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मां के पेट में बच्चा आते ही उसका मानव अधिकार प्रारंभ हो जाता है

child-soon-in-the-womb-of-her-starts-human-rightsखंडवा : पहले डाक्टर को भगवान समझा जाता था अब मरीज को भगवान समझकर उपचार किया जाना चाहिए। पिछले एक दशक से स्वास्थ्य सेवाओं में सुविधाएं बढ़ी है, मरीज डाक्टर का दुश्मन नहीं होता, मरीज को डाक्टर पर विश्वास करना चाहिए। उपरोक्त उद्गार मप्र मानव अधिकार आयोग जिला इकाई खंडवा, जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित स्वास्थ्य सेवाएं उनकी जनसामान्य तक पहुंच व प्रभावशीलता विषय पर माणिक्य वाचनालय में आयोजित कार्यशाला में व्यक्त करते हुए सिविल सर्जन डा. ओपी जुगतावत ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की कमियों को दूर करने के लिए टीम वर्क आवश्यक है। उन्होंने चिकित्सकों की कमी के साथ ही विभिन्न मीटिंगों में उपस्थित होने से स्वास्थ कार्य प्रभावित होने की बात कही।

कार्यक्रम में जिला चिकित्सा अधिकारी जेएन अवस्या ने कहा कि सरकार ने स्वास्थ के क्षेत्र में व्यापक व्यवस्थाएं की है, आम नागरिकों, समाजसेवी संगठनों एवं स्वास्थ्य विभाग के सभी लोगों को शासकीय योजनाओं का प्रचार-प्रसार अधिक से अधिक करने को कहा ताकि अधिक से अधिक लोग लाभावांति हो सके। कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वागत उद्बोधन व मप्र मानव अधिकार आयोग की मंशा से अवगत कराते हुए जिला संयोजक नारायण बाहेती ने कहा कि मां के पेट में बच्चा आते ही उसका मानव अधिकार प्रारंभ हो जाता है।

आयोग द्वारा नागरिकों को जागरूक करने हेतु समय-समय पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। संपूर्ण विश्व में मानव अधिकारों का हनन बढ़ रहा है इस पर रोक लगाने व जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रतिवर्ष अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष स्वास्थ्य सेवाएं उनकी जन सामान्य तक पहुंच व उनकी प्रभावशीलता विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया है। श्री बाहेती ने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी या अन्य मानव अधिकार हनन की कोई भी शिकायत हो तो वह हमारे पास आवेदन कर सकता है। यदि स्वास्थ विभाग के अधिकारी विधि अनुसार मधुर व्यवहार से कार्य करेंगे तो मानव अधिकार का हनन नहीं होगा। आयोग मित्र सुरेन्द्र सोलंकी आयोग की मंशा से अवगत कराते हुए सभी संस्थाओं से सहयोग करने की बात कही।

सामाजिक कार्यकर्ता गणेश कानड़े ने स्वास्थ के क्षेत्र में कमियों व उपलब्धियों पर अपने विचार रखते हुए हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी एवं अन्य जांचे गंभीरता से अनिवार्य की जाने की बात कही। मंच पर जिला संयोजक नारायण बाहेती, आयोग मित्र सुरेन्द्र सोलंकी, मुख्य अतिथि सीएमएचओ श्री अवस्या, सिविल सर्जन ओपी जुगतावत, सुभाष सोलंकी, लायनेस अध्यक्ष अर्चना तिवारी, अनिता पिल्ले, रोटरी अध्यक्ष अनिमेष हुमड़, लायंस सचिव एनडी पटेल, जेसीस के पूर्व अध्यक्ष चंचल गुप्ता आसीन थे। कार्यक्रम में मधुबाला शैलार, आरती भाटी, हंसमुखी जोशी, हेमंत बागड़ी, गांधीप्रसाद गदले, अक्षय जैन, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्य विभाग का स्टाफ, लायंस, लायनेस, रोटरी, जेसीआई, डाक्टरर्स एवं गणमान्यजन उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन अनिल बाहेती ने किया एवं आभार सुभाष सोलंकी ने माना।






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