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कुछ अधिकारी सट्टेबाजों के जरिये कराते हैं वसूली ?

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नई दिल्ली- साल 2014 के अफरोज फट्टा हवाला केस और साल 2015 के क्रिकेट सट्टा कांड की जांच करने वाले प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के अधिकारियों के खिलाफ अब सीबीआई का घेरा मजबूत होता जा रहा है। इस मामले की जांच करने वाली सीबीआई की एसआईटी ने इस सिलसिले में तीन बड़े सट्टेबाजों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से एक दिल्ली का, दूसरा मुंबई का और तीसरा अहमदाबाद का है।

सीबीआई के एडिशनल डायरेक्टर राकेश अस्थाना की अगुआई में जांच करने वाली सीबीआई की एसआईटी ने अहमदाबाद की विशेष अदालत में इन तीनों सट्टेबाजों को पेश कर इनका सात दिन का रिमांड हासिल किया है। खुद अस्थाना का जांच के सिलसिले में अहमदाबाद आना हुआ है। जिन तीन सट्टेबाजों को इस मामले में गिरफ्तार कर एसआईटी आगे की जांच कर रही है, उनके नाम हैं- सोनू जालान, जयेश ठक्कर और जे के अरोडा। इनमें से सोनू जालान जहां मुंबई का रहने वाला है, वही जे के अरोडा दिल्ली का और जयेश ठक्कर अहमदाबाद का।

सीबीआई एसआईटी के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, इन तीनों आरोपियों ने अभी तक की पूछताछ में कबूल किया है कि ये प्रवर्तन निदेशालय के अहमदाबाद ऑफिस में ज्वाइंट डायरेक्टर रहे अधिकारी जे पी सिंह और उनके दो मातहत अधिकारियों के लिए काम कर रहे थे। आरोप ये हैं कि जे पी सिंह की अगुआई में ईडी के कुछ अधिकारी इन सट्टेबाजों के जरिये ही बाकी सट्टेबाजों से वसूली करने में लगे थे।

दरअसल ईडी के अधिकारियों के इस सनसनीखेज वसूली कांड की बात पिछले साल सामने आई, जब खुद ईडी के दिल्ली मुख्यालय के अधिकारियों को इस बात की जानकारी मिली कि अफरोज फट्टा हवाला कांड और क्रिकेट सट्टा कांड की जांच करने वाले ईडी के अहमदाबाद कार्यालय के अधिकारी ही सट्टेबाजों से पैसा वसूली में लगे हैं।

ये बात सामने आते ही ईडी के तत्कालीन स्पेशल डायरेक्टर करनैल सिंह, जो फिलहाल ईडी के मुखिया हैं, ने जांच शुरु की. इस जांच में जे पी सिंह और कुछ अन्य अधिकारियों के सामने शुरुआती सबूत मिलने के बाद ईडी की तरफ से इस मामले में पिछले साल सितंबर में शिकायत दर्ज कराई गई। ईडी की शिकायत के आधार पर सीबीआई की तरफ से जे पी सिंह और उनके सहयोगियों के खिलाफ आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया।

इसके बाद सीबीआई ने इस मामले की जांच शुरु की और ईडी के अहमदाबाद ऑफिस के तब के ज्वाइंट डायरेक्टर जे पी सिंह के कार्यालय में छापा भी मारा। बाद में जब सीबीआई ने भ्रष्टाचार के बड़े मामलों की जांच के लिए एडिशनल डायरेक्टर राकेश अस्थाना की अगुआई में एसआईटी का निर्माण किया, तो आगुस्ता वेस्टलैंड और विजय माल्या जैसे भ्रष्टाचार के बड़े मामलों के साथ ये केस भी एसआईटी को सौंप दिया गया।

अस्थाना की अगुआई में एसआईटी ने अभी तक जो जांच की है, उसके मुताबिक जे पी सिंह ने अपने दो सहयोगियों के साथ मिलकर कुछ सट्टेबाजों को ही अपना एजेंट बनाया और उनके जरिये करोड़ों रुपये की वसूली दूसरे सट्टेबाजों से की, इस एवज में कि उन्हें बचा लिया जाएगा। जे पी सिंह को इस घोटाले के सामने आने के बाद अहमदाबाद ऑफिस से हटाकर गुवाहाटी में पोस्ट कर दिया गया। जे पी सिंह मूल तौर पर कस्टम और एक्साइज सेवा के 2000 बैच के अधिकारी हैं और ईडी में डेपुटेशन पर हैं।

