ही आगे परीक्षा देने पर रोक भी लगाई जा सकती है।

विभिन्न पदों पर आवेदन के लिए योग्यता इस प्रकार हैं-
1. असिस्टेंट कमांडेंट (जनरल डयूटी): इसके लिए अभ्यर्थी को ग्रेजुएट होना चाहिए। उसने 10 + 2 स्तर तक मैथ और फिजिक्स विषयों की पढ़ाई की हो। आयु 21 से 25 वर्ष के बीच होनी चाहिए। अनुसूचित जाति जनजाति के आवेदकों को आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट का प्रावधान है। न्यूनतम ऊंचाई 157 सेंटीमीटर होनी चाहिए।
2. असिस्टेंट कमांडेंट (टेक्निकल ब्रांच): इस पद पर आवेदन के लिए नेवल आर्टिटेक्चर, मेकेनिकल, मेरीन, इलेक्ट्रिकल, टेली कम्यूनिकेशन, इलेक्ट्रानिक्स, डिजाइन, प्रोडक्शन या एयरोनॉटिकल में इंजीनियरिंग डिग्री अथवा इसके समकक्ष कोई डिग्री होनी चाहिए। आयु सीमा 21 से 30 वर्ष निर्धारित है जिसमें अनुसूचित जाति जनजाति को 5 वर्ष तथा पिछड़े वर्ग के आवेदकों के लिए 3 वर्ष की छूट का प्रावधान है। अभ्यर्थी की ऊंचाई 157 सेंटीमीटर से कम नहीं होनी चाहिए।
3. असिस्टेंट कमांडेट (पायलट नेविगेशन): इसमें प्रवेश के लिए फिजिक्स व मैथ विषय से बीएससी होना चाहिए। पायलट लाइसेंस धारकों के लिए सीधी भर्ती का प्रावधान है। अभ्यर्थी की आयु 19 से 27 वर्ष के बीच हो जिसमें अनुसूचित जाति जनजाति के छात्रों को 5 वर्ष की छूट दी गई है। ऊंचाई 157 से 197 सेंटीमीटर बीच होनी चाहिए।
4. महिला अधिकारी: इंडियन कोस्ट गार्ड में 1996 से महिला अधिकारियों की प्रवेश की शुरूआत की गई है। इन्हें जनरल डयूटी, पायलट व लॉ ब्रांच में नियुक्ति की जाती है। महिला अभ्यर्थियों को किसी भी विषय में ग्रेजुएट होना चाहिए। जनरल डयूटी ब्रांच के लिए ऊंचाई 148 सेंटीमीटर तथा पायलट कैडर के लिए 162.5 सेंटीमीटर होनी चाहिए।
5. नाविक: के लिए अभ्यर्थी को दसवीं पास होना चाहिए। जबकि डोमेस्टिक ब्रांच के नाविकों के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता आठवीं कक्षा है। यांत्रिकों की नियुक्ति के लिए अभ्यर्थी को दसवीं के साथ मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रानिक्स या एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा होना चाहिए।

प्रशिक्षण: कोस्ट गार्ड के अधिकारियों को बेसिक ट्रेनिंग नौ सेना अधिकारियों के साथ दी जाती है। यह बेसिक कोर्स 5 माह का होता है जो गोवा में संचालित किया जाता है। इसके बाद उन्हें ट्रेनिंग आफिसर का पद दिया जाता है और अपने कैडर के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर प्रशिक्षण के लिए भेजा जाता है। टेक्निकल आफिसर्स को आईएनएस शिवाजी लोनावाला भेजा जाता है, जबकि इलेक्ट्रिकल इंजीनियर आइएनएस वरुण पर प्रशिक्षण पाते हैं। पायलट आफिसर्स का प्रशिक्षण चेन्नई के निकट आइएनएस राजाली पर होता है।

महिला अधिकारी अपना प्रशिक्षण मुंबई में आईएनएस हमला पर प्राप्त करती हैं। बोसिक कोर्स के बाद जनरल डयूटी डेक आफिसरों का प्रशिक्षण तीन चरणों में होता है। पहले चरण में कोस्टगार्ड शिप वरुण पर साढ़े चार महीने की ट्रेनिंग दी जाती है। दूसरे चरण में चार सप्ताह पेट्रोलिंग का प्रशिक्षण होता है। तीसरे चरण में बड़े पेट्रोलिंग जहाजों पर पांच माह का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसी दौरान उन्हें शिपमैन बोर्ड का टेस्ट भी पास करना होता है। इसी प्रकार नाविकों व यांत्रिकों के लिए भी जहाजों पर प्रशिक्षण का प्रावधान है।

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