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मुश्किल में मन,पूर्व प्रधानमंत्री को आरोपी के तौर पर समन

Manmohan-Singhनई दिल्ली – कोयला घोटाले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। सीबीआई के स्पेशल कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आरोपी के तौर पर समन किया। जिस समय कोयला घोटाला हुआ था उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री के पास कोयला मंत्रालय का भी प्रभार था। मनमोहन सिंह के अलावा उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला, पूर्व कोयला सचिव पी सी पारेख और तीन अन्य को भी आरोपी के तौर पर समन किया गया। मनमोहन सिंह ने समन पर प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि कानूनी प्रक्रिया से गुजरने के लिए तैयार हूं।

सीबीआई के स्पेशल भरत पराशर ने आईपीसी की धाराओं 120 बी (आपराधिक साजिश), 409 (किसी लोकसेवक, बैंकर, व्यापारी या एजेंट द्वारा आपराधिक विश्वासघात) और भ्रष्टाचार रोकथाम कानून (पीसीए) के प्रावधानों के तहत छह आरोपियों को कथित अपराधों के लिए समन किया है। इन तीनों के अलावा अदालत ने मामले में हिंडाल्को, इसके अधिकारियों शुभेंदु अमिताभ और डी भट्टाचार्य को भी आरोपी के तौर पर समन किया। दोषी ठहराए जाने पर आरोपियों को अधिकतम आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।

वर्ष 2005 में जब बिड़ला की कंपनी हिंडाल्को को ओडिशा के तालाबीरा द्वितीय और तृतीय में कोयला ब्लॉक आवंटित किए गए थे, तब कोयला मंत्रालय का प्रभार पूर्व प्रधानमंत्री के पास था। दिसंबर में सीबीआई के स्पेशल कोर्ट ने इस मामले में जांच एजेंसी की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया था और जांच की जरूरत पर बल देते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री  का बयान दर्ज करने का निर्देश दिया था।

इससे पहले 25 नवंबर को सुनवाई के दौरान स्पेशल सीबीआई जज भरत पाराशर ने सीबीआई से सवाल किया था कि उसने कोयला घोटाले के मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से पूछताछ क्यों नहीं की, जबकि हिंडाल्को को कोल ब्लॉक आवंटित किए जाने के वक्त 2005-09 के दौरान सिंह ही कोयला मंत्री भी थे।

इस पर जांच अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में पीएम ऑफिस के अधिकारियों टीकेए नायर और जावेद उस्मानी से पूछताछ की गई थी। उनके बयानों के आधार पर तत्कालीन कोयला मंत्री का बयान लेने की जरूरत महसूस नहीं हुई। इसके बाद कोर्ट ने जानना चाहा कि क्या साफ तस्वीर पेश करने के लिए तत्कालीन कोयला मंत्री बयान जरूरी नहीं था? इस पर सीबीआई ने साफ किया कि उसे मनमोहन सिंह से पूछताछ की इजाजत ही नहीं दी गई थी।

इससे पहले रिपोर्ट आई थी कि पिछले साल सीबीआई के एसपी के आर चौरसिया ने सिफारिश की थी कि मनमोहन सिंह से सीबीआई को सवाल करने चाहिए, लेकिन उस समय सीबीआई डायरेक्टर रंजीत सिन्हा ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि अभी इसका वक्त नहीं आया है। तब विपक्ष में रही बीजेपी ने इस मामले में सिंह से पूछताछ न करने के लिए सीबीआई को निशाने पर लिया था। सीबीआई ने अक्टूबर 2013 में बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारेख के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्टाचार की रिपोर्ट दर्ज की।

इसके बाद पीएमओ ने इस बात का लंबा स्पष्टीकरण दिया था कि मनमोहन सिंह के ऑफिस ने हिंडाल्को को अलॉटमेंट की मंजूरी क्यों दी थी। हालांकि सीबीआई ने 28 अगस्त को इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी, जिसे बाद में कोर्ट ने नामंजूर कर दिया। क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया था कि जांच के दौरान मिले सबूत आरोपों की पुष्टि नहीं करते, लेकिन स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर आर एस चीमा ने स्पेशल कोर्ट में इस पर ऐतराज जताया था और कहा था कि इस मामले में सुनवाई करने के लायक सबूत हैं।

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