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आबकारी विभाग और अवैध शराब का कारोबार

illegal liquor businessबालाघाट – जिले में अवैध शराब का कारोबार जिस तरह से चल रहा है। उसे देखकर ऐसा नही लगता है। कि आबकारी विभाग जैसे कोई सरकारी कार्यालय भी बालाघाट में है।अवैध शराब की अपनी सहभागिता में लिप्त यह विभाग उन दिनो ही सक्रिय दिखता है। जब शराब का ठेका दिया जाना होता है। इसके बाद इस विभाग की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है।

जिस राजस्व को लेकर आबकारी विभाग अपनी रोजी रोटी चला रहा है। परंतु कार्यवाही को लेकर उदासीनता दिखा रहा है।आबकारी विभाग को जागरूक आम जनता के द्वारा शिकायत और जानकारी दी जाती है। परंतु आबकारी विभाग अपनी निरंकुश कार्यवाही के चलते अस्तित्वहीन बना रहता है। ज्यादातर अवैश शराब की कार्यवाही की धरपकड़ पुलिस विभाग व प्रशासनिक विभाग के द्वारा कि जाती पंरतु आबकारी विभाग हाथ पर हाथ धरे तमाशबीन की तरह काम कर रहा है। इस विभाग का न तो कभी जनता को सहयोग मिलता है। और न ही जनसेवा की भावना इस विभाग के अधिकारियो को सिखाई गई कानून नियामों को ताक में रखकर अपने पद और विभाग का सिर्फ इस्तेमाल अपनी निजी संपत्ति को सौ गुना करने के ही आबकारी विभाग खासी दिलचस्पी रख रहा है। अन्य विभागों का सहयोग प्रत्यक्ष रूप में जाना तो जाता है। परंतु आबकारी विभाग जैसे न होकर कोई मंत्रालय से बढ़कर विभाग के अधिकारी कर्मचारी अपने आप को समझते है।

इनकी नैतिक जिम्मेदारी कभी देखने को नहीं मिलती है। ठेकेदारों के आगे पीछे घुमकर अपना समय निकालने वाला विभाग जनसेवा से बेहद दूर हो चुका है। जनसुनवाई के एक भी मामले को भी न हल करने वाला विभाग सिर्फ पुलिस और प्रशासन की उंगली थामे चल रहा है। और आम जनता की गाढ़ी कमाई का दूरूपयोग कर अवैध शराब विक्रय को बढ़ावा दे रहा है।

खैरलांजी में गत दिनों देशी शराब की दुकान में विदेशी शराब बेचने के अपराध में की गई कार्यवाही पुलिस व प्रशानिक गतिविधियों का परिणाम रहा अगर यह कार्यवाही आबकारी विभाग को करनी होती तो वे कभी नही करते क्योंकि आबकारी विभाग को अच्छी तरह मालुम है। कि अवैध शराब का विक्रय कहां कहां किया जा रहा है। परंतु आबकारी विभाग को जानकारी होने बावजूद भी पंगु बना हुआ है।

इस विभाग का होना या ना होना किसी को फर्क नही पडता है। जबकी सारी गतिविधियां अन्य विभाग करते है। तो आबकारी विभाग की जरूरत क्या रह जाती है। पुलिस अवैध शराब की धरपकड़ कर रही है। जितने मामले पुलिस ने अवैध शराब के अपनी ओर से कि गई कार्यवाही एक माह में दर्ज किये उतने मामले कभी भी आबकारी विभाग ने अपने दस सालो के रिकार्ड में दर्ज नही किये होगे। खैरलाजी में की गई कार्यवाही में अगर पुलिस और प्रशासन समय पर नहीं पहुंचता तो आबकारी विभाग कभी भी वहां जानकारी होने के बाद भी नही पहुचता। अपनी लापरवाही जगजाहिर करना वाला विभाग सरकारी धन का नुकसान करवा तो रहा है। वहीं अपराधिक कृत्य करने वालों को पनाह दे रहा है। ऐसे विभाग को किसी भी विभाग में विलय कर आबकारी विभाग को समाप्त कर देना चाहिये।

जिससे आम जनता को कोई फायदा न हो ऐसे विभाग का रहना कोई औचित्य नही है। कटंगी,वारासिवनी,लालबर्रा, तिरोड़ी आदि ऐसे स्थान है। जहां पर शराब ठेकेदार नियत दुकानों के अलावा गैरकानूनी रूप से होटलो,पान ठेलो ढाबो में देशी विदेशी शराब धड़ल्ले से बेच रहै। है। आबकारी विभाग को जानकारी देने के बाद उनके द्वारा कहा जाता है। की हमारी जिम्मेदारी नही है। पुलिस और प्रशसन कार्यवाही करेगा। विभाग की क्या जिम्मेदारी शासन को स्पष्ट करना होगा ताकि आम जनता को इस विभाग का फायदा मिल सके।

 

 

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