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गांधी के हत्यारों में सावरकर का नाम दर्ज था, अंग्रेजों से मांगी थी माफी: दिग्विजय 

झाबुआ: भाजपा द्वारा महाराष्ट्र चुनावों के लिए जारी घोषणा पत्र में जब से इस बात की घोषणा की गई है कि अगर उनकी राज्य में सरकार बनी तो वह वीर सावरकर को भारत रत्न देने के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजेंगे। इस बात से देश की तमाम विपक्षी पार्टियों ने भाजपा पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। विपक्ष यह कह कर भाजपा पर हमला किया है कि वह एक ऐसे व्यक्ति को कैसे भारत रत्न देने की मांग कर रही है जिस पर देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या में शामिल होने का आरोप हैं।

दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी इस बात के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा है कि वीर सावरकर के जीवन के दो पहलू थे, पहले में उनका जेल से लौटने के बाद आजादी की लड़ाई में भागीदारी और दूसरे पहलू में उनका राष्ट्रपिता की हत्या में शामिल होना।

दिग्विजय ने कहा कि सावरकर के जिंदगी के दो पहलू थे, जिसमें पहले पहलू में अंग्रेजों से माफी मांगने के बाद लौटने पर स्वाधीनता संग्राम में उनकी भागीदारी। दूसरे पहलू में, सावरकर का नाम महात्मा गांधी की हत्या के मामले में साजिश रचने वाले के तौर पर दर्ज किया गया था।

दिग्विजय ने कहा कि हमें भूलना नहीं चाहिए कि महात्मा गांधी की हत्या करने वाले षड्यंत्रकारियों की सूची में सावरकर का नाम भी था। वह तो माफी मांग कर लौट आए थे।
दिग्विजय ने राजनीति से संयास के दिए संकेत

वहीं, दो बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह ने बुधवार को एक रैली को संबोधित करते हुए इशारा किया है कि वह अब सक्रिय राजनीति से संयास की घोषणा कर सकते हैं।

झाबुआ जिले के बोरी क्षेत्र में अपने विश्वासपात्र और पार्टी के उम्मीदवार कांतिलाल भूरिया के लिए आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि मैंने और कांतिलाल भूरिया सक्रिय राजनीति में लंबे समय से हैं, और अब हम एक ऐसे उम्र में आ चुके हैं, जहां से हमें संयास ले लेना चाहिए।

दिग्विजय ने कहा कि अब हम युवा पीढ़ी को तैयार कर रहे हैं, जो हमारे साथ काम कर रहे हैं। मैंने बहुत सारे चुनाव लड़े हैं और अब कांतिलाल भूरिया भी अपना आखिरी चुनाव लड़ रहे हैं। मैं आप लोगों से कहना चाहूंगा कि 1980 से आजतक आप लोगों के लिए कांतिलाल भूरिया द्वारा किए गए कार्यों को देखते हुए हर एक वोट उन्हीं को दिया जाना चाहिए।

सिंह के भाषण को 69 वर्षीय पूर्व केंद्रीय मंत्री भूरिया (जो सिंह के नेतृत्व में तत्कालीन मप्र सरकार में मंत्री भी थे) को 21 अक्तूबर के विधानसभा उपचुनाव में समर्थन के लिए मतदाताओं से एक भावनात्मक अपील के रूप में देखा गया जो 37 वर्षीय भाजपा उम्मीदवार भानु भूरिया के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।

दिग्विजय के इस बयान के राजनीति के गलियारों में एक उनके सक्रिय राजनीति से संयास के तौर पर देखा गया है जो 16 साल के अंतराल के बाद कुछ ही महीने पहले लोकसभा चुनावों के लिए मैदान में उतरे थे, जहां उन्हें भोपाल लोकसभा सीट पर भाजपा की उम्मीदवार प्रज्ञा ठाकुर से हार का सामना करना पड़ा।

सिंह को अप्रैल 2014 में संसद के ऊपरी सदन के लिए चुना गया था और मध्यप्रदेश से राज्यसभा सदस्य के रूप में उनका कार्यकाल 9 अप्रैल, 2020 को समाप्त हो रहा है।

72 वर्षीय राज्यसभा सदस्य ने यह कहकर एक और दूरगामी राजनीतिक बयान दिया कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार वर्तमान सीएम कमलनाथ के नेतृत्व में पूरे पांच साल तक जारी रहेगी। इस प्रकार दिग्विजय ने सरकार में बदलाव के बारे में अटकलों पर विराम लगाते हुए भविष्य में सरकार में नेतृत्व में परिवर्तन को नकार दिया है।

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