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झूठी शिकायत की तो पति तलाक लेने का हकदार

Four new judges appointed to the Supreme Courtनई दिल्ली [ TNN ] अगर किसी महिला की अपने पति और ससुराल वालों के खिलाफ आईपीसी की धारा 498 ए के तहत दर्ज क्रूरता की शिकायत झूठी पाई जाती है तो पति तलाक लेने का हकदार है। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिया है।

के.श्रीनिवास और के.सुनीता को शादी भंग करने की अनुमति देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा,हमने स्पष्टतया यह पाया है कि प्रतिवादी की पत्नी ने झूठी आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी। इस तरह की एक शिकायत भी वैवाहिक क्रूरता को स्थापित करने के लिए पर्याप्त है। इसके अनुसार हम पक्षकारों की शादी को भंग करते हैं। हैदराबाद की अदालत ने 30 जून 2000 में पत्नी की ओर से पति और ससुराल वालों के खिलाफ लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया था।

30 दिसंबर 1999 को अन्य फैमिली कोर्ट ने क्रूरता के आधार पर पति को तलाक लेने की अनुमित प्रदान की थी लेकिन हाईकोर्ट ने महिला की अपील पर तलाक की डिक्री को अलग कर लिया था। 30 जून 1995 को पत्नी ने वैवाहिक घर छोड़कर चली गई थी। इसके बाद 14 जुलाई 1995 को पति नेक्रूरता के आधार पर तलाक के लिए आवेदन कर दिया था। इस पर पत्नी ने पति और ससुराल पक्ष के सात लोगों के खिलाफ दहेज रोकथाम अधिनियम और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज करा दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर पति और ससुराल पक्ष के अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया। सभी को जेल भेज दिया गया।

पति और उसके अन्य रिश्तेदारों के खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायत और महिला के पुुलिस को दिए बयान पर न्यायाधीश विक्रमजीत सेन और न्यायाधीश पीसी पंत ने कहा कि इस बात के स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि आपराधिक शिकायत सोच विचार कर दर्ज कराई गई थी जो अवास्तविक है। हम हाईकोर्ट के इस विचार की पुष्टि करते हैं कि आपराधिक शिकायत बदनीयती से दर्ज कराई गई थी।

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