धनतेरस और दीपावली पर इस तरह कीजिए शंख की पूजा

समुद्र मंथन से निकले नौ प्रमुख रत्नों में से एक शंख को भी माना जाता है। मंथन में शंख महालक्ष्मी के साथ ही बाहर आया था। इसलिए यह लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है और इसी कारण भगवान विष्णु ने भी इसे धारण किया है। मां लक्ष्मी और विष्णु भगवान को प्रसन्न् करने के लिए इनकी पूजा में शंख का होना अत्यंत आवश्यक है। घर में शंख होने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है, लेकिन वर्ष में कुछ विशेष दिन होते हैं जिनमें शंख की पूजा करने से अप्रत्याशित रूप से लाभ प्राप्त होते हैं। ये विशेष दिन हैं धनतेरस और दीपावली। शंख मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं वामवर्ती, दक्षिणवर्ती और गणेश शंख। इनके कई उप प्रकार होते हैं, जिनमें सबसे प्रमुख और उच्च कोटि का विष्णु शंख को माना गया है। गोमुखी शंख, पांचजन्य शंख, अन्न्पूर्णा शंख, मोती शंख, हीरा शंख, टाइगर शंख प्रकार के भी शंख होते है।

कार्तिक माह के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि और अमावस्या के दिन विशेष संयोग और शुभ मुहूर्त में विष्णु शंख की पूजा की जाना चाहिए। शंख अनेक प्रकार के होते हैं लेकिन धनतेरस और दीपावली पर विष्णु शंख की पूजा और इसके द्वारा किए जाने वाले प्रयोगों से घर में कभी धन का अभाव नहीं होता। परिजनों की सुख-समृद्धि में बढ़ोतरी होती है। मान-सम्मान, प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होती है।

विष्णु शंख आकार में बड़ा और चिकना होता है। यह शुद्ध, श्वेत रंग का चमकदार चिकना होता है। इसके मुख पर धारियां होती हैं। विष्णु शंख वाम और दक्षिण दोनों ही प्रकार का हो सकता है और दोनों ही प्रकार के विष्णु शंख का प्रभाव एक समान होता है। इसके असली होने की पहचान यह है कि इसे एक स्वच्छ सफेद कपड़े पर रखकर चावल के ढेर के बीच में दबा दिया जाए तो यह कुछ देर में अपने आप ऊपर आ जाता है

धनतेरस और दीपावली पर विष्णु शंख की पूजा विशेष फलदायी होती है। इसका पूजन दो बार किया जाना चाहिए, सूर्योदय और सूर्यास्त के समय। पूजनकर्ता व्यक्ति सूर्योदय पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर अपने पूजा स्थान में बैठें। नियमित पूजा करने के बाद एक चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर उस पर सवा सौ ग्राम अक्षत की ढेरी बनाकर उस पर यज्ञोपवित स्थापित करें। एक पात्र में विष्णु शंख को पहले सामान्य जल, फिर कच्चे दूध और फिर गंगाजल से स्नान करवाएं। साफ कपड़े से पोछकर यज्ञोपवित पर शंख की स्थापना करें। केसर युक्त चंदन से पूजन करें। पीले पुष्प अर्पित करें और फिर विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। धूप, दीप, नैवेद्य के बाद कर्पूर से आरती करें। इसी तरह सायंकाल में भी पूजन संपन्न् करें।

  • घर में विष्णु शंख होना अपने आप में अत्यंत शुभकारी होता है।
  • विष्णु शंख की नियमित पूजा से धन संपत्ति में उत्तरोत्तर वृद्धि होती है।
  • बिगड़े हुए सभी कार्य विष्णु शंख की पूजा से बनने लगते हैं।
  • इसमें नकारात्मक शक्तियों को दूर करने की अद्भुत क्षमता होती है।
  • घर में नियमित शंख बजाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। शरीर स्वस्थ रहता है और दीर्घायु प्राप्त होती है।
  • विष्णु शंख के दर्शन पूजन से समस्त पापों का नाश होता है और लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
  • शत्रु परास्त होते हैं और सर्वत्र जीत हासिल होती है।

प्रकृति के अनुसार शंख के मुख्यत: तीन प्रकार बताए गए हैं। वामावर्ती शंख, दक्षिणावर्ती शंख और गणेश शंख। वामावर्ती शंख का प्रयोग सबसे ज्यादा होता है। इसका उपयोग पूजा अनुष्ठान और अन्य मांगलिक कार्यों के समय बजाने के लिए किया जाता है। इसे दोनों समय की आरती के बाद बजाया जाता है। दक्षिणावर्ती शंख को लक्ष्मी का साक्षात स्वरूप माना गया है। यह दुर्लभ किस्म का होता है। इसका फलक दायीं ओर खुलता है इसलिए इसे दक्षिणावर्ती शंख कहा जाता है। यह दो प्रकार का होता है स्त्री और पुरुष। यह शंख पूजा के काम आता है। इसे बजाया नहीं जाता। तीसरे प्रकार का शंख है गणेश शंख। यह पिरामिड की आकृति का होता है। घर में इसकी स्थापना और पूजा करने से कर्ज से मुक्ति मिलती है और दरिद्रता दूर होती है।