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अमेरिका – पाकिस्तान में F-16 डील पर तकरार

Pakistan's new foreign policy chief Aziz speaks during a news conference in Kabulइस्लामाबाद- अमेरिका और पाकिस्तान के बीच F-16 लड़ाकू विमान खरीदी पर तकरार साफ दिख रही है। अमेरिका ने पाकिस्तान को साफ कह दिया था है कि पाकिस्तान मई तक फंड की व्यवस्था करे, बिना फंड एफ-16 लड़ाकू विमान नहीं दिए जाएंगे। इसके जवाब में पाकिस्तान के रुख में भी कड़ाई आ गई है, प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने कहा कि पाकिस्तान अब लड़ाकू विमान कहीं और से खरीद लेगा।

पाकिस्तान का कहना है कि अब अमेरिका का रुख डील करने जैसा है। अजीज ने कहा कि बिना सब्सिडी के पाकिस्तान का डील तक पहुंच पाना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि बिना सब्सिडी के पाक को इसके लिए ढाई गुना ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। अजीज ने कहा कि एफ-16 पाकिस्तान के लिए जरूरी थे क्योंकि इनका इस्तेमाल आतंक विरोध अभियान में होना था। जैसा JF-17 के लिए किया जाता है। JF-17 पाकिस्तान वायुसेना की रीढ़ की हड्डी है, इसे चीन और पाकिस्तान ने मिलकर डेवलप किया था।

अमेरिका के 70 करोड़ डॉलर की अनुमानित लागत के आठ एफ-16 लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए पाकिस्तान को मई तक का समय दिया था। इससे पहले ओबामा प्रशासन ने पाकिस्तान से कहा था कि उसे इन लड़ाकू विमानों को खरीदने के लिए अपने राष्ट्रीय फंड को पेश करना चाहिए।

अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने बताया कि पाकिस्तानी नेतृत्व को यह बता दिया है कि कांग्रेस के अहम सदस्यों ने यह स्पष्ट किया है कि उन्हें पाकिस्तान को इन विमानों की बिक्री के लिए विदेशी सैन्य वित्तपोषण – अमेरिकी करदाताओं के धन – का इस्तेमाल किए जाने पर आपत्ति है इसलिए पाकिस्तान को ये विमान खरीदने के लिए ‘‘राष्ट्रीय फंड पेश करने चाहिए।’’ सीनेटरों ने कहा कि पाकिस्तान ने हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की है, ऐसे में वे पाकिस्तान को एफ-16 विमान देने के लिए ओबामा प्रशासन को करदाताओं के धन का इस्तेमाल नहीं करने देंगे। एफ-16 की बिक्री संबंधी अधिसूचना कांग्रेस को 11 फरवरी को दी गई थी।

विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को 70 करोड़ डॉलर की अनुमानित लागत पर आठ लड़ाकू विमान बेचने के अपने विचार के बारे में कांग्रेस को 11 फरवरी को सूचित किया था। भारत सरकार ने इस कदम का विरोध किया था और उसने इस मामले में अपना विरोध दर्ज कराने के लिए भारत में अमेरिका के राजदूत रिचर्ड वर्मा को तलब किया था।
शक्तिशाली सीनेट फॉरेन रिलेशंस कमेटी के अध्यक्ष एवं सीनेटर बॉब कॉर्कर के नेतृत्व में शीर्ष अमेरिकी सांसदों ने इस बिक्री पर रोक लगाते हुए कहा कि पाकिस्तान ने आतंकवादी संगठनों खासकर हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ पर्याप्त कदम नहीं उठाया और वह अब भी आतंकवादियों के लिए पनाहगाह बना हुआ हैं। ऐसे में वे पाकिस्तान को लड़ाकू विमान बेचने के लिए ओबामा प्रशासन को अमेरिकी करदाताओं के धन का इस्तेमाल नहीं करने देंगे।

शीर्ष अमेरिकी सांसदों ने पिछले सप्ताह कांग्रेस की सुनवाई में ओबामा प्रशासन से खुलकर कहा था कि उन्हें इस बात की आशंका है कि पाकिस्तान इन एफ-16 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल आतंकवाद के खिलाफ नहीं बल्कि भारत के खिलाफ करेगा।

हालांकि अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान के लिए विशेष प्रतिनिधि और पाकिस्तान सरकार ने कहा था कि एफ-16 आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अहम हथियार है और उन्होंने कांग्रेस से यह रोक हटाने की अपील की थी लेकिन सांसद अपनी बात पर अड़े रहे और उन्होंने ओबामा प्रशासन से कहा कि जब तक पाकिस्तान हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता तब तक यह रोक नहीं हटाई जाएगी।

हालांकि एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने अपना नाम नहीं उजागर करने की शर्त पर बताया कि जैसा कि अमेरिका ने अब कहा है, उस पूरी कीमत पर पाकिस्तान की ओर से एफ-16 विमान खरीदे जाने की संभावना नहीं है।

इससे पहले पाकिस्तान को इन विमानों को खरीदने के लिए केवल 27 करोड़ डॉलर का भुगतान करना था।
अधिकारियों ने बताया कि आठ एफ-16 विमानों का अमेरिकी प्रस्ताव भले ही कागजों पर बना रह सकता है लेकिन यदि पाकिस्तान इन्हें नहीं खरीदने का फैसला करता है तो इसमें लंबा अल्पविराम लग सकता है और इसकी कीमत बढ़ सकती है। [एजेंसी]

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