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देशभर से पहुंचे ‘दिलवाले’ सीख रहे अपने दिल को तंदुरुस्त बनाने के गुर

आबू रोड : स्वस्थ मन तो तन भी स्वस्थ। इसी संकल्पना को लेकर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के मेडिकल विंग द्वारा थ्री डायमेंशल हेल्थ केयर प्रोग्राम शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य हृदय रोगियों को बिना बायपास सर्जरी और ऑपरेशन के ठीक करना है। 1998 में शुरू किए गए इस थ्रीडी प्रोग्राम में प्रशिक्षण लेकर अब तक करीब सात हजार से अधिक हृदय रोगी ठीक हो चुके हैं। आज ये सभी सामान्य लोगों की तरह जिंदगी जी रहे हैं।

मनमोहिनी वन ऑडिटोरियम में 138वें थ्रीडी हेल्थ केयर का प्रशिक्षण 1 मार्च से शुरू हुआ है जो 7 मार्च तक चलेगा। रविवार को सभी रोगियों को बेहतर जीवनशैली के बारे में बताया गया। इस सात दिनों में हृदय रोगियों को मन, हृदय और शरीर को स्वस्थ रखने के नुस्खे विषय विशेषज्ञों बताए जा रहे हैं। इनमें देशभर से परिजन के साथ आए 49 से अधिक हार्ट के मरीज और डॉक्टर्स शामिल हैं।

सबसे बड़ी बात पूरे प्रशिक्षण के दौरान और मरीज के ठीक होने तक इन सभी को दिलवाले के नाम से पुकारा जाता है। यही कारण है कि मेडिटेशन, संतुलित व सात्विक आहार, व्यायाम और प्रशिक्षण से फिर से हजारों हृदय रोगियों का दिल फिर से सामान्य लोगों की तरह धड़कने लगा है।

सैकड़ों ऐसे लोग हैं जिन्हें हार्ट में 90 फीसदी तक ब्लॉकेज हो चुके थे और डॉक्टर्स ने बायपास सर्जरी कराने की सलाह दी थी लेकिन थ्री डायमेंशल हेल्थ केयर प्रोग्राम (हेल्दी माइंड, हार्ट एवं बॉडी) में प्रशिक्षण लेने के बाद आज वह स्वस्थ जीवनशैली जी रहे हैं। साथ ही बायपास की भी जरूरत नहीं पड़ी और ब्लॉकेज भी सामान्य हो गए हैं।

95 फीसदी बीमारियों का कारण मन
कैड प्रोजेक्ट के को-ऑर्डिनेटर व वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सतीश गुप्ता ने बताया कि विभिन्न शोध में पाया गया है कि 95 फीसदी बीमारियों का कारण हमारा मन है। मेडिकल साइंस ने शरीर की बीमारियों का इलाज तो खोज लिया है लेकिन मन की बीमारियों का अभी तक कोई इलाज संभव नहीं हो पाया है। सिर्फ मेडिटेशन से ही मन के सभी प्रकार के रोगों का उपचार संभव है। सबसे मन में तनाव उत्पन्न होता है, जिससे शरीर में बीमारी आती है। मन की बीमारियों जैसे- जल्दबाजी, चिंता, गुस्सा, डर (डिप्रेशन), हाईपरटेंशन, जल्दी में रहना, असंतोष, नकारात्मक विचार से मन बीमार हो जाता है। जैसे मन में विचार होते हैं वैसा ही इनका शरीर पर प्रभाव पड़ता है। धीरे-धीरे यह शरीर में विकृति (बीमारी) का कारण बनते हैं। इन सभी मानसिक विकृतियों का मुख्य कारण गलत जीवनशैली है।