दरअसल जे पी सिंह की अगुआई में ईडी के अहमदाबाद ऑफिस की जो टीम पहले क्रिकेट सट्टा कांड की जांच कर रही थी, वो मामला है मार्च 2015 का. उस समय ईडी के अहमदाबाद जोनल यूनिट की एक टीम ने वडोदरा के एक फार्म हाउस पर छापा मारा था और किरण माला उर्फ किरण अहमदाबाद और टॉमी पटेल नामक दो सट्टेबाजों को गिरफ्तार किया था, जो उस वक्त मेलबोर्न में हो रहे भारत-बांग्लादेश क्रिकेट मैच पर सट्टेबाजी में लगे थे।

ये अपनी तरह का पहला मामला था, जिसमें ईडी ने क्रिकेट सट्टेबाजी से जुड़े किसी बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया था। क्रिकेट सट्टेबाजी का ये रैकेट दो हजार करोड़ रुपये से भी अधिक का था। जो दो सट्टेबाज उस समय ईडी की टीम को हाथ लगे थे, उनसे पहले भी दिल्ली पुलिस की एक टीम आईपीएल मैच फिक्सिंग मामले में पूछताछ कर चुकी थी, तो अहमदाबाद पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उन्हें सट्टेबाजी के मामले में ही 2013 में गिरफ्तार भी किया था। आरोप हैं कि इसी सट्टेबाजी केस की जांच के दौरान खुद ईडी के अधिकारी सट्टेबाजों से वसूली के कारोबार में लग गये।

जिस दूसरे मामले की जांच में भी ईडी के अधिकारी सीबीआई जांच के दायरे में हैं, वो मामला है 2014 का. लोकसभा चुनावों के बीच 21 मई को ईडी की टीम ने सूरत के एक व्यवसायी अफरोज फट्टा को एक बड़ा हवाला रैकेट चलाने के मामले में गिरफ्तार किया था। तब ईडी के अधिकारियों ने कहा था कि जमीन-मकान के कारोबार की आड़ में अफरोज फट्टा पांच हजार करोड़ रुपये से भी अधिक का हवाला कारोबार चला रहा था और वो दुबई और हांगकांग की डमी कंपनियों के जरिये बड़ी रकम विदेश भेज चुका था। क्रिकेट सट्टा कांड की तरह इस मामले में भी ईडी के अहमदाबाद ऑफिस से जुड़े अधिकारियों ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लौंडरिंग एक्ट यानी पीएमएलए के तहत मामला दर्ज किया था।

अफरोज फट्टा तब चर्चा में आया था, जब अंडरवर्ल्ड के बड़े गैंगस्टर बबलू श्रीवास्तव ने अपने आदमियों को सुपारी के तहत अफरोज फट्टा को मारने का निर्देश दिया था। मुंबई के ही एक बिल्डर ने फट्टा की सुपारी बबलू को दी थी, लेकिन 28 मार्च 2014 को जब ये फायरिंग हुई थी, तो श्रीवास्तव के लोगों ने फट्टा की जगह अमजद दलाल को गोली मार दी थी। दलाल इस मामले में बच गया था, लेकिन इसके बाद हुई सूरत पुलिस की जांच में बबलू श्रीवास्तव का नाम सामने आया और फिर उसकी गिरफ्तारी भी हुई। उस वक्त सूरत के पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ही थे, जो फिलहाल सीबीआई में डेपुटेशन पर हैं।

अस्थाना की अगुआई में हो रही एसआईटी की जांच में अभी तक सामने आया है कि अफरोज फट्टा हवाला कांड और क्रिकेट सट्टेबाजी कांड, जो कुल मिलाकर सात हजार करोड़ रुपये से भी अधिक का है, उसकी जांच के नाम पर जे पी सिंह और उनके सहयोगियों ने मिलकर आरोपियों से करोड़ों रुपये की वसूली की। यही नहीं, सट्टेबाजी के जो बाकी मामले भी इनकी निगाह में आये, उसमें भी आरोपियों को पकड़ने की जगह उनसे पैसे वसूल डाले उन्हें गिरफ्तार न करने के नाम पर। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही इस मामले में आरोपी ईडी अधिकारियों से भी पूछताछ की जाएगी और देर-सबेर उनकी गिरफ्तारी भी। [एजेंसी]




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