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फिर उठी बुन्देखन्ड सहित अन्य स्थानों को राज्य का दर्जा देने की मांग

लखनऊ:  राजधानी के प्रेस क्लब में शनिवार को नये राज्यों के गठन के लिये नेशनल फेडेरशन फॉर न्यू स्टेट्स ने पत्रकार वार्ता का आयोजन किया । फिल्म अभिनेता राजा बुन्देला ने नये और छोटे राज्यों के निर्माण के लिये प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत करने के रास्ते खोलने की बात शुरू करने की अपील करते हुए कहा कि कोई राज्य नहीं चाहता कि उसके टुकड़े किये जाये, ये केन्द्र सरकार का ऐच्छिक विषय है । बुन्देखण्ड राज्य बनाने की बात करते हुए राजा ने कहा कि अब तो मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और केन्द्र तीनों जगहों पर बीजेपी की सरकार है इसलिये बुन्देखण्ड बनने में कोई परेशान या एतराज नहीं होना चाहिए । अभिनेता बुन्देला ने कहा कि पहले भाषा के आधार पर राज्यों का गठन किया जाता था परंतु अब विकास के आधार पर नये राज्यों का निर्माण होना चाहिए । पिछले कुछ वर्षो में बने नये राज्यों की मिसाल देते हुए राजा ने कहा कि वहॉ की जीडीपी दर देख कर स्पष्ट अनुमान लगाया जा सकता है कि छोटे राज्यों ने कितनी तेजी से तरक्की की है ।

फेडेरशन के अध्यक्ष एस एच आणे ने विदर्भ राज्य बनाने की मांग करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार नये राज्यों के निर्माण के लिये बातचीत के दरवाजे खोलने का काम करे ।

फेडेरशन के सचिव दिल्ली विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रोफ़ेसर डॉ० मुनीश तमांग ने गोरखालैण्ड बनाने की मांग करते हुए कहा कि वहॉ के शत प्रतिशत लोग चाहते है कि बंगाल से अलग गोरखालैण्ड का निर्माण हो । बंगाल से हमारी न तो भाषा मिलती है और न ही कोई विचार इसलिये विकास के मुद्दे पर नये राज्य का निर्माण करवाया जाना चाहिए । प्रधानमंत्री मोदी से अपील करते हुए तमांग ने कहा कि पहले बीजेपी भी नये राज्यों की पक्षधर थी और पार्टी ने नये राज्यों के गठन के लिये हुए आंदोलनों में भाग भी लिया था और अब तो केन्द्र में सरकार भी है तो नये राज्यों का निर्माण होना ही चाहिए ।
पूर्वान्चल राज्य की मांग करते हुए फेडेरशन के कोषाध्यक्ष पंकज जायसवाल ने कहा कि प्रदेश की सत्ता काफ़ी दिनों बाद पूर्वान्चल के हाथों में आई है । मुख्यमंत्री योगी ने पूर्वान्चल के लिये बहुत काम किया है । योगी जी ने पूर्वान्चल निर्माण के लिये अपनी वेव साइट पर काफ़ी कुछ अपलोड़ किया था जिसकों अब मुख्यमंत्री जी वापस देख ले और पुनर्विचार करे । जायसवाल ने कहा कि अब तक पूर्वान्चल के विकास की बात कास्मेटिक ढ़ंग से की गयी, कभी भी बुनियादी स्तर पर विकास के मुद्दे को नहीं उठाया गया । लोग सत्ता और नाम के लालच में डेवलेप्मेंट की बात करते रहे परंतु न तो पूर्वान्चल राज्य का निर्माण हुआ और न ही विकास ।

मेघालय के एडवोकेट जनरल और फेडेरशन के लीगल एडवाइजर पी निरूप जिन्होनें इस संस्थान के बैनर तले तेलांगना राज्य निर्माण के लिये संघर्ष किया था, नये राज्यों के गठन पर बोलतें हुए कहा कि सही मायने में यदि देश को बनाना है तो छोटे राज्यों का निर्माण कर विकास करना आवश्यक है । आजादी के बाद बंटवारा होते समय जो रियासत या रजवाड़ों ने भारतीय गणराज्य में शामिल होने की इच्छा जाहिर की थी वो इसी लिये किया था कि विकास देश के हर कोने तक पहुंचे ।
रिपोर्ट @शाश्वत तिवारी

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