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गैंगरेप पीड़िता बच्ची की लाश को लेकर घूमती रही, लेकिन नहीं मिली मदद


दिल्ली के निर्भया कांड के बाद भी एनसीआर की तस्वीर नहीं बदली है। चाहे दिल्ली की सड़क हो या गुरुग्राम, महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। 29 मई की रात मानेसर इलाके में हुई गैंगरेप की वारदात से यही साबित होता है। हैवानों ने महिला की गोद से छीनकर नौ महीने की बेटी को चलती ऑटो से फेंक दिया। फिर हैवानियत की हदें पार की। घटना के बाद महिला अपनी बच्ची की लाश को लेकर आठ घंटे कर मदद के लिए घूमती रही, लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की। यहां तक की पुलिस ने भी नहीं।

गुरुग्राम में गैंगरेप पीड़िता वारदात के बाद किसी तरह मायके पहुंची। लेकिन उसने गैंगरेप की बात परिजनों को नहीं बताई, उसे डर था कि कहीं उसका पति उसे छोड़ न दे। वारदात के बाद पीड़ित महिला किसी तरह तड़के दिल्ली अपने मायके पहुंची। जहां पर उसकी घायल बच्ची की मौत हो गई।

उसने पुलिस को फोन किया। पुलिस ने उसे गुरुग्राम बुलाया। जिसके बाद वह बच्ची का शव लेकर एमजी रोड मेट्रो स्टेशन दोपहर दो बजे पहुंची। जहां पर थाना प्रभारी नरेन्द्र उससे मिले। बच्ची के शव का पोस्टमार्टम करवाने के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया।

इसी बीच थाना प्रभारी ने अपने एक बयान में पीड़िता के पति का नाम लेते हुए कहा कि पहले वह आया था। उसके बयान पर हत्या का मामला दर्ज कि या गया। बाद में पीड़िता का नाम ले कर बताया कि वह खुद बयान दर्ज कराने आई थी। उसका मेडिकल कराने के बाद 3 जून को गैंगरेप के आरोप को शामिल किया गया।

थाना प्रभारी की ओर से पीड़िता का नाम सार्वजनिक किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। हरियाण महिला आयोग की अध्यक्ष कमलेश पंचाल ने इसकी निंदा की है । उन्होंने कहा है कि वह इस मामले में शिकायत करेंगी।

पुलिस ने पांच दिन बाद दर्ज किया था गैंगरेप का केस

गैंगरेप की वारदात में पुलिस की लापरवाही सामने आई है। पुलिस ने गैंगरेप मामले को पांच दिन बाद 3 जून को दर्ज किया। महिला के मुताबिक, वह 30 मई को अपनी शिकायत लेकर पुलिस थाने गई थी। इसमें पुलिस ने हत्या का मामला तो दर्ज कर लिया, लेकिन गैंगरेप की बात बताने पर थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों ने महिला को धमका कर भगा दिया। वहीं सोमवार को डीसीपी साउथ अशोक बक्शी मानेसर गए और महिला से पूछताछ की।

पुलिस को महिला से पूछताछ में पता चला है कि युवकों ने जब महिला से छेड़खानी शुरू की तो उसने विरोध किया और चिल्लाने लगी। इसके बाद एक युवक ने उसकी नौ माह की बेटी को छीनकर बंधक बना लिया। इसके चलते वह बेबस हो गई।

आईएमटी मानेसर में चलते टाटा मैजिक में गैंगरेप की घटना को अंजाम देने वाले हैवानों ने सीसीटीवी कैमरे में कैद होने से बचने के लिए ही टोल से पहले वाहन को मोड़ा और आउटर सेक्टर 8 की ओर जा पहुंचे । यही कारण है कि आरोपियों का सुराग लगाने में परेशानी हो रही है। पुलिस का कहना है कि यदि चालक ने खेड़कीदौला टोल को पार किया होता तो कुछ सुराग मिल जाता।

@एजेंसी

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