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कार की Free EMI के नाम पर लगाई चपत

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ऊना- हिमाचल प्रदेश के ऊना में कारों के विज्ञापन के नाम पर करोड़ों के फर्जीवाडे का मामला सामने आया है। फ्री ईएमआई कार का सपना दिखाकर ऊना में आपरेट कर रही एक कंपनी सैकड़ों लोगों को चूना लगाकर फरार हो गई है । पुलिस ने ठगी का शिकार लोगों की शिकायत मिलने के बाद तफ्तीश शुरू कर दी है !

अच्छे घर और एक गाडी का सपना हर आम और ख़ास इंसान की निगाहों में होता है , और इस सपने को पूरा करने के लिए इंसान हर संभव प्रयास करता है ! लेकिन अगर आपको यही सपना दिखाकर कोई लूट जाए और गुस्सा आना लाजिमी है ! कुछ इसी प्रकार का गुस्सा इन दिनों हिमाचल प्रदेश के ऊना के लोगों में भी है ! जहाँ कारों पर विज्ञापन के नाम पर करोड़ों के फर्जीवाडे का मामला सामने आया है।

ऊना की रक्कड़ कॉलोनी में आपरेट कर रही एक कंपनी , फ्री ईएमआई कार का सपना दिखाकर सैकड़ों लोगों को चपत लगाकर फरार हो गई है। आलम ये है कि कंपनी का ऑफिस बंद है और कंपनी के प्रतिनिधि कहे जाने वाले लोगों के मोबाइल नंबर भी ऑफ चल रहे हैं । हुआ यूं कि एड ऑन फॉर व्हील नाम की इस कंपनी ने कार इज योअर्स-ईएमआई इज अवर्ज ’ के नाम से एक स्लोगन दिया और इसे शहर में अच्छी तरह से प्रचारित किया !

इसके तहत कंपनी ने कार के चारों दरवाज़ों पर अपनी दी गयी किसी भी कंपनी का विज्ञापन का प्रचार किये जाने की शर्त रखी और कार लेने वाले ग्राहकों को हर महीने कम से कम 500 किलोमीटर गाड़ी चलानी ज़रूरी थी ! कंपनी इन कारों में एक जीपीएस सिस्टम भी लगाये जाने का दावा करती थी । जीपीएस सिस्टम के बदले कंपनी गाड़ी खरीदने वाले व्यक्ति से पांच लाख रुपए तक की गाडि़यों के 33400 रुपए तथा पांच लाख रुपए से अधिक लागत वाली गाडि़यों के 43500 रुपए लेती थी।

इस योजना के तहत कार लेने वाले लोगों को कंपनी कार की कुल कीमत की 75 प्रतिशत राशि का भुगतान कंपनी द्वारा फ्री ईएमआई के ज़रिये पूरे पाँच साल तक दिए जाने का भरोसा दिया था ! लोगों को अपनी इस योजना के झांसे में फंसाकर कंपनी उन्हीं के नाम पर बैंक या फिर किसी फाइनेंस कंपनी के ज़रिये लोन दिलवाने के लिए फाइल तैयार करवाती थी। लेकिन अपना पैसा वो बिना किसी लिखित करार कर ले रही थी ।

यह कंपनी पांच लाख रुपए तक की कीमत वाली गाडि़यों के लिए सिर्फ नौ हज़ार रूपए प्रति महीने देती थी । इतना ही नहीं कंपनी यह राशि बाकायदा लोगों को बैंक चेक के ज़रिये देती थी, एक दो महीने यह सिलसिला चला लेकिन तीसरे महीने की किश्त देने से पहले ही एड ऑन फॉर व्हील नाम की यह कंपनी फुर्र हो गयी ! लेकिन रफूचक्कर होने से पहले शातिर ठगों की यह कंपनी ऊना के करीब एक हज़ार लोगों को अपनी ठगी का शिकार बना गयी ! इन ठगों के झांसे में आकर निर्दोश लोगों ने ना सिर्फ अपने खून-पसीने की कमाई लूटाई बल्कि अब महंगी गाडि़यों की ईएमआई भी उनके गले पड़ गई है ।

दो शातिर ठगों की इस कंपनी ने अपने झाँसे में लेकर लोगों को अलग-अलग ब्रांड की गाडि़यां दिलाई । लेकिन सबसे ज़्यादा चेवरोलेट की कार इस योजना तहत लोगों को दिलाई गयी ! ऐसे में चेवरोलेट की भूमिका पर भी सवाल उठना लाज़िमी है, लेकिन चेवरोलेट के ऊना डीलर ने इस मामले में चेवरोलेट कंपनी या खुद की किसी भी तरह से भूमिका से इंकार किया है।

चेवरोलेट शोरूम मैनेजर
ठगी का शिकार हुए लोगों ने कंपनी के दो मास्टर माइंड को हिमाचल के बाहर का बताया है , जबकि कुछ फरार हुए कुछ अन्य ठगों का संबंध हिमाचल से बताया है ! कुछ पीड़ित लोगों का दावा है कि गाडी दिलाने में सहायता करने वाला एक शख्स ऊना से ही है ! मीडिया ने जब इस मामले की तह तक जाने के लिए एड ऑन फॉर व्हील नाम की इस कंपनी के दफ्तर जाकर देखा , तो वाकई वहां ताला लगा हुआ मिला ।

मीडिया के हाथ कुछ तस्वीरें भी आई, जिसमे इस दफ्तर के बाहर एक बोर्ड को हटाया जा रहा है । लेकिन लगातार दूसरे दिन जाने पर मीडिया को वहाँ वो शख्स मिला , जिसका दावा पीड़ित लोगों ने गाडी दिलाने में सहायता करने वाले व्यक्ति के रूप में किया था। लेकिन इस शख्स ने भी इस मामले में अपनी भूमिका से साफ़ इंकार किया। इस शख्स की माने तो ठगों ने उससे भी डेढ़ लाख रूपए कंपनी की फ्रेंचाइजी देने के लिए लिया था और कंपनी ने एक फ़र्ज़ी एग्रीमेंट उसे दिया था ! उसके मुताबिक कंपनी के लोग कई दफा उसके ऑफिस में आकर अपना काम किया करते थे !

पीड़ितो की शिकायत पर मामला दर्ज़
फिलहाल पुलिस ने पीड़ित लोगों की शिकायत पर मामला दर्ज़ कर लिया है । पुलिस को इसमें किसी बड़े गिरोह का हाथ होने की आशंका है , हालाँकि पुलिस ने मामले की तफ्तीश के बाद ही ज़्यादा बेहतर बताये जाने का दावा किया है ।

रिपोर्ट :-हरप्रीत सिंह चहल

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