नाइटी में ही कमरे से खींचकर ले गई पुलिस – हसीन जहां

क्रिकेटर शमी की पत्नी हसीन जहां के साथ डिडौली थाने की पुलिस की कथित बदसलूकी और बेवजह हिरासत में रखने के मामले की जांच सीओ रामपुर करेंगी।

हसीन की शिकायत पर बुधवार को एडीजी अविनाश चंद्र ने यह आदेश दिया है। हसीन ने आरोप लगाया था कि थाने के दो सब इंस्पेक्टरों ने रात 12 बजे उन्हें हाथ पकड़कर उनके कमरे से बाहर खींच लिया था।

यह भी परवाह नहीं की कि वह उस समय नाइटी पहने हुई थीं। ऐसी ही हालत में पुलिस उन्हें थाने ले गई।

हसीन जहां मंगलवार को बरेली पहुंचकर मेरा हक फाउंडेशन की अध्यक्ष फरहत नकवी से मिली थीं। बुधवार को फरहत उन्हें साथ लेकर एडीजी से मिलीं।

हसीन ने एडीजी को दी शिकायत में कहा है कि वह 28 अप्रैल की शाम साढ़े सात बजे बेटी आयशा और मेड के साथ सहसपुर में अपने पति शमी के घर पहुंची थीं। उनके ससुराल वालों ने शमी को फोन किया तो एक घंटे बाद ही पुलिस पहुंच गई।

पुलिस ने उनसे पूछताछ की जिसके बाद वह बेटी के साथ अपने कमरे में चली गई। रात करीब 12 बजे जोर-जोर से पीटकर जबरन दरवाजा खुलवाया गया। दरवाजा खोलते ही थाने के एसएचओ देवेंद्र कुमार और एसआई केपी सिंह उनका हाथ पकड़कर बाहर खींचने लगे, उनका मोबाइल भी छीन लिया।

वह कपड़े बदलने को कहती रहीं लेकिन पुलिस वालों ने उन्हें नाइटी में ही खींचकर जीप में बैठा लिया और डिडौली थाने ले आए।

हसीन ने अपनी शिकायत में कहा है कि कुछ देर बाद उन्हें और उनकी बेटी को जिला अस्पताल ले जाया गया जहां उनसे जबरन एक पेपर पर अंगूठा लगवा लिया।

पुलिस वालों ने उनके साथ गालीगलौज भी की। उन्हें बेटी के साथ अपराधियों की तरह एक कोठरी में बंद कर दिया। अगले रोज शांति भंग करने के आरोप में चालान काटकर एसडीएस के सामने पेश किया जहां से उन्हें मुचलके पर छोड़ा गया।

हसीन ने एडीजी को बताया कि पुलिस ने यह कार्रवाई उनके पति और ससुराल वालों के कहने पर की।

मेरा हक फाउंडेशन की अध्यक्ष फरहत नकवी का कहना है कि हसीन की लड़ाई सही है। वह न्याय मिलने तक हसीन के लिए लड़ाई लड़ेंगी।

हसीन के साथ उसकी बेटी के भी भविष्य सवाल है। उन्होंने बताया कि एडीजी से मिलकर हसीन ने सारी बात बता दी है। उन्हें उम्मीद है कि पुलिस-प्रशासन का उन्हें पूरा सहयोग मिलेगा।

एडीजी बरेली जोन अविनाश चंद्र ने कहा कि, शमी की पत्नी हसीन जहां फरहत नकवी के साथ बुधवार को मुझसे मिलीं। अमरोहा पुलिस के खिलाफ शिकायत की है।

जांच अमरोहा पुलिस को न सौंपकर रामपुर की सीओ को दी गई है। उनकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।