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मोदी मंत्रिमंडल विस्तार से शिव के राज में भूचाल !

 नई दिल्ली – मंगलवार को मोदी कैबिनेट में हुए विस्तार ने एमपी की राजनीति और शिवराज के शासन में भूचाल मचा दिया है । बमुश्किल चार दिन पहले हुए शिवराज कैबिनट के विस्तार हुआ है जिसमे राज्य के दो कद्दावर नेताओं बाबूलाल गौर और सरताज सिंह से उनकी उम्र का हवाला देते हुए मंत्री पद से इस्तीफा मांग लिया गया था। लेकिन मंगलवार को जब मोदी कैबिनेट में नजमा हेपतुल्ला और कलराज मिश्र की छुट्टी नहीं हुई तो एमपी के इन दो नेताओं की त्यौरियां चढ़ गईं।

वहीं मोदी कैबिनेट के विस्तार पर मध्य प्रदेश कांग्रेस ने चुटकी लेते हुए पूछा कि जिस तरह शिवराज कैबिनेट से उम्रदराज बताकर बाबूलाल गौर और सरताज सिंह को हटाया गया वो फार्मूला केन्द्र ने क्यों नहीं अपनाया? प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता केके मिश्रा ने आरोप लगाया है कि सीएम शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के दोनों मंत्रियों को हटाने के लिए उम्रदराज होने का सहारा जरूर लिया है, लेकिन सीएम शिवराज सिंह ने बाबूलाल गौर और सरताज सिंह को व्यक्तिगत कुंठा और राजनैतिक असुरक्षा की भावना कि चलते हटाया है ना कि उम्रदराज होने के कारण। बीजेपी ने भले ही अपने दो मंत्रियों को उम्र का हवाला देकर मंत्रीमंडल से निकाल दिया हो लेकिन कांग्रेस ने मंगलवार को उसके पूर्व विधायक और वरिष्ठ नेता हजारीलाल रघुवंशी को उनके घर जाकर 87वें जन्मदिन की बधाई दी और सम्मान किया।

दरअसल, 30 जून को भोपाल में शिवराज कैबिनेट का विस्तार हुआ था। लेकिन शपथ ग्रहण से पहले ही मध्य प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान खुद बाबूलाल गौर और सरताज सिंह के घर पहुंचे थे और इस्तीफे का फरमान सुनाया था। इस्तीफे के पीछे आलाकमान की वो नीति बताई गई जिसके मुताबिक 75 साल से उपर के उम्र वालों को मंत्री पद नहीं दिया जाएगा। हालांकि इन दोनों मंत्रियों से इस्तीफा लेने में बीजेपी के पसीने छूट गए थे। आखिरकार दोनों को पार्टी के फरमान के सामने झुकना ही पड़ा था।

इसके साथ ही सरताज ने साफ कर दिया कि वो इस मसले पर चुप नहीं बैठेंगे और पार्टी आलाकमान से सवाल पूछेंगे कि क्या उन्हें हटाने का फैसला केंद्र से हुआ या फिर मध्य प्रदेश से। उन्होने इसे पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ता के साथ धोखा बताया।

बात यदि बाबूलाल गौर की करें तो वो इस मामले पर ज्यादा कुछ बोलने से बचते दिखे। आपको बता दें कि गौर 10 बार विधानसभा का चुनाव जीत चुके हैं और एमपी के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक माने जाते हैं।

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