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घातक है झूठ की बुनियाद पर सांप्रदायिक धु्रवीकरण का खेल

वैसे तो राजनीति का अर्थ राज अथवा शासन करने की नीति होता है। परंतु ऐसा लगता है कि इसके मायने अब बदल चुके हैं। और राज,सत्ता अथवा शासन को कैसे हासिल किया जा सकता है इसके लिए बनाई जाने वाली नीति को ही अब राजनीति कहा जाने लगा है। यही वजह है कि रामराज्य स्थापित करने की जिस परिकल्पना का जि़क्र राजनीतिज्ञों द्वारा किया जाता रहा है उसमें वास्तविक रामराज्य अथवा सबके लिए समान न्याय का अर्थ त्यागकर भगवान राम के नाम पर राज्य सत्ता अथवा शासन को हासिल करने की जुगत को रामराज्य की संज्ञा दी जाने लगी है। भारतीय लोकतंत्र में मतदाताओं को लुभाने हेतु धर्म-जाति,क्षेत्र,रंग-भेद तथा भाषा आदि के नाम पर नेताओं द्वारा अनेक प्रकार की आकर्षक बातें की जाती रही हैं। राजनैतिक दलों के नेता स्वयं को किसानों का मसीहा,गरीबों का मसीहा,दलितों का मसीहा व श्रमिकों का मसीहा जैसे शब्दों से अलंकृत करते सुने जाते हैं। और अपनी तथाकथित मसीहाई के पक्ष में कुछ न कुछ सकारात्मक तर्क भी पेश करते दिखाई देते हैं। परंतु गत् दो दशकों से हमारे देश में राजनैतिक छल-कपट और हथकंडों के आधार पर धर्म के नाम पर राजनीति करने की एक नई शुरुआत की जा चुकी है। और झूठ की बुनियाद पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का खेल खेलने की यह नई कोशिश निश्चित रूप से देश की एकता,अखंडता व सद्भाव के लिए बेहद घातक है।

diversity_logo2दक्षिणपंथी विचारधारा रखने वाली भारतीय जनता पार्टी देश के धर्मनिरपेक्ष राजनैतिक दलों पर हमेशा यह आरोप लगाती रही है कि यह दल देश में मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करते हैं। लगभग 60 वर्षों तक दक्षिणपंथियों द्वारा लगाए जाने वाले इस आरोप को यदि सही माना जाए तो इन आरोपों के परिणामस्वरूप भारतीय मुसलमानों को अब तक शैक्षिक,आर्थिक,सामाजिक व बौद्धिक रूप से पूरी तरह संपन्न हो जाना चाहिए था। परंतु दुर्भाग्यवश भारतीय मुसलमानों की गिनती आज भी देश के पिछड़े,तुलनात्मक दृष्टि से कम शिक्षित तथा आर्थिक रूप से कमज़ोर नागरिकों के रूप में होती है। फिर आ$िखर क्या हुआ भारतीय मुसलमानों को मुस्लिम तुष्टीकरण का लाभ? यदि कुछ हुआ होता तो ज़रूर नज़र आता और यदि नज़र नहीं आ रहा है इसका अर्थ यह महज़ एक प्रोपेगंडा मात्र था और आज भी जारी है। फिर सवाल यह है कि आखिर दक्षिणपंथी विचारधारा के संगठनों व दलों द्वारा ऐसे आरोप क्योंकर लगाए जाते रहे है? दरअसल इसका अर्थ देश के बहुसंख्यक हिंदू समाज के दिलों में भारतीय मुसलमानों के प्रति नफरत व सौतेली सोच पैदा करने के अतिरिक्त कुछ नहीं। इस प्रकार का दुष्प्रचार कर भरतीय जनता पार्टी जैसे दलों द्वारा हमेशा यही कोशिश की जाती रही है कि इस दुष्प्रचार के द्वारा किसी तरह देश के हिंदू मतों खासतौर पर उदारवादी हिंदुओं के मतों का अपने पक्ष में ध्रुवीकरण कर सत्ता की मंजि़ल तक पहुंचा जाए।

और जब भारतीय जनता पार्टी व उसके अन्य सहयोगी दलों व संगठनों ने यह देखा कि देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे व भारत के धर्मनिरपेक्ष संविधान तथा देशवासियों के सेक्यूलर मिज़ाज व तुष्टीकरण जैसे झूठे दुष्प्रचार के बावजूद देश की सत्ता उनके हाथों से कोसों दूर है फिर इसी दक्षिणपंथी विचारधारा के रणनीतिकारों ने भारतीय समाज को धर्म के नाम पर विभाजित करने का एक और खतरनाक हथकंडा अपनाया। वह था लव जेहाद,धर्मपरिवर्तन व गौहत्या जैसे अति संवेदनशील मुद्दों को झूठ की बुनियाद पर उछाल कर अपने पक्ष में उदारवादी हिंदूू मतों का ध्रुवीकरण करना। और यह शक्तियां अपनी विचारधारा रखने वाले सैकड़ों संगठनों व दलों के सहयोग से ऐसे मामलों को गत् दो दशकों से लगातार उछालने में सफल रहीं तथा इसी चतुराई,पाखंड,झूठ व फरेब का सहारा लेकर आखिकार इन्होंने सत्ता हासिल भी कर ली। उदाहरण के तौर पर कर्नाटक में सक्रिय एक दक्षिणपंथी संगठन हिंदू जनजागृति समिति ने पूरे ज़ोर-शोर के साथ 2010 में यह दुष्प्रचार किया कि राज्य की 30 हज़ार हिंदू लड़कियों को मुसलमान लडक़ों द्वारा बहला-फुसला कर अपने चंगुल में फंसा लिया गया है।

इतना ही नहीं बल्कि यह भी प्रचारित किया गया कि उन सभी 30 हज़ार लड़कियों का धर्म परिवर्तन भी किया जा चुका है। उस समय राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी तथा यदिउरप्पा राज्य के मुख्यमंत्री थे। इस दुष्प्रचार के चलते राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव बिगडऩे लगा तथा यह मामला मीडिया के माध्यम से पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। आखिरकार कर्नाटक पुलिस को हिंदू जनजागृति समिति के इन आरोपों की तहकीक़ात करनी पड़ी। कर्नाटक राज्य पुलिस ने 2010 में ही ऐसे 404 मामलों का पता किया जिसमें हिंदू लड़कियां अपने घरों से लापता हो गईं थी। अपनी तफ्तीश के बाद कर्नाटक पुलिस इस नतीजे पर पहुंची कि इन 404 लड़कियों में से 332 लड़कियां हिंदू लडक़ों के साथ अपने घरों से भागी थीं जबकि शेष लड़कियां ईसाई व मुस्लिम लडक़ों के साथ अथवा अपने पारिवारिक कारणों के चलते अकेले ही अपना घर छोडक़र चली गई थीं। इतना ही नहीं बल्कि कर्नाटक पुलिस को इस पूरे प्रकरण में न तो ‘लव जेहाद’ जैसे दुष्प्रचारित किए जाने वाले मामले का कोई प्रमाण मिला न ही किसी लडक़ी के धर्मपरिवर्तन की बात उजागर हुई। फिर आखिर क्या था 30 हज़ार हिंदू लड़कियों को मुसलमान लडक़ों द्वारा भगा ले जाने जैसी निराधार बातों को प्रचारित करने का मकसद?

इसी प्रकार पिछले दिनों मेरठ में उस बहुचर्चित कथित धर्मपरिवर्तन कांड में एक नया मोड़ आ गया जबकि भाजपाईयों द्वारा धर्मपरिवर्तन की शिकार बताई जा रही 22 वर्षीय हिंदू लडक़ी ने इस पूरे प्रकरण को झूठा और बेबुनियाद $करार देते हुए उल्टे यह आरोप लगाया कि यह पूरा का पूरा मामला झूठा है। इतना ही नहीं बल्कि उसने यह रहस्योद्घाटन भी किया कि मुस्लिम लडक़ों के विरुद्ध अपहरण का मामला दर्ज कराने तथा जबरन धर्म परिवर्तन जैसे आरोप लगाए जाने के लिए भारतीय जनता पार्टी के नेताओं द्वारा उसके माता-पिता को पैसे दिए गए थे। इस लडक़ी ने पुलिस में अपने माता-पिता के विरुद्ध अब एक रिपोर्ट भी दर्ज कराई है जिसमें उसने अपने मां-बाप से सवयं को जान का खतरा होने की बात कही है। इसी लडक़ी ने बताया कि उसके अपहरण व धर्म परिवर्तन जैसी खबरों के उछलने के फौरन बाद 7 अगस्त को विनीत अग्रवाल नामक एक स्थानीय भाजपा नेता ने उसके माता-पिता को पच्चीस हज़ार रुपये भी दिए। और बाद में और पैसे देने का भी वादा किया। अब उसी लडक़ी ने धर्म परिवर्तन तथा गैंगरेप जैसे सभी आरोपों को झुठलाते हुए इस पूरे मामले को भारतीय जनता पार्टी के नेताओं तथा अपने माता-पिता की साजि़श का नतीजा बताया है। इसी प्रकार स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इसी संवेदनशील इलाके में चुनाव के दौरान अपने भाषणों में यूपीए सकार पर ‘गुलाबी क्रांति’ को बढ़ावा देने यानी मांस के कारोबार का जि़क्र कर हिंदू मतदाताओं में यूपीए व विशेषकर कांग्रेस के विरुद्ध नफरत पैदा करने का प्रयास किया था।

आज नरेंद्र मोदी को अपने इन्हीं खतरनाक हथकंडों व दुष्प्रचारों के बल पर सत्ता हासिल हो चुकी है। आखिर अब प्रधानमंत्री गुलाबी क्रांति पर लगाम लगाने के लिए मांस के निर्यात पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगा रहे हैं? क्या कथित गुलाबी क्रांति का मुद्दा चुनाव में हिंदू मतदाताओं की भावनाओं के झकझोरने मात्र के लिए ही इस्तेमाल किया गया था? कर्नाटक में हिंदू जनजागृति समिति के जिन नेताओं द्वारा 30 हज़ार हिंदू लड़कियों को मुस्लिम लडक़ों द्वारा अपहरण कर ले जाने अथवा उनका धर्मपरिवर्तन किए जाने जैसी खतरनाक व समाज को विभाजित करने की कोशिश करने जैसी अफवाह फैलाई गई थी उन राष्ट्र विभाजक शक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? मेरठ की हिंदू लडक़ी द्वारा दिए जा रहे बयान पर संज्ञान लेते हुए उन भाजपाईयों के विरुद्ध कार्रवाई क्यों नही हो रही है जिन्होंने सांप्रदायिक सद्भाव बिगाडऩे हेतु झूठऔर फरेब का ऐसा प्रपंच रचा? अब तक मुज़फ्फर नगर में हुए दंगों का भी वास्तविक कारण तथा इन दंगों की बुनियाद का सही ढंग से लोगों को पता नहीं चल सका कि वास्तव में यह घटना इतना बड़ी थी कि मुज़फ्फरनगर व आसपास के क्षेत्र सांप्रदायिक हिंसा में झुलस उठे? या फिर संसदीय चुनावों के मद्देनज़र समाज को धर्म के नाम पर विभाजित करने हेतु राजनीति के शातिर लोगों द्वारा यह साजि़श रची गई? जो भी हो मुज़फ्फर नगर दंगों के आरोपी संजय बालियान को केंद्रीय मंत्री बना कर उन्हें पुरस्कृत करने तथा एक दूसरे आरोपी संगीत सोम विधायक को ज़ेड प्लस सुरक्षा दिए जाने के केंद्र सरकार के फैसले से उसकी नीयत का सा$फ-साफ पता चल जाता है। यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लाल किले से 15 अगस्त को दिए गए अपने भाषण के इस अंश को अमली जामा पहनाना है जिसमें उन्होंने 10 वर्षों के लिए देश को सांप्रदायिक तनाव व हिंसा से मुक्त रखने की इच्छा जताई है तो उन्हें वास्तविक रामराज्य की अवधारणा रखने वाले न्यायपूर्ण कदम उठाने होंगे। अन्यथा झूठ की बुनियाद पर संाप्रदायिक ध्रुवीकरण का खेल खेलना देश की एकता व अखंडता के लिए अत्यंत घातक सिद्ध हो सकता है।

:-तनवीर जाफरी

Tanveer Jafriतनवीर जाफरी
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