है हिम्मत तो पहले देश में काला धन को बाहर निकालिए - Tez News
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है हिम्मत तो पहले देश में काला धन को बाहर निकालिए

देशी हिटलर महोदय। देश की जनता को आपके वे सारे भाषण याद हैं जो आपने लोकसभा चुनाव के समय दिया था। कहने की आवश्यकता नहीं है कि गोयबेल्स की तरह आपके झुठे प्रचार तंत्र ने बेरोजगारी और महंगाई से त्रस्त जनता को आपकी ओर आकर्षित किया। फ़िर जैसा कि लोकतांत्रिक रिवाज है, आप देश के पीएम बने। अब आपकी बारी है। काला धन को लेकर आपकी हेकड़ी निकल चुकी है। अब आपने भी यह मान लिया है कि अंगूर सचमुच बड़े खट्टे हैं।

“मन की बात” के दौरान जब आपने कहा कि आपको नहीं पता कि देश का कितना काला धन विदेशों में जमा है तब मुझे लग रहा था कि यह बात आप अपने मुख से बोल रहे हैं या फ़िर…। चुनाव प्रचार के समय आप कहा करते थे कि सौ दिनों के अंदर विदेशों में जमा सारा काला धन वापस लायेंगे और इससे देश के हर नागरिक के बैंक खाते में 15-20 लाख रुपए जमा कराये जायेंगे। खैर सच क्या है, अब आपने अपने ही मुख से स्वीकार लिया है। इसलिए इस बारे में अधिक कहना आपकी शान में गुस्ताखी के समान होगी। इसकी वजह यह कि लोकतंत्र में पांच वर्षों तक गीदड़ शेर बने रहने का ढोंग आसानी से कर सकते हैं।

Modi  हम आपसे विदेश में काला धन की बात नहीं करना चाहते हैं। हम तो आपको देश में काला धन की बात कर रहे हैं। कभी सोचा है आपने कि देश में कितना काला धन है। लोग तो कहते हैं कि सबसे अधिक आपने काला धन का इस्तेमाल अपने चुनाव प्रचार में किया था। लगभग 30 हजार करोड़ रुपए। यानी आपने अपने एक चुनाव में जितनी राशि खर्च की, उतनी राशि देश के डेढ दर्जन से अधिक राज्यों के कुल बजट से भी अधिक है। आप जिस तरह के ईमानदार हैं, आपसे यह उम्मीद करना बेकार है कि आप इस अकूत काला धन का सच हम निरीह जनता को बतायेंगे।

खैर सवाल यह नहीं है कि आप देशी काला धन को जानते हैं या नहीं। हम आपको एक प्रमाण देते हैं। राजधानी पटना के लोदीपुर इलाके में चर्च की जमीन पर आप ही के दल के बड़े नेता का कब्जा है। यह कब्जा तबसे है जब सूबे में आपका दल सरकार में शामिल था। सैंया भये कोतवाल वाली कहावत चरितार्थ हुई और परिणाम यह हुआ कि चर्च पर कब्जा हो गया। जिस जमीन पर कब्जा किया गया, वहां एक साइन बोर्ड लगा है। उसपर आपके दल के बड़े नेता के बेटे का नाम भी लिखा है। कहने को कानून अपना काम कर रहा है।

हिटलर महोदय यदि आप कभी पटना आयें तो आपको देशी काला धन का नजारा साफ़-साफ़ दिखेगा। डाकबंगला चौराहे पर आपके बंधु-बांधव गण (सभी भुमिहार) ने अपना कब्जा कर रखा है। कुछ जमीन वक्फ़ बोर्ड की है तो कुछ खासमहाल के नाम से जाना जाता था। आजकल वहां शानदार मौल खड़े हैं, जो बदलते बिहार का प्रतीक भी हैं। देश में रोज कितना काला धन जमीन के अंदर घुस जाता है कभी राजिस्ट्री आफ़िस जाकर देखिए। जमीन की सरकारी कीमत यदि एक लाख रुपए है तो असल में वह बिकती 2 लाख रुपए में है। सरकार केवल एक लाख के लिए टैक्स लेती है। लोग भी बड़े आराम से एक लाख रुपए चेक और शेष रुपए नकद (यानी काला धन) अदा कर देते हैं।

बहरहाल आप तो इक्कीसवीं सदी के महान हिटलर हैं। आपकी शान में कुछ भी कहना अतिश्योक्ति होगी। वैसे आप इसे चुनौती नहीं बल्कि हमारा अनुरोध ही समझें। है हिम्मत तो पहले देश में काला धन को बाहर निकालिए हिटलर महोदय।

नवल कुमार

naval kumarलेखक परिचय :-

नवल कुमार

अपना बिहार डॉट ओआरजी के संपादक है

http://www.apnabihar.org/

 

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