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महागठबंधन में कांग्रेस का भविष्य तय करेंगे बुआ-बबुआ

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में महागठबंधन के लिए बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ अहम बैठक के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कांग्रेस की भागीदारी के बारे में बड़ी बात कही है। उत्तर प्रदेश में महागठबंधन के स्वरूप के बारे में अखिलेश यादव ने कहा कि कांग्रेस इसमें शामिल होगी या नहीं, यह बात हम दोनों (मतलब अखिलेश यादव और मायावती) मिलकर तय करेंगे। हम देखेंगे कि आपस में किस प्रकार से सहयोग करना है। सपा-बसपा के बीच सीट बंटवारे के सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा कि वह इस बारे में अभी कुछ नहीं कहेंगे। हालांकि, इतना संकेत जरूर दिया कि बातचीत लगभग फाइनल स्‍टेज में है। उन्‍होंने कहा कि बस एक-आध हफ्ते की बात है, बहुत जल्‍द वह मीडिया को बुलाकर इस बारे में पूरी जानकारी देंगे। उसके बाद सबकों पता चल जाएगा कि गठबंधन में कौन होगा और कौन नहीं।

पिछले दिनों अखिलेश यादव और मायावती के बीच अहम बैठक हुई थी, जिसके बाद सीट बंटवारे को लेकर एक फॉर्मूला मीडिया में सामने आया था। 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती की यह बैठक शुक्रवार को हुई थी। सूत्रों के हवाले बैठक के बाद जो खबर आई थी, उसके मुताबिक, सपा-बसपा ने फिलहाल यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से 76 सीटों पर मिलकर लड़ने का फैसला कर लिया है। बाकी 4 सीटों को लेकर खबर है कि इनमें से दो सीटें अमेठी और रायबरेली कांग्रेस के लिए छोड़ी जा सकती हैं, जबकि दो सीटों पर फैसला होना अभी बाकी है। कई खबरों में यह बात सामने आई कि है कि सपा-बसपा ने 37-37 सीटों पर लड़ने का फैसला किया है। मतलब 74 सीटें पर दोनों लड़ेंगे और 6 सीटों पर फैसला बचा है।

अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी ने देश में गठबंधन से सरकार चलाने की कला सिखाई और हम वही कर रहे हैं, हम उसी रास्ते पर चल रहे हैं। हम बीएसपी के साथ मिलकर गणित ठीक कर रहे हैं। सपा की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतें, लेकिन जिन्हें हमें रोकना है उनके पास क्या है, उनके पास सीबीआई है। अखिलेश ने कहा कि सपा चुनाव जीतने की कोशिश कर रही है और बीजेपी सीबीआई के बहाने हमें रोकने की कोशिश कर रही है। सीबीआई का स्वागत है, अगर पूछताछ करेंगे तो जवाब मैं दूंगा, लेकिन सीबीआई को भी जवाब देना होगा।

अखिलेश यादव लंबे समय से बसपा के साथ गठबंधन को लेकर प्रयास कर रहे हैं। वह कई बार कह चुके हैं कि अगर बुआ को साथ लाने के लिए उन्‍हें सीटों पर समझौता भी करना पड़ा तो वह पीछे नहीं हटेंगे, लेकिन अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा गर्म है कि अखिलेश बसपा से एक सीट भी कम नहीं लेना चाहते हैं। वह एकदम बराबरी पर लड़ने की बात कर रहे हैं। वह किसी भी सूरत में मायावती को ज्‍यादा प्रभावी तौर पर देखने को तैयार नहीं है। बहरहाल, चर्चा अभी अंतिम दौर में देखना रोचक होगा कि आखिर महागठबंधन का कैसा स्‍वरूप उभरकर सामने आता है।

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