सीडीएस- भारतीय सेना के इतिहास में एक सुखद शुरुआत

थल सेना अध्यक्ष पद से सेवानिवृत्ति के पश्चात देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनने का गौरव हासिल करने वाले जनरल बिपिन रावत ने अपने पहले उद्बोधन में कहा है सेनाएं राजनीति से दूर रहती है और उसका काम केवल मौजूदा सरकार के निर्देशों का पालन करना होता है। जनरल रावत के इस बयान से देश के उन राजनीतिक दलों को संतुष्ट हो जाना चाहिए, जिन्होंने उनकी नई नियुक्ति पर अपनी प्रतिक्रिया में यह कहा था कि जनरल रावत के वैचारिक झुकाव का असर गैर राजनीतिक संस्था सेना पर नहीं पड़ना चाहिए।

कांग्रेस उन राजनीतिक दलों में सबसे आगे रही है। कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने तो यह तक कहा था कि चीफ आफ डिफेंस स्टाफ के संदर्भ में सरकार ने पहला कदम ही गलत उठाया है।

आश्चर्य की बात यह है कि कांग्रेस के ही एक प्रवक्ता सुष्मिता देव ने अपनी ही पार्टी के प्रवक्ता के बयान पर टिप्पणी करने से इंकार करते हुए कहा कि सीडीएस का निर्णय सरकार का है और हम उनसे कर्तव्य पालन की आशा करते हैं। दरअसल कांग्रेस नेताओं ने चीफ आफ डिफेंस स्टाफ के पद पर जनरल रावत की नियुक्ति को लेकर अलग-अलग बयान देकर खुद ही यह साबित कर दिया है कि इस नियुक्ति को लेकर अपनी एक निश्चित राय बनाने में वह भ्रम का शिकार बनी हुई है। इसलिए भाजपा को इन प्रतिक्रियाओं पर यह बोलने का अवसर मिल गया कि कांग्रेसी एक कन्फ्यूज्ड पार्टी है।

कांग्रेस की ओर से उसके नेताओं ने इस नियुक्ति पर जो आशंकाएं व्यक्त की है, वह इस इस मौके पर आपेक्षित नही थी। होना तो यह चाहिए था कि देश में पहली बार चीफ आफ डिफेंस की नियुक्ति के ऐतिहासिक फैसले के लिए कांग्रेस की ओर से सरकार की सराहना की जाती, परंतु उसने तो यह साबित कर दिया कि वह अपने पूर्वाग्रहों से मुक्त होने के लिए तैयार नही है।

गौरतलब है कि सेना के तीनों अंगों में बेहतर समन्वय कायम करने के लिए कारगिल युद्ध के बाद से ही चीफ आफ डिफेंस स्टाफ की आवश्यकता अनुभव की जाती रही थी ।केंद्र में जब संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार थी, तब भी सेना के तीनों अंगों के बीच समन्वय बनाने के लिए इस पद का सृजन करने की चर्चाएं चली थी, परंतु हमेशा ही अनिर्णय का शिकार रहने वाली संप्रग सरकार ने इस मामले को भी लंबित रखा।

दूसरी और केंद्र में मोदी सरकार के गठन के बाद यह संभावनाएं व्यक्त की जाने लगी थी कि यह सरकार इस मामले में ठोस फैसला लेने में पीछे नहीं हटेगी और नए साल की शुरुआत होते ही देश की सेनाओं को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ मिल गया। प्रधानमंत्री ने अपने पूर्व के भाषणों में ही घोषणा कर दी थी सरकार जल्द ही इस नए पद का सृजन करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनरल बिपिन रावत को बधाई देते हुए कहा कि वे एक शानदार अधिकारी है, जिन्होंने पूरे जोश से देश की सेवा की है।

प्रधानमंत्री मोदी ने जनरल रावत द्वारा सेना अध्यक्ष के रूप में दी गई सेवाओं की जो सराहना की है, वे उसके हकदार भी है। जनरल रावत के कार्यकाल में ही कश्मीर घाटी में आतंकवाद के उन्मूलन हेतु ऑपरेशन ऑल आउट चला गया ,जिसने आतंकवादियों की कमर तोड़कर रख दी है। जनरल रावत ने इस अभियान के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखने के निर्देश सैन्य बलों को दिए थे कि आतंकियों के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई में निर्दोष नागरिकों को कोई नुकसान ना पहुंचे। निसंदेह सैन्य बलों ने वहां आत्म संयम को कभी टूटने नहीं दिया। सैनिकों के इस संयमित व्यवहार पर भी उंगली उठाकर उसका मनोबल तोड़ने में विरोधी दलों के नेताओं ने कोई परहेज नहीं किया।

उस दौरान भी जनरल रावत पर छींटाकशी की गई ,जो बेहद खेदजनक थी। जनरल रावत ने तो केवल सरकार के निर्देशों का ही पालन किया। जनरल रावत ने पाकिस्तान को आतंकवाद को प्रोत्साहित करने के विरुद्ध जो कठोर चेतावनी दी थी, उसका भी अच्छा असर हुआ। सेना अध्यक्ष के रूप में जनरल रावत ने राष्ट्र को अमूल्य सेवाएं दी है, वह स्वर्ण अक्षरों में अंकित किए जाने योग्य है।

मोदी सरकार ने जनरल रावत को देश के पहले चीफ आफ डिफेंस स्टाफ पद से नवाजने का जो फैसला किया है, उसके लिए मोदी सरकार की भी प्रशंसा की जानी चाहिए।

थल सेना अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल की समाप्ति के दो दिन पूर्व छात्रों के एक समूह को संबोधित करते हुए जब जनरल रावत ने यह टिप्पणी कि हिंसा के लिए भड़काने वाले लोग नेता नहीं हो सकते। नेता वही है ,जो लोगों को सही राह दिखाएं ।तब उनकी टिप्पणी पर कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। नेताओं ने जनरल रावत पर यह आरोप लगाने में भी संकोच नहीं किया कि वे नागरिक मामलों में दखल दे रहे हैं।

दरअसल जनरल रावत ने यह टिप्पणी तब की थी, जब नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में किए जा रहे आंदोलनों में बड़े पैमाने पर हिंसा एवं तोड़फोड़ की खबरें प्रकाश में आई थी। राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रियाओं के बाद भारतीय सेना की ओर से यह बयान देकर सारे विवाद का पटाक्षेप किया गया कि थल सेना अध्यक्ष छात्रों को संबोधित कर रहे थे और उन्हें सही राह दिखाना उनकी जिम्मेदारी है। क्योंकि छात्र ही देश का भविष्य है

जनरल बिपिन रावत ने छात्रों को संबोधित करते हुए जो टिप्पणी की थी उस पर चढ़े विवाद को ध्यान में रखते हुए ही उन्होंने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद संभालते ही सबसे पहले यह बयान दिया कि सेनाएं राजनीति से दूर रहती है और वह केवल मौजूदा सरकार के निर्देशों का पालन ही करती है।

इसके बाद आशा की जा सकती है कि जो लोग जनरल रावत के पहले के बयान पर आपत्ति जता रहे थे। वे अब नए बयान से संतुष्ट हो गए होंगे। वैसे सबसे अच्छी बात तो यह होगी कि सेना से जुड़े विषयों को हर विवाद से परे रखा जाए। जनरल रावत ने भारतीय सेना के पहले चीफ डिफेंस स्टाफ का पदभार संभालने के बाद अपने संबोधन में ही जो विचार व्यक्त किए ,उनसे उन्होंने सारे देश को आश्वस्त कर दिया है कि वह एक नई शानदार परंपरा की शुरुआत करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।

उन्होंने कहा कि वे सीडीएस के रूप में तीनों सेनाओं के बीच संतुलन बनाते हुए एक टीम के रूप में सेना की मजबूती के लक्ष्य के रूप में काम करेंगे। उनके इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि वह सीडीएस के रूप में भी अपनी सेवाओं से यह साबित करने में समर्थ है कि इस पद पर उनकी नियुक्ति सर्वथा उचित थी।

:-कृष्णमोहन झा

( लेखक WDS के राष्ट्रीय अध्यक्ष और IFWJ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है )