लोगों का भोजन पर तय होता है मूड…
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. गुप्ता ने बताया कि शोध में पाया गया है कि यदि व्यक्ति को भोजन अच्छा मिले तो मन और दिल खुश हो जाता है। भोजन से हमारा मूड बदल जाता है। जैसा हमारा मूड होता है वैसा ही हम भोजन करते हैं। जब हम कड़वाहट महसूस करते हैं तो उसे दूर करने के लिए मीठा खाकर दूर करते हैं। संबंधों में खुश्की आने पर तला खाने, बोरिंग महसूस करते करने पर चटपटा खाने का मन करता है। वहीं मेडिटेशन हमें सिखाता है कि कैसे हम मन की सभी अवस्थाओं में स्थिर रह सकें।
ऐसे कार्य करता है हमारा हृदय…
प्रशिक्षण में विशेषज्ञों ने बताया कि हमारा हृदय पंप की तरह है जो एक मिनट में 70-80 बार और एक दिन में लगभग एक लाख बार धड़कता है। शरीर में एक मिनट में लगभग 60 हजार मील (पूरी पृथ्वी का दो बार चक्कर लगाने के बराबर) लंबी रक्तवाहिनियों में खून पहुंचाता है। इसका वजन 250 ग्राम होता है। हृदय को प्रत्येक मिनट में काम करने के लिए 250 ग्राम खून की जरूरत होती है। इसके दो भाग होते हैं- बायां भाग और दायां भाग। खून के द्वारा ही शरीर के प्रत्येक अंग को कैल्शियम, मिनरल्स, विटामिन और सभी पोषक तत्व मिलते हैं। एक सेकंड के अंदर ही हार्ट फैलता और सिकुड़ता है। इसमें कुछ सेकंड के लिए हृदय आराम करता है, वहीं जब हम तनाव में हों तो वह आराम हृदय को नहीं मिल पाता है जो हार्ट अटैक का कारण है। दिल (हृदय) प्यार और शरीर के सुरक्षा का केंद्रबिंदु है।

आज 15 फीसदी लोगों को हार्ट की बीमारी
देश के चार महानगर दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई में वर्ष 2015 में किए गए सर्वे में पाया गया कि 100 में से 15 लोगों को हार्ट की बीमारी है, जबकि 1960 में सौ लोगों में से सिर्फ एक व्यक्ति को ही हार्ट की बीमारी थी। वहीं 10 फीसदी को डायबिटीज, 20 फीसदी को हड्डियों की तकलीफ, 5 फीसदी को कैंसर, 5 फीसदी थॉयराइड से ग्रस्त और 40 फीसदी लोग ओवरवेट से ग्रस्त हैं। 30 फीसदी को हाई ब्लडप्रेशर, 20 फीसदी को तनाव है तो 10 फीसदी नींद की दवाई लेते हैं। इस तरह 100 लोगों को 200 बीमारियां हैं। एक आदमी को कम से कम दो बीमारी हैं।
ये हैं बीमारियों का मुख्य कारण…
सभी तरह की शारीरिक और मानसिक बीमारियों की जड़ तनाव है। इसके अलावा गलत खानपान, देर से सोना और देर से उठना, नशे की लत, चाय-कॉफी, अनियमित दिनचर्या, वर्क लोड, चिंता, डर, दु:ख आदि कारण भी सामने आए हैं।

इन मरीजों का हृदय फिर से धड़कने लगा…
सभी ब्लॉकेज हो गए सामान्य
वर्ष2002 में पहली बार अटैक आया। दिल्ली में एंजियोग्राफी कराई तो हार्ट में दो ब्लॉकेज ९० फीसदी, एक 70 फीसदी और एक 50 फीसदी पाया गया। डॉक्टर्स ने बायपास कराने की सलाह दी। इस दौरान थ्रीडी ट्रेनिंग प्रोग्राम को पता चला तो यहां ट्रेनिंग ली। यहां दिए गए प्रशिक्षण के अनुसार नियमित मेडिटेशन, सात्विक भोजन, व्यायाम और दवाई से सभी ब्लॉकेज सामान्य हो गए हैं। आज सामान्य लोगों की तरह जिंदगी जी रहा हूं।

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