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फग्गन सिंह कुलस्ते दूसरी बार केंद्रीय मंत्री बने, मंडला में जश्न

Faggan Singh Kulasteमंडला- मध्य प्रदेश के मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते को मोदी मंत्री मंडल में स्थान मिलने पर मंडला लिक सभा क्षेत्र में जश्न का माहौल है। कुलस्ते के मंत्री बनने से भाजपा कार्यकर्ताओं की ख़ुशी का ठिकाना नहीं है। भाजपा कार्यकर्ताओं ने स्थानीय चिलमन चौक में आतिशबाजी कर एक दूसरे को मिठाई खिलाकर अपनी ख़ुशी का इजहार किया। कुलस्ते के मंत्री बनने से उनके परिवार वालों की ख़ुशी का भी ठिकाना नहीं है।

18 मई 1959 को जन्मे फग्गन सिंह कुलस्ते वर्तमान में भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी है। कुलस्ते पहली बार 1996 में सांसद बने थे। उसके बाद वे लगातार 4 बार मंडला के सांसद रहे। इस दौरान ने प्रधान मंत्री अटल बिहारी बाजपेई की सरकार में मंत्री भी रहे। 2009 में कुलस्ते कांग्रेस के बसोरी सिंह मसराम से चुनाव हार गए थे। कुलस्ते भले ही चुनाव हार गए थे लेकिन पार्टी ने उन्हें राज्य सभा भेज दिया था। राज्य सभा सांसद होते हुए उन्होंने 2014 में फिर मंडला लोकसभा से एक लाख से अधिक वोट से जीत दर्ज कर लोक सभा पहुंचे। पांचवी बार लोक सभा पहुँचने पर उम्मीद थी की उन्हें मोदी के पहले ही मंत्री मंडल में जगह मिलेगी लेकिन ऐसा नहीं हो सका जिससे जिले की जनता को मायूसी हुई।

माना जा रहा था कि लालकृष्ण आडवाणी गुट के होने और मुख्य मंत्री शिवराज चौहान से अनबन के चलते उन्हें मंत्री मंडल में जगह नहीं मिल सकी थी। अब मोदी मंत्री मंडला के बहुप्रीतिक्षित मंत्री मंडल विस्तार में जगह मिलने से पूरे संसदीय क्षेत्र में ख़ुशी की लहार है। कुलस्ते के मंत्री बनने से मंडला लोकसभा क्षेत्र के विकास के द्वार तो खुलेंगे ही साथ ही वे आदिवासियों को भाजपा के खेमे में लाने में भी कामयाब होंगे।

हाल ही में शिवराज कैबिनेट के विस्तार में उनके छोटे भाई विधायक रामप्यारे कुलस्ते को जगह नहीं मिलने से उम्मीद की जा रही थी की फग्गन सिंह को केंद्र में जगह देने के लिए रामप्यारे को मंत्री नहीं बनाया गया। कुछ लोग कुलस्ते को चुका हुआ भी मानने लगे थे लेकिन केंद्रीय मंत्री बनने से उनके राजनीतिक भविष्य को नई ऊर्जा मिल गई है।

एमए, बीएड और एलएलबी तक शिक्षित फग्गन सिंह कुलस्ते का शुमार भाजपा के बड़े और दिग्गज नेताओं में होता है। भाजपा में वो आदिवासियों का चेहरा माने जाते है जिन्होंने कांग्रेस के परम्परागत आदिवासी वोट बैंक को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, गोवा सहित पूरे देश में आदिवासियों को भाजपा से जोड़ा। सादगी से जीवन व्यतीत करने वाले कुलस्ते सौम्य, सरल और मृदुभाषी है। हमेशा उन्हें कार्यकर्ताओं के बीच देखा जा सकता है। इनके जीवन से कुछ दाग भी जुड़े है दिसंबर 2005 में एमपीएलएडीएस के लिए कमीशन लेते एक चैनल ने अपने स्टिंग ऑपरेशन में कैद कर लिया था। 22 जुलाई 2008 में यूपीए 1 के दौर में इन्होंने अपने 2 अन्य सहयोगियों के साथ लोकसभा में नोटों के बंडल लहराकर यूपीए पर खरीद फरोख्त का आरोप लगाकर पूरे देश में चर्चा में आ गए थे। इसी कॅश फॉर वोट मामले में इन्हे 2 महीने तिहाड़ जेल की हवा भी खानी पड़ी थी। हालाँकि बाद में कोर्ट ने उन्हें इस मामले से बरी कर दिया।

फग्गन सिंह कुलस्ते ने करीब 2 बार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की भी दावेदारी की लेकिन बात नहीं बन सकी। एक बार तो आखरी वक़्त पर उनका नाम हटा दिया गया। केंद्रीय संगठन में भी जगह नहीं मिलने पर कुलस्ते ने अपनी नारजगी का इजहार किया था। भाजपा अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाये जाने पर उन्होंने यह कहते हुए नाराज़गी जताई थी कि इस पद के लिए किसी अन्य नेता को जगह दी जाए। वे यह भूमि पहले भी 2 बार निभा चुके है। हालांकि आखिर में वो मान गए और पद स्वीकार कर लिया। कुलस्ते के छोटे भाई राम प्यारे कुलस्ते निवास विधान सभा से लगातार तीसरी बार विधायक है।

कुलस्ते के मंत्री बनने पर उनके परिवार के लोग भी काफी खुश है। उनकी बहन फगनों पट्टा का कहना है कि भाई का संघर्ष रंग लाया। कल शाम ही उन्हें उनके मंत्री बनने की खबर मिल गई थी। वो बताती है कि कुलस्ते अधिकांश समय पार्टी और समाज के काम में व्यस्त रहते है। वे परिवार वालों को बिलकुल भी समय नहीं दे पाते लेकिन परिवार वालों को इसकी कोई नाराज़गी भी नहीं है क्योंकि सभी उनकी व्यस्तता को समझते है। वे हमेशा मंडला और मध्य प्रदेश के विकास को लेकर चिंतित और प्रयासरत रहते है।

रिपोर्ट- @सैयद जावेद अली

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