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नोटबंदी: नहीं हुए रूपये जमा, वृद्ध ने तोड़ा दम !

shamed-by-the-state-bank-of-mandsaurमंदसौर- शहर की स्टेट बैंक में जमा रूपये जमा करने पहुंचे वृद्ध के रूपये 4 दिन बाद भी जमा नहीं हुए वही रविवार सुबह वृद्ध ने दम तोड़ दिया। तीन दिन पहले अपने खून पसीने की कमाई में से बचाई 40 हजार की राशि को जमा करने में मानवता को बलाये ताक में रखने वाले मन्दसौर स्टेट बैंक के प्रबंधन के खिलाफ जहां 4 दिन में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। वही दूसरी और वृद्ध शांतिलाल जैन का रविवार को सुबह निधन हो गया।

4 दिन की इस अवधि के दौरान न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नुमाइंदे जन प्रतिनिधि बुजुर्ग और उसके परिवार के काम आये और न ही अन्य जनता के नुमाइंदे और विकासशील प्रशासन कुछ कर पाया।

लीड बैंक मैनेजर की भी नहीं चली:-
हैरत की बात तो यह रही कि इस मामले में स्वयं मन्दसौर लीड बैंक के मैनेजर सुधीर कुमार ने भी पहले ही दिन न्याय दिलाने और रूपये जमा हो जाने की बात कही थी लेकिन उसके बावजूद मुखर्जी चौक शाखा के प्रबंधन का दिल नहीं पसीजा और इसी बीच बैंक की छुट्टियां लग गयी।

मैनेजर ने किसी की नहीं सुनी:- इस मामले में स्थिति यह रही कि प्रदेश और देश में भाजपा की सरकार हैं उसके बावजूद मन्दसौर में हुई इस घटना को लेकर भाजपा नेताओं से लेकर संगठन और जन प्रतिनिधि मौन साधे बैठे रहे, मन्दसौर विधायक यशपालसिंह सिसोदिया ने जरूर बैंक मैनेजर दिलीप जैन और लीड बैंक मैनेजर सुधीर कुमार से बात की थी, लेकिन उसके बाद भी मैनेजर ने किसी की नहीं मानी। इस पूरे मामले में पूरी कांग्रेस चुप रही केवल कांग्रेस के युंका के लोकसभा अध्यक्ष सोमिल नाहटा ने जरूर लड़ाई लड़ी लेकिन फिर भी हल नहीं निकला।

वाह रे प्रशासन,करते रहो विकास:-
मन्दसौर का प्रशासन जो अपने आप को विकास का पर्याय बताने में कही पीछे नहीं रहा हैं, इस मानवीय मामले में उसकी भूमिका भी किसी शून्य से कम नहीं रही हैं। प्रशासन चाहता और सख्त मिजाजी दिखा पाता तो शायद कुछ हो जाता लेकिन प्रशासन केवल औपचारिकता निभाता रहा और वृद्ध को न्याय मिलने से पहले उनकी जान निकल गयी।
रिपोर्ट- @प्रमोद जैन




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