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बाल विवाह एक कुरीति है – डॉ कुद्दूस हाशमी

लखनऊ: एजुकेटेड अनएम्पलाइड वेलफेयर सोसाइटी , असम द्वारा प्रेस क्लब , लखनऊ में एक सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में महिला व पुरुषों ने भाग लिया । सेमिनार में बाल विवाह जैसी कुरीति के सम्बंध में जागरुक करते हुए इस कुरीति को समाप्त करने पर जोर दिया गया ।

सेमिनार को सम्बोधित करते हुए डा0कुद्दूस हाशमी ने बाल विवाह को देश की विकराल समस्या बताते हुए कहा कि इस कुरीति को रोकने के लिए राजाराम मोहन राय जैसे लोगों ने संघर्ष किया वर्ष 1929 में प्रभावी किये गये शारदा एक्ट को देश में प्रभावी नहीं बनाया जा सका था । इस एक्ट में कई बार संशोधन भी किये गये बावजूद इसके बाल विवाह कुरीति पर पूर्णतः नियत्रण नहीं पाया जा सका ।

वक्ता डा0 उज़मा ने बताया कि शिक्षा एक बहुत बड़ा हथियार है इस कुरीति से लड़ने के लिए उन्होने आगे कहा कि लड़की की कम उम्र से शादी करने के कारण उसके स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है । ज़रुरत इस बात की है कि इस तरह के कार्यक्रम ग्रामीण स्तर पर और निरतंर रुप से होते रहना चाहिए ।

पिछड़ा समाज महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एहसानुल हक मलिक ने कहा कि बाल विवाह में अब कुछ कमी तो ज़रुर आयी है लेकिन फिर भी यह अभी समाज में विद्यमान है इसको समाप्त करने के लिए शिक्षा के स्तर को और बढ़ाना पड़ेगा और महिलाओं को भी अपने पैरों पर खड़ा करना होगा तब ही इस कुरीति को पूरी तरह से समाप्त किया जा सकेगा। वरिष्ठ पत्रकार भारत सिंह ने कहा कि आज आवश्यकता है समाज को जागरुक करने की क्योंकि सिर्फ कानून बनाने से कुछ नही होता जब तक समाज पूरी तरह से जागरुक नहीं होगा इस तरह की समस्याएं बनी रहेगी ।

कार्यक्रम का संचालन अशोक सिह ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रुप से भाग लेने वालों तारिक़ खान, अंजुम , नौमान माजिद , अब्दुल बासित खाॅं , मुश्ताक अहमद,बिस्मय भारद्वाज आदि ने भाग लिया ।

@तारिक़ खान






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