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सुपर स्टार पत्रकार , राजनीति में फ्लॉप !

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मोदी ने ऐतिहासिक जीत प्राप्त की है, लेकिन इसी लहर में तमाम पत्रकारों को मुंह की खानी पड़ी, जिनमें से ज्यादातर पत्रकार आम आदमी पार्टी से जुड़े हैं। आम आदमी पार्टी ने वैसे भी ना केवल दिल्ली विधानसभा से बल्कि लोकसभा इलेक्शंस में कई पत्रकारों को टिकट दिया था। विधानसभा चुनावों में तो मनीष सिसौदिया और राखी बिरला जैसे लोगों को कामयाबी मिली, लेकिन लोकसभा चुनावों में किसी के भी सर जीत का सेहरा नहीं बंधा। वैसे विधानसभा चुनावों में भी शाजिया इल्मी जीत नहीं पाई थी।

पंद्रहवीं लोकसभा चुनावों के लिए आम आदमी पार्टी ने आशुतोष, आशीष खेतान, जरनैल सिंह और राखी बिरला को दिल्ली से टिकट दिया तो शाजिया इल्मी को गाजियाबाद सीट से लड़ाया गया। यानी दिल्ली से चार पूर्व पत्रकारों को दिल्ली की लोकसभा सीटों से मौका दिया गया, जिसमें से सारे कैंडिडेट्स दूसरे स्थान पर रहे। चैनल आईबीएन7 के पूर्व मैनेजिंग एडीटर आशुतोष ने ठीक चुनावों से पहले अपने चैनल से इस्तीफा दिया था, उनको आप पार्टी का प्रवक्ता बना दिया गया और बाद में चांदनी चौक से सिब्बल के सामने पार्टी की टिकट दे दी गई, लेकिन सारा खेल बीजेपी ने हर्षवर्धन के नाम का ऐलान करके कर दिया। आशुतोष को यूं तो आप के सारे उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा वोट मिले तकरीबन तीन लाख, लेकिन फिर भी उन्हें एक लाख पैंतीस हजार वोटों से हार का मुंह देखना पड़ा।

तहलका और आज तक जैसे संस्थानों में काम कर चुके और अपने स्नूपगेट जैसे केसेज में खोजी पत्रकारिता के लिए मशहूर आशीष खेतान भी अजय माकन और मीनाक्षी लेखी के सामने खड़े थे और तकरीबन दो लाख नब्बे हजार वोट भी लेकर आए लेकिन लेखी ने फिर भी उन्हें डेढ़ लाख वोट से हरा दिया। जबकि वो उस नई दिल्ली सीट से खड़े थे, जिससे विधानसभा चुनावों के दौरान अरविंद केजरीवाल ने शीला दीक्षित को हराया था।

यूं तो केजरीवाल ने विधानसभा चुनावों के दौरान कहा था कि किसी एमएलए को एमपी के लिए टिकट नहीं दी जाएगी। फिर भी राखी बिरला को नॉर्थ वेस्ट दिल्ली से पहले से घोषित उम्मीदवार महेन्द्र सिंह का टिकट काटकर टिकट दिया। जैन टीवी में पत्रकार रह चुकीं राखी बिरला को केजरावाल ने अपनी 49 दिन की सरकार में वूमेन एंड चाइल्ड सोशल वेलफेयर मिनिस्टर बनाया गया था। विधानसभा चुनावों में राजकुमार चौहान जैसे कद्दावर को हराने वाली राखी बिरला को हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए दलित नेता उदित राज ने एक लाख छह हजार वोटों से हरा दिया। तो दिल्ली से ही चौथे आप उम्मीदवार दिल्ली के दैनिक जागरण के नेशनल ब्यूरो में काम कर चुके जरनैल सिंह थे, जो कभी पी चिदंबरम पर जूता फेंकने की वजह से प्रसिद्ध हैं। उनको वेस्ट दिल्ली से खड़ा किया गया, उनको साहब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा ने दो लाख अड़सठ हजार वोटों से हरा दिया।

एनसीआर में भी टीवी की दुनियां से जुड़े दो चेहरों को टिकट आप पार्टी ने दिया था। गाजियाबाद से एबीपी न्यूज की पूर्व एंकर शाजिया इल्मी को और न्यूज चैनल्स पर चुनाव एक्सपर्ट के तौर पर बैठने वाले योगेन्द्र यादव को गुड़गांव से। दोनों की ही जमानत जब्त हो गई। शाजिया पांचवी पोजीशन पर रहीं, बमुश्किल उन्हें एक लाख वोट मिले, जबकि पहली पोजीशन पर रहने वाले वीके सिंह को सात लाख से भी ज्यादा वोट मिले। तो वहीं गुड़गांव से योगेन्द्र यादव जो टीवी पर दूसरों के जीतते और हारने की वजह का विश्लेषण सालों से करते आए हैं, को चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा। पहली पोजीशन पर बीजेपी के राव इंद्रजीत सिंह आए।

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प्रिंट से दैनिक जागरण के जरनैल सिंह के अलावा चंदन मित्रा और प्रगति मेहता को भी टिकट मिला था। पायोनीयर के संपादक चंदन मित्रा बीजेपी की टिकट पर पश्चिम बंगाल के हुगली से चुनाव मैदान में थे, मोदी ने उनके लिए चुनावी रैली भी की लेकिन टीएमसी की रत्ना डे उन्हें मात खानी पड़ी। तो वहीं लालू यादव ने हिन्दुस्तान अखबार के मुजफ्फरपुर संस्करण में जॉइंट न्यूज एडिटर की पोस्ट पर काम कर रहे प्रगति मेहता को मुंगेर की सीट से टिकट दिया। लेकिन उनको भी एलजेपी की वीना देवी के हाथों हार का मुंह देखना पड़ा। -समाचार4मीडिया

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