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मृत महिला को जिंदा करने 24 घंटे चला तंत्र-मंत्र का खेल

tantra mantra alive died Woman in Mandla Madhya Pradeshमंडला : मध्य प्रदेश के मंडला जिला चिकित्सालय में एक चमत्कार की आस में सुबह से लोग शव गृह की तरफ टकटकी लगाए हुए थे। लोगों को इन्तेजार था कि कब तांत्रिक आये और शव गृह के दरवाजे खुले। जिसके बाद तांत्रिक शव गृह में रखे एक महिला के शव को तंत्र-मंत्र क्रिया के जीवित कर देगा। लेकिन तांत्रिक तो नहीं आया उसने आने चेले को एक लकड़ी लेकर भेज दिया और उसे मृतिका के शरीर में रखने को कहा। चेले को बताया गया कि लकड़ी रखने के 2 घंटे बाद यदि लकड़ी की लम्बाई बढ़ गई तो तांत्रिक उसे जीवित करने आ जायेगा।

अंधविश्वाश  का यह खेल दिन भर चलता रहा और शव  रात से शव गृह में अपने पोस्ट मॉर्टम का इन्तिज़ार करता रहा। अस्पताल प्रबंधन और पुलिस दोनों को इस पूरे मामले की जानकारी थी लेकिन लगता है अन्धविश्वास के इस खेल को उनकी मौन स्वीकृति प्राप्त थी।

जिला चिकित्सालय में भीड़ सुबह से किसी चमत्कार की आस लगाए तांत्रिक का इन्तेजार कर रही थी। दरअसल नारायणगंज क्षेत्र के अहरवाड़ा गांव की 22 वर्षीय शिया बाई मार्को अरहर के खेत में काम कर रही थी तभी उसे साप ने काट लिया। उसे नारायणगंज स्वास्थ केंद्र ले जाया गया जहा से प्राथमिक उपचार के बाद उसे मंडला जिला चिकित्सालय लाया गया। यहीं उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजन इसे सामान्य मौत मानने को तैयार नहीं थे और उन्हें लग रहा था कि तंत्र क्रिया के जरिये उसे जिन्दा किया जा सकता है।

इसी चमत्कार की उम्मीद में जबलपुर से तांत्रिक को बुलाया गया। तांत्रिक ने तंत्र-मंत्र से सिद्ध एक लकड़ी लेकर अपने चेले अजय उइके को जिला चिकित्सालय भेजा। उससे कहा गया कि ये लकड़ी उसे मृतिका के शरीर में रखना है। यदि 2 घंटे बाद लकड़ी की लम्बाई बढ़ गई तो तांत्रिक उसे जीवित करने आ जायेगा। अपने गुरु के आदेश का पालन करते हुए चेले ने गुरु की दी हुई लकड़ी शव में रह भी दी और उस चमत्कारी लकड़ी के बढ़ने का इन्तिज़ार करने लगा। तांत्रिक के इस चेले का दावा है कि उसके गुरु ने इस तरह के कई मामले में मृतक को जिन्दा कर दिया है। मृतिका के परिजन इस पूरे खेल में शामिल रहे, उनकी माने तो ईश्वरीय चमत्कार की उम्मीद में उन्होंने आखरी प्रयास किया है।

इस पूरे मामले को लेकर स्वास्थ विभाग और अस्पताल प्रबंधन के बीच तल्खी भी सामने आ गई। इस घटना को लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ अधिकारी और सिविल सर्जन के बीच फ़ोन में तीखी बहस की बात भी सामने आई है। सिविल सर्जन आर के मेहरा का कहना था कि किसी भी मरीज की मौत के बाद पुलिस को इतला दी जाती है।

पुलिस जब शव परीक्षण के लिए प्रतिवेदन प्रस्तुत करती है तभी पोस्ट मॉर्टम होता है। रात में ही पुलिस को सर्प दंश से महिला की मृत्यु के बारे में सूचित कर दिया गया था लेकिन पुलिस ने अभी तक शव परीक्षण के लिए प्रतिवेदन ही प्रस्तुत नहीं किया। बिना शव परीक्षण के प्रतिवेदन प्राप्त हुए पोस्ट मॉर्टम नहीं किया जा सकता। शव गृह में तंत्र क्रिया के सवाल पर सिविल सर्जन का कहना था कि शव गृह पुलिस के अधीन होता है। शव गृह में बिना पुलिस की अनुमति के कोई कुछ नहीं कर सकता।

पर्दे के पीछे दिनभर से पीडित परिवार की तसल्ली का हवाला देते हुए तंत्र क्रिया को सफल बनाने में जुटी पुलिस मीडिया के सक्रिय होने के बाद पोस्ट मॉर्टम में विलंब के लिए पीडित पक्ष को दोषी ठहराते हुए तंत्र क्रिया की किसी भी जानकारी से इंकार करने लगा। अस्पताल चौकी प्रभारी दिलीप पवले का कहना है कि मृतिका का पति पश्चिम बंगाल में बीएसएफ में पदस्थ है परिजनों ने आग्रह किया था कि पति के आने तक पीएम न कराया जाये यही वजह है कि पोस्ट मॉर्टम के लिए पुलिस मृतिका के पति के आने का इन्तिज़ार कर रही है।

पर्दे के पीछे दिनभर से पीडित परिवार की तसल्ली का हवाला देते हुए तंत्र क्रिया को सफल बनाने में जुटी पुलिस मीडिया के सक्रिय होने के बाद पोस्ट मॉर्टम में विलंब के लिए पीडित पक्ष को दोषी ठहराते हुए तंत्र क्रिया की किसी भी जानकारी से इंकार करने लगा। अस्पताल चौकी प्रभारी दिलीप पवले का कहना है कि मृतिका का पति पश्चिम बंगाल में बीएसएफ में पदस्थ है परिजनों ने आग्रह किया था कि पति के आने तक पीएम न कराया जाये यही वजह है कि पोस्ट मॉर्टम के लिए पुलिस मृतिका के पति के आने का इन्तिज़ार कर रही है। रिपोर्ट -सैयद जावेद अली

